अल-आराफ · 158/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
قُلْ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنِّي رَسُولُ اللَّهِ إِلَيْكُمْ جَمِيعًا الَّذِي لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ يُحْيِي وَيُمِيتُ ۖ فَآمِنُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ النَّبِيِّ الْأُمِّيِّ الَّذِي يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَكَلِمَاتِهِ وَاتَّبِعُوهُ لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ ۝١٥٨
Qul yaaa aiyuhan naasu innee Rasoohul laahi ilaikum jamee`anil lazee lahoo mulkus samaawaati wal ardi laaa ilaaha illaa Huwa yuhyee wa yumeetu fa aaminoo billaahi wa Rasoolihin Nabiyyil ummiy yil lazee yu`minu billaahi wa Kalimaatihee wattabi`oohu la`allakum tahtadoon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम (उन लोगों से) कह दो कि लोगों में तुम सब लोगों के पास उस ख़ुदा का भेजा हुआ (पैग़म्बर) हूँ जिसके लिए ख़ास सारे आसमान व ज़मीन की बादशाहत (हुकूमत) है उसके सिवा और कोई माबूद नहीं वही ज़िन्दा करता है वही मार डालता है पस (लोगों) ख़ुदा और उसके रसूल नबी उल उम्मी पर ईमान लाओ जो (ख़ुद भी) ख़ुदा पर और उसकी बातों पर (दिल से) ईमान रखता है और उसी के क़दम बा क़दम चलो ताकि तुम हिदायत पाओ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الأُمِّي: वह जो पढ़ा-लिखा न हो, जिसने किसी इंसान से सीखा न हो। यहाँ यह नबी ﷺ की विशेषता है कि आप किसी से पढ़े-लिखे नहीं थे, बल्कि आपको अल्लाह की ओर से सीधा ज्ञान मिला।
  • كَلِمَاتِهِ: अल्लाह की वह वाणी और आदेश जो उसने अपने नबियों पर उतारे, यानी उसकी किताबें और वह सब जो उसने अपने रसूलों पर प्रकट किया।
  • يُحْيِي وَيُمِيتُ: वह जीवन देता है और मृत्यु देता है, यानी जीवन और मृत्यु पर पूर्ण अधिकार केवल उसी का है।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप सभी लोगों से कह दीजिए: "मैं अल्लाह का रसूल हूँ जो तुम सबकी ओर भेजा गया हूँ।" यह रिसालत केवल किसी एक क़ौम या समूह के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए है — चाहे वे अरब हों या ग़ैर-अरब, सभी इस दावत के मुखातिब हैं। वह अल्लाह जिसके अधिकार में आसमानों और ज़मीन का पूरा राज्य है, और जिसकी बादशाही में हर चीज़ शामिल है। उसके सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं; हर प्रकार की इबादत केवल उसी के लिए है। वही जीवन देता है और वही मौत देता है, और उसी के पास सबकी वापसी है।

इसलिए, ऐ लोगो! तुम अल्लाह पर ईमान लाओ और उसके रसूल पर भी ईमान लाओ — यानी उस नबी पर जो उम्मी (अनपढ़) है, जिसने कभी किसी इंसान से पढ़ाई नहीं की, बल्कि उसे अल्लाह की ओर से वही (प्रकाशना) मिली। वह अल्लाह पर और उसकी सभी किताबों और उसके सभी नबियों पर ईमान रखता है, उनके बीच कोई अंतर नहीं करता। तुम उसका अनुसरण करो और उसके लाए हुए आदेशों पर चलो, ताकि तुम सीधे रास्ते पर चल सको और गुमराही से बच सको। यही तुम्हारी दुनिया और आख़िरत की भलाई का ज़रिया है।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम का पैग़ाम किसी एक जाति, देश या समय तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए रहमत है। हर इंसान इस दावत का हक़दार है।
  2. अल्लाह की बादशाही हर चीज़ पर है — आसमान और ज़मीन पर। यह यक़ीन दिलाता है कि हमारा रब सबसे बड़ा है, और उसी से हमें मदद माँगनी चाहिए।
  3. नबी ﷺ का उम्मी (अनपढ़) होना उनकी सच्चाई की सबसे बड़ी निशानी है — कि यह कुरआन किसी इंसान की रचना नहीं, बल्कि अल्लाह का भेजा हुआ है। यह हमारे दिल में नबी ﷺ की मुहब्बत और उनकी रिसालत पर भरोसा बढ़ाता है।
  4. ईमान और अमल (अनुसरण) साथ-साथ चाहिए। सिर्फ़ ज़बान से ईमान काफ़ी नहीं, बल्कि नबी ﷺ की सुन्नत पर चलना ही हिदायत की शर्त है।
  5. यह आयत हमें बताती है कि सच्ची हिदायत अल्लाह के रसूल की पैरवी में है — जो कोई इस रास्ते पर चलेगा, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगा।
🎧 सुनें

📜 आयत 156-160 — अल-आराफ

156۞ وَاكْتُبْ لَنَا فِي هَٰذِهِ الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ إِنَّا هُدْنَا إِلَيْكَ ۚ قَالَ عَذَابِي أُصِيبُ بِهِ مَنْ أَشَاءُ ۖ وَرَحْمَتِي وَسِعَتْ كُلَّ شَيْءٍ ۚ فَسَأَكْتُبُهَا لِلَّذِينَ يَتَّقُونَ وَيُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَالَّذِينَ هُم بِآيَاتِنَا يُؤْمِنُونَ
और तू ही इस दुनिया (फ़ानी) और आख़िरत में हमारे वास्ते भलाई के लिए लिख ले हम तेरी ही तरफ रूझू करते हैं ख़ुदा ने फरमाया जिसको मैं चाहता हूँ (मुस्तहक़ समझकर) अपना अज़ाब पहुँचा देता हूँ और मेरी रहमत हर चीज़ पर छाई हैं मै तो उसे बहुत जल्द ख़ास उन लोगों के लिए लिख दूँगा (जो बुरी बातों से) बचते रहेंगे और ज़कात दिया करेंगे और जो हमारी बातों पर ईमान रखा करेंगें
157الَّذِينَ يَتَّبِعُونَ الرَّسُولَ النَّبِيَّ الْأُمِّيَّ الَّذِي يَجِدُونَهُ مَكْتُوبًا عِندَهُمْ فِي التَّوْرَاةِ وَالْإِنجِيلِ يَأْمُرُهُم بِالْمَعْرُوفِ وَيَنْهَاهُمْ عَنِ الْمُنكَرِ وَيُحِلُّ لَهُمُ الطَّيِّبَاتِ وَيُحَرِّمُ عَلَيْهِمُ الْخَبَائِثَ وَيَضَعُ عَنْهُمْ إِصْرَهُمْ وَالْأَغْلَالَ الَّتِي كَانَتْ عَلَيْهِمْ ۚ فَالَّذِينَ آمَنُوا بِهِ وَعَزَّرُوهُ وَنَصَرُوهُ وَاتَّبَعُوا النُّورَ الَّذِي أُنزِلَ مَعَهُ ۙ أُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
(यानि) जो लोग हमारे बनी उल उम्मी पैग़म्बर के क़दम बा क़दम चलते हैं जिस (की बशारत) को अपने हॉ तौरैत और इन्जील में लिखा हुआ पाते है (वह नबी) जो अच्छे काम का हुक्म देता है और बुरे काम से रोकता है और जो पाक व पाकीज़ा चीजे तो उन पर हलाल और नापाक गन्दी चीजे उन पर हराम कर देता है और (सख्त एहकाम का) बोझ जो उनकी गर्दन पर था और वह फन्दे जो उन पर (पड़े हुए) थे उनसे हटा देता है पस (याद रखो कि) जो लोग (नबी मोहम्मद) पर ईमान लाए और उसकी इज्ज़त की और उसकी मदद की और उस नूर (क़ुरान) की पैरवी की जो उसके साथ नाज़िल हुआ है तो यही लोग अपनी दिली मुरादे पाएंगें
158قُلْ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنِّي رَسُولُ اللَّهِ إِلَيْكُمْ جَمِيعًا الَّذِي لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ يُحْيِي وَيُمِيتُ ۖ فَآمِنُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ النَّبِيِّ الْأُمِّيِّ الَّذِي يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَكَلِمَاتِهِ وَاتَّبِعُوهُ لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ
(ऐ रसूल) तुम (उन लोगों से) कह दो कि लोगों में तुम सब लोगों के पास उस ख़ुदा का भेजा हुआ (पैग़म्बर) हूँ जिसके लिए ख़ास सारे आसमान व ज़मीन की बादशाहत (हुकूमत) है उसके सिवा और कोई माबूद नहीं वही ज़िन्दा करता है वही मार डालता है पस (लोगों) ख़ुदा और उसके रसूल नबी उल उम्मी पर ईमान लाओ जो (ख़ुद भी) ख़ुदा पर और उसकी बातों पर (दिल से) ईमान रखता है और उसी के क़दम बा क़दम चलो ताकि तुम हिदायत पाओ
159وَمِن قَوْمِ مُوسَىٰ أُمَّةٌ يَهْدُونَ بِالْحَقِّ وَبِهِ يَعْدِلُونَ
और मूसा की क़ौम के कुछ लोग ऐसे भी है जो हक़ बात की हिदायत भी करते हैं और हक़ के (मामलात में) इन्साफ़ भी करते हैं
160وَقَطَّعْنَاهُمُ اثْنَتَيْ عَشْرَةَ أَسْبَاطًا أُمَمًا ۚ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ إِذِ اسْتَسْقَاهُ قَوْمُهُ أَنِ اضْرِب بِّعَصَاكَ الْحَجَرَ ۖ فَانبَجَسَتْ مِنْهُ اثْنَتَا عَشْرَةَ عَيْنًا ۖ قَدْ عَلِمَ كُلُّ أُنَاسٍ مَّشْرَبَهُمْ ۚ وَظَلَّلْنَا عَلَيْهِمُ الْغَمَامَ وَأَنزَلْنَا عَلَيْهِمُ الْمَنَّ وَالسَّلْوَىٰ ۖ كُلُوا مِن طَيِّبَاتِ مَا رَزَقْنَاكُمْ ۚ وَمَا ظَلَمُونَا وَلَٰكِن كَانُوا أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
और हमने बनी ईसराइल के एक एक दादा की औलाद को जुदा जुदा बारह गिरोह बना दिए और जब मूसा की क़ौम ने उनसे पानी मॉगा तो हमने उनके पास वही भेजी कि तुम अपनी छड़ी पत्थर पर मारो (छड़ी मारना था) कि उस पत्थर से पानी के बारह चश्मे फूट निकले और ऐसे साफ साफ अलग अलग कि हर क़बीले ने अपना अपना घाट मालूम कर लिया और हमने बनी ईसराइल पर अब्र (बादल) का साया किया और उन पर मन व सलवा (सी नेअमत) नाज़िल की (लोगों) जो पाक (पाकीज़ा) चीज़े तुम्हें दी हैं उन्हें (शौक़ से खाओ पियो) और उन लोगों ने (नाफरमानी करके) कुछ हमारा नहीं बिगाड़ा बल्कि अपना आप ही बिगाड़ते हैं
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Tuesday, August 18, 2026

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