नूह · 25/28
अनुवाद उच्चारण — सूरा नूह
مِّمَّا خَطِيئَاتِهِمْ أُغْرِقُوا فَأُدْخِلُوا نَارًا فَلَمْ يَجِدُوا لَهُم مِّن دُونِ اللَّهِ أَنصَارًا ۝٢٥
Mimmaa khateee` aatihim ughriqoo fa udkhiloo Naaran falam yajidoo lahum min doonil laahi ansaaraa
📖 हिंदी अर्थ
(आख़िर) वह अपने गुनाहों की बदौलत (पहले तो) डुबाए गए फिर जहन्नुम में झोंके गए तो उन लोगों ने ख़ुदा के सिवा किसी को अपना मददगार न पाया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مِمَّا خَطِيئَاتِهِمْ – उनके गुनाहों की वजह से
  • أُغْرِقُوا – डुबो दिए गए (पानी में)
  • فَأُدْخِلُوا نَارًا – फिर आग में डाल दिए गए
  • أَنصَارًا – मददगार, सहायक

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम के अंजाम को बयान करती है। जब उन्होंने हक़ को ठुकराया, नबी की दावत को नकारा और अपने गुनाहों पर अड़े रहे, तो अल्लाह का अज़ाब आया। उनके गुनाह ही वजह बने कि उन्हें तूफ़ान में डुबो दिया गया। यह सिर्फ़ पानी में डूबना नहीं था, बल्कि उसके बाद उन्हें आग में डाला गया — यानी दुनिया के अज़ाब के बाद आख़िरत का अज़ाब भी उनका इंतज़ार कर रहा था।

जब अल्लाह का फ़ैसला आ जाता है, तो कोई ताक़त उसे टाल नहीं सकती। उन्होंने अपने लिए मददगार ढूंढ़े — बड़े-बड़े सरदार, ताक़तवर लोग, झूठे माबूद — लेकिन जब अल्लाह का अज़ाब आया, तो कोई भी उन्हें बचाने नहीं आया। न उनके बुत, न उनके सरदार, न उनकी ताक़त। अल्लाह के सिवा कोई मददगार नहीं मिला।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है। गुनाह इंसान को धीरे-धीरे तबाही की तरफ ले जाते हैं। अगर इंसान गुनाहों पर अड़ा रहे और तौबा न करे, तो अल्लाह का अज़ाब आ सकता है। लेकिन अल्लाह रहीम और करीम है — जब तक इंसान ज़िंदा है, तौबा का दरवाज़ा खुला है। हमें चाहिए कि अपने गुनाहों से तौबा करें, अल्लाह की तरफ लौटें, और याद रखें कि अल्लाह के सिवा कोई मददगार और बचाने वाला नहीं है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। जब वह पकड़ता है, तो कोई छुड़ाने वाला नहीं होता। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह के हुक्मों पर चलना चाहिए, उसकी नाफ़रमानी से बचना चाहिए, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक ढालना चाहिए। अल्लाह हमें गुनाहों से बचाए और सीधी राह पर चलाए। आमीन।



📜 आयत 23-27 — सूरा नूह

23وَقَالُوا لَا تَذَرُنَّ آلِهَتَكُمْ وَلَا تَذَرُنَّ وَدًّا وَلَا سُوَاعًا وَلَا يَغُوثَ وَيَعُوقَ وَنَسْرًا
और (उलटे) कहने लगे कि आपने माबूदों को हरगिज़ न छोड़ना और न वद को और सुआ को और न यगूस और यऊक़ व नस्र को छोड़ना
24وَقَدْ أَضَلُّوا كَثِيرًا ۖ وَلَا تَزِدِ الظَّالِمِينَ إِلَّا ضَلَالًا
और उन्होंने बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा और तू (उन) ज़ालिमों की गुमराही को और बढ़ा दे
25مِّمَّا خَطِيئَاتِهِمْ أُغْرِقُوا فَأُدْخِلُوا نَارًا فَلَمْ يَجِدُوا لَهُم مِّن دُونِ اللَّهِ أَنصَارًا
(आख़िर) वह अपने गुनाहों की बदौलत (पहले तो) डुबाए गए फिर जहन्नुम में झोंके गए तो उन लोगों ने ख़ुदा के सिवा किसी को अपना मददगार न पाया
26وَقَالَ نُوحٌ رَّبِّ لَا تَذَرْ عَلَى الْأَرْضِ مِنَ الْكَافِرِينَ دَيَّارًا
और नूह ने अर्ज़ की परवरदिगार (इन) काफ़िरों में रूए ज़मीन पर किसी को बसा हुआ न रहने दे
27إِنَّكَ إِن تَذَرْهُمْ يُضِلُّوا عِبَادَكَ وَلَا يَلِدُوا إِلَّا فَاجِرًا كَفَّارًا
क्योंकि अगर तू उनको छोड़ देगा तो ये (फिर) तेरे बन्दों को गुमराह करेंगे और उनकी औलाद भी गुनाहगार और कट्टी काफिर ही होगी
नूहकुरान सूची
28आयत
मक्कीअवतरण स्थान
25आयत

अनुवाद — नूह 25

सूरा नूह आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (आख़िर) वह अपने गुनाहों की बदौलत (पहले तो) डुबाए गए…

सूरा आयत 25/28 — सूरा नूह نوح (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा नूह सुनें, सूरा नूह अनुवाद, सूरा नूह mp3, सूरा नूह pdf. आयत 23–27. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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