अल-मुद्दस्सिर · 21/56
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुद्दस्सिर
ثُمَّ نَظَرَ ۝٢١
Summa nazar
📖 हिंदी अर्थ
फिर ग़ौर किया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ثُمَّ = फिर, इसके बाद
  • نَظَرَ = देखा, ग़ौर किया, सोचा-विचारा

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला उस सरकश और हठधर्मी इंसान (वलीद बिन मुग़ीरा) का हाल बयान कर रहा है, जिसने रसूलुल्लाह ﷺ और क़ुरआन करीम के ख़िलाफ़ झूठे इल्ज़ामात गढ़ने के लिए अपने दिमाग़ पर ज़ोर डाला।

पहले उसने सोचा, फिर उसने दोबारा ग़ौर किया — यानी उसने अपनी निगाहें दोबारा उठाईं और फिर से सोच-विचार में पड़ गया। वह कोई ऐसा बहाना तलाश करना चाहता था जिससे वह क़ुरआन के जादुई असर को झुठला सके, लेकिन उसका दिल काला था और उसकी नीयत ख़राब थी।

यह निगाह डालना सिर्फ़ ज़ाहिरी नहीं था, बल्कि वह अपने अंदरूनी ख़यालात में डूबकर यह तय करना चाहता था कि लोगों के सामने क्या बयान पेश करे। वह जानता था कि क़ुरआन का कलाम इंसानी कलाम नहीं है, लेकिन अपने घमंड और अंधी दुश्मनी की वजह से वह हक़ को क़बूल नहीं करना चाहता था।

अल्लाह तआला ने उसकी इस हालत को बयान करके हमें सबक़ दिया है कि जब इंसान हक़ से मुँह मोड़ता है और अपनी सोच को बुराई की तरफ़ मोड़ लेता है, तो वह कितनी बुरी मंज़िल तक पहुँच जाता है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि सोच-विचार करना बुरा नहीं है, बल्कि बुराई उस सोच में है जो हक़ को झुठलाने और ग़लत रास्ते पर चलने के लिए की जाए। एक मोमिन की सोच हमेशा अच्छाई, नेकी और अल्लाह की रज़ा की तलाश में होती है, जबकि मुनाफ़िक़ और काफ़िर की सोच हक़ को दबाने और बुराई फैलाने में लगी रहती है।

हमें चाहिए कि हम अपनी सोच और ग़ौर-फ़िक्र को अल्लाह की इबादत, उसके कलाम को समझने और अच्छे कामों की तरफ़ लगाएँ, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी हासिल कर सकें।



📜 आयत 19-23 — सूरा अल-मुद्दस्सिर

19فَقُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ
तो ये (कम्बख्त) मार डाला जाए
20ثُمَّ قُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ
उसने क्यों कर तजवीज़ की
21ثُمَّ نَظَرَ
फिर ग़ौर किया
22ثُمَّ عَبَسَ وَبَسَرَ
फिर त्योरी चढ़ाई और मुँह बना लिया
23ثُمَّ أَدْبَرَ وَاسْتَكْبَرَ
फिर पीठ फेर कर चला गया और अकड़ बैठा
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अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 21

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Saturday, October 3, 2026

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