अल-जिन्न · 9/28
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-जिन्न
وَأَنَّا كُنَّا نَقْعُدُ مِنْهَا مَقَاعِدَ لِلسَّمْعِ ۖ فَمَن يَسْتَمِعِ الْآنَ يَجِدْ لَهُ شِهَابًا رَّصَدًا ۝٩
Wa annaa kunnaa naq`udu minhaa maqaa`ida lis`sam`i famany yastami`il aana yajid lahoo shihaabar rasada
📖 हिंदी अर्थ
और ये कि पहले हम वहाँ बहुत से मक़ामात में (बातें) सुनने के लिए बैठा करते थे मगर अब कोई सुनना चाहे तो अपने लिए शोले तैयार पाएगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَقَاعِدَ لِلسَّمْعِ: सुनने के लिए बैठने की जगहें।
  • شِهَابًا: आग का जलता हुआ टुकड़ा (उल्का/तारा)।
  • رَّصَدًا: पहरा देने वाला, तैयार खड़ा, जो निशाना बनाकर मारने के लिए घात लगाए हो।

तफसीर (व्याख्या):

जिन्नों के इस समूह ने यह स्वीकार किया कि पहले हम आसमान में ऐसी जगहों पर बैठा करते थे जहाँ से हम फ़रिश्तों की बातचीत चुराकर सुन लेते थे। हम उन बातों को सुनकर ज़मीन के काहिनों (ज्योतिषियों/نجومیوں) तक पहुँचा देते थे, और वे लोग उन्हीं चुराई हुई बातों को मिलाकर झूठ बोलते थे। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं — जब से अल्लाह ने अपने आख़िरी नबी (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को मिशन पर भेजा, आसमान को सख्त पहरेदारी में ले लिया गया। अब जो भी जिन्न या शैतान चोरी-छिपे सुनने की कोशिश करता है, उसे एक जलता हुआ उल्का (शिहाब) मिलता है जो उसके लिए घात लगाए तैयार रहता है और उसे जला देता है या नष्ट कर देता है।

यह आयत उन झूठे دعاویٰ کو باطل करती है जो जादूगर, काहिन और नजूमी (astrologers) करते हैं। वे लोग दावा करते हैं कि हमें ग़ैब (छिपी हुई बातों) का इल्म है, और कमज़ोर दिमाग़ वाले लोगों को धोखा देते हैं। यह आयत साफ़ करती है कि ग़ैब का इल्म सिर्फ़ अल्लाह को है, और आसमानी ख़बरों तक पहुँचना अब नामुमकिन है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ने अपने दीन की हिफ़ाज़त का इंतज़ाम ख़ुद किया है। जिस तरह आसमान को शैतानों से महफ़ूज़ रखा गया, उसी तरह अल्लाह का क़ुरआन और सुन्नत भी हर तरह की तहरीफ़ से महफ़ूज़ हैं। यह हमारे लिए इत्मीनान की बात है कि हमारा दीन मज़बूत है, और हमें किसी जादूगर, काहिन या नजूमी की तरफ़ रुजू करने की ज़रूरत नहीं। यह ईमान की कमज़ोरी है कि इंसान इन झूठे लोगों की बातों पर भरोसा करे। अल्लाह ने हमें अक़्ल दी है और सीधा रास्ता दिखाया है — हमें सिर्फ़ उसी पर चलना चाहिए। जो लोग इन झूठे دعاویٰ سے बचेंगे, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत में कामयाबी देगा।



📜 आयत 7-11 — सूरा अल-जिन्न

7وَأَنَّهُمْ ظَنُّوا كَمَا ظَنَنتُمْ أَن لَّن يَبْعَثَ اللَّهُ أَحَدًا
और ये कि जैसा तुम्हारा ख्याल है वैसा उनका भी एतक़ाद था कि ख़ुदा हरगिज़ किसी को दोबारा नहीं ज़िन्दा करेगा
8وَأَنَّا لَمَسْنَا السَّمَاءَ فَوَجَدْنَاهَا مُلِئَتْ حَرَسًا شَدِيدًا وَشُهُبًا
और ये कि हमने आसमान को टटोला तो उसको भी बहुत क़वी निगेहबानों और शोलो से भरा हुआ पाया
9وَأَنَّا كُنَّا نَقْعُدُ مِنْهَا مَقَاعِدَ لِلسَّمْعِ ۖ فَمَن يَسْتَمِعِ الْآنَ يَجِدْ لَهُ شِهَابًا رَّصَدًا
और ये कि पहले हम वहाँ बहुत से मक़ामात में (बातें) सुनने के लिए बैठा करते थे मगर अब कोई सुनना चाहे तो अपने लिए शोले तैयार पाएगा
10وَأَنَّا لَا نَدْرِي أَشَرٌّ أُرِيدَ بِمَن فِي الْأَرْضِ أَمْ أَرَادَ بِهِمْ رَبُّهُمْ رَشَدًا
और ये कि हम नहीं समझते कि उससे अहले ज़मीन के हक़ में बुराई मक़सूद है या उनके परवरदिगार ने उनकी भलाई का इरादा किया है
11وَأَنَّا مِنَّا الصَّالِحُونَ وَمِنَّا دُونَ ذَٰلِكَ ۖ كُنَّا طَرَائِقَ قِدَدًا
और ये कि हममें से कुछ लोग तो नेकोकार हैं और कुछ लोग और तरह के हम लोगों के भी तो कई तरह के फिरकें हैं
अल-जिन्नकुरान सूची
28आयत
मक्कीअवतरण स्थान
9आयत

अनुवाद — अल-जिन्न 9

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Monday, September 28, 2026

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