अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ثُمَّ = फिर, इसके बाद
- نَظَرَ = देखा, ग़ौर किया, सोचा-विचारा
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला उस सरकश और हठधर्मी इंसान (वलीद बिन मुग़ीरा) का हाल बयान कर रहा है, जिसने रसूलुल्लाह ﷺ और क़ुरआन करीम के ख़िलाफ़ झूठे इल्ज़ामात गढ़ने के लिए अपने दिमाग़ पर ज़ोर डाला।
पहले उसने सोचा, फिर उसने दोबारा ग़ौर किया — यानी उसने अपनी निगाहें दोबारा उठाईं और फिर से सोच-विचार में पड़ गया। वह कोई ऐसा बहाना तलाश करना चाहता था जिससे वह क़ुरआन के जादुई असर को झुठला सके, लेकिन उसका दिल काला था और उसकी नीयत ख़राब थी।
यह निगाह डालना सिर्फ़ ज़ाहिरी नहीं था, बल्कि वह अपने अंदरूनी ख़यालात में डूबकर यह तय करना चाहता था कि लोगों के सामने क्या बयान पेश करे। वह जानता था कि क़ुरआन का कलाम इंसानी कलाम नहीं है, लेकिन अपने घमंड और अंधी दुश्मनी की वजह से वह हक़ को क़बूल नहीं करना चाहता था।
अल्लाह तआला ने उसकी इस हालत को बयान करके हमें सबक़ दिया है कि जब इंसान हक़ से मुँह मोड़ता है और अपनी सोच को बुराई की तरफ़ मोड़ लेता है, तो वह कितनी बुरी मंज़िल तक पहुँच जाता है।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि सोच-विचार करना बुरा नहीं है, बल्कि बुराई उस सोच में है जो हक़ को झुठलाने और ग़लत रास्ते पर चलने के लिए की जाए। एक मोमिन की सोच हमेशा अच्छाई, नेकी और अल्लाह की रज़ा की तलाश में होती है, जबकि मुनाफ़िक़ और काफ़िर की सोच हक़ को दबाने और बुराई फैलाने में लगी रहती है।
हमें चाहिए कि हम अपनी सोच और ग़ौर-फ़िक्र को अल्लाह की इबादत, उसके कलाम को समझने और अच्छे कामों की तरफ़ लगाएँ, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी हासिल कर सकें।
📜 आयत 19-23 — अल-मुद्दस्सिर
अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 21
सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर ग़ौर कियासूरा आयत 21/56 — अल-मुद्दस्सिर المدثر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुद्दस्सिर सुनें, अल-मुद्दस्सिर अनुवाद, अल-मुद्दस्सिर mp3, अल-मुद्दस्सिर pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








