अल-मुद्दस्सिर · 22/56
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुद्दस्सिर
ثُمَّ عَبَسَ وَبَسَرَ ۝٢٢
Summa `abasa wa basar
📖 हिंदी अर्थ
फिर त्योरी चढ़ाई और मुँह बना लिया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عَبَسَ (अबसा): चेहरे पर बल डालना, भौंहें चढ़ाना, त्योरी चढ़ाना।
  • بَسَرَ (बसरा): चेहरे को और अधिक बदनुमा करना, सिकोड़ना, क्रोध और गुस्से से चेहरे का और ज़्यादा कड़ा और भयानक हो जाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में उस व्यक्ति की हालत का वर्णन किया गया है जो सत्य का विरोधी है और अपने मन में ईर्ष्या और अहंकार की आग पाले हुए है। जब उसने सोचा कि किस तरह क़ुरआन और रसूल ﷺ पर आक्षेप लगाया जाए, और उसे कोई ठोस बात नहीं सूझी, तो उसका चेहरा मैला हो गया। उसने त्योरी चढ़ाई, भौंहें टेढ़ी कीं, और चेहरे पर गुस्से और नफ़रत के निशान साफ़ दिखाई देने लगे। वह सोच-सोचकर और अधिक बिगड़ गया, उसका चेहरा और भी ज़्यादा विकृत और भयानक हो गया, क्योंकि उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या बहाना बनाए और किस तरह सत्य को झुठलाए।

यह चेहरे का बिगड़ना और त्योरी चढ़ाना उसकी अंदरूनी हालत का आईना था। उसका दिल सत्य से भरा हुआ था, लेकिन अहंकार और दुनियावी मोह ने उसे अंधा कर दिया था। जब सत्य सामने आया और उसे कोई कमी नज़र नहीं आई, तो उसकी नफ़रत और बढ़ गई और उसने चेहरे पर उसे ज़ाहिर किया।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य को स्वीकार करने में देरी और उससे मुँह मोड़ना इंसान के चेहरे और दिल दोनों पर बुरा असर डालता है। जो व्यक्ति सत्य को देखकर भी उसे नकारता है, वह अपने ही अंदर जलता है और उसका चेहरा उसकी बेचैनी को ज़ाहिर करता है। इसके विपरीत, जो इंसान सत्य को खुले दिल से क़बूल करता है, उसका चेहरा नूरानी और दिल सुकून से भरा होता है।

अल्लाह तआला ने हमें अक़्ल और समझ दी है ताकि हम सत्य को पहचानें और उस पर चलें। क़ुरआन वह सच्चाई है जो इंसान को ज़िंदगी की हर मुश्किल में रास्ता दिखाती है। जो इसे अपनाता है, उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी मिलती है। आइए, हम उन लोगों की तरह न बनें जो सत्य से मुँह मोड़ते हैं और अपने चेहरे को बदनुमा करते हैं, बल्कि हम उन लोगों में से हों जो सत्य को सुनकर उसे क़बूल करते हैं और अपने चेहरे को ईमान की रोशनी से रोशन करते हैं।



📜 आयत 20-24 — सूरा अल-मुद्दस्सिर

20ثُمَّ قُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ
उसने क्यों कर तजवीज़ की
21ثُمَّ نَظَرَ
फिर ग़ौर किया
22ثُمَّ عَبَسَ وَبَسَرَ
फिर त्योरी चढ़ाई और मुँह बना लिया
23ثُمَّ أَدْبَرَ وَاسْتَكْبَرَ
फिर पीठ फेर कर चला गया और अकड़ बैठा
24فَقَالَ إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ يُؤْثَرُ
फिर कहने लगा ये बस जादू है जो (अगलों से) चला आता है
अल-मुद्दस्सिरकुरान सूची
56आयत
मक्कीअवतरण स्थान
22आयत

अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 22

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Thursday, October 1, 2026

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