Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَا نَدْرِي – हम नहीं जानते
- أُرِيدَ – चाहा गया, इरादा किया गया
- بِمَن فِي الْأَرْضِ – उन लोगों के साथ जो धरती पर हैं
- رَشَدًا – भलाई, हिदायत, सीधा रास्ता
तफसीर:
जब अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ को भेजा और आसमानी फ़रिश्तों की कड़ी सुरक्षा में वह़ी का सिलसिला शुरू हुआ, तो जिन्नात जो पहले आसमान की खबरें चुराकर सुन लिया करते थे, उन्होंने देखा कि हर तरफ पहरेदार फ़रिश्ते तैनात हैं और शैतानों को आसमान की तरफ बढ़ने से रोका जा रहा है। यह देखकर जिन्नों की एक जमात ने आपस में कहा: "हमें नहीं मालूम कि इस कड़ी निगरानी और बदले हुए हालात का मतलब क्या है – क्या धरती वालों के लिए कोई बुराई और अज़ाब का इरादा किया गया है, या उनके रब ने उनके लिए भलाई और हिदायत का फैसला किया है?"
यानी जिन्नों ने महसूस किया कि आसमानी दुनिया में एक बड़ा बदलाव आ गया है, और वे इस बात को लेकर हैरान थे कि यह बदलाव इंसानों के लिए खैर का पैग़ाम लेकर आया है या अज़ाब का। जब उन्होंने क़ुरआन सुना तो उन्हें समझ आ गया कि यह रहमत और हिदायत का ज़माना है, क्योंकि अल्लाह ने इस क़ुरआन को इंसानों और जिन्नों की हिदायत के लिए उतारा है।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह के फैसले बंदों की भलाई के लिए होते हैं। कभी इंसान किसी मुसीबत या बदलाव को देखकर घबरा जाता है, लेकिन असल में अल्लाह उसके साथ भलाई ही चाहता है। जब अल्लाह की तरफ से कोई नई बात आए, तो हमें उसे रहमत और हिदायत का ज़रिया समझना चाहिए, जैसे जिन्नों ने क़ुरआन सुनकर उसे हिदायत का ज़रिया बनाया और ईमान ले आए।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इंसान को अपने रब की रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए। अल्लाह जो कुछ भी करता है, बंदों की भलाई के लिए करता है। चाहे वह कोई परीक्षा हो या कोई नई नेमत, हर हाल में अल्लाह का इरादा अपने बंदों के साथ भलाई का ही होता है। हमें चाहिए कि हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी तरफ से आने वाली हर चीज़ को रहमत समझें।
📜 आयत 8-12 — सूरा अल-जिन्न
अनुवाद — अल-जिन्न 10
सूरा अल-जिन्न आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये कि हम नहीं समझते कि उससे अहले ज़मीन…सूरा आयत 10/28 — सूरा अल-जिन्न الجن (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-जिन्न सुनें, सूरा अल-जिन्न अनुवाद, सूरा अल-जिन्न mp3, सूरा अल-जिन्न pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-जिन्न
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


