Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- हल अता (هل أتى): अर्थात "निश्चय ही आ चुका" — यहाँ "هل" का प्रयोग सकारात्मक पुष्टि के लिए हुआ है, प्रश्न के लिए नहीं।
- अल-इंसान (الإنسان): यहाँ से मुराद हज़रत आदम अलैहिस्सलाम हैं।
- हीन (حين): अर्थात एक लंबी अवधि, समय का एक खंड।
- अद-दहर (الدهر): समय, ज़माना।
- मज़कूरन (مذكورًا): जिसका कोई ज़िक्र हो, जिसकी कोई पहचान हो, जो किसी के ध्यान में हो।
तफ़सीर:
निश्चय ही मनुष्य (आदम अलैहिस्सलाम) पर समय का एक लंबा दौर गुज़र चुका है, जब वह कोई ऐसी चीज़ नहीं था जिसका ज़िक्र किया जाता — न उसका कोई नाम था, न कोई पहचान, न कोई निशान। वह पूर्ण रूप से अस्तित्वहीन था, मिट्टी और पानी के रूप में बिखरा हुआ था, और किसी को उसके होने का कोई ज्ञान तक नहीं था।
यह अल्लाह तआला की उस महान शक्ति और कुदरत की निशानी है, जिसने उस अस्तित्वहीन और बेज़िक्र इंसान को पैदा किया, फिर उसे एक बेहतरीन रूप दिया, उसमें रूह फूँकी, और उसे अशरफ़ुल मख़लूक़ात (सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी) बनाया। यही वह इंसान है जिसे अल्लाह ने ज़मीन का ख़लीफ़ा बनाया, फ़रिश्तों को उसे सजदा करने का आदेश दिया, और उसे ज्ञान व समझ की दौलत से नवाज़ा।
इस आयत में इंसान के लिए एक गहरी सीख और नसीहत है — जब वह पहले कुछ भी नहीं था, और अल्लाह ने उसे यह सब कुछ दिया, तो उसे अपने रब का शुक्रगुज़ार होना चाहिए, अपने अस्तित्व पर घमंड नहीं करना चाहिए। जिसने उसे अस्तित्व दिया, वही उसे दोबारा जीवित करने पर भी पूर्ण रूप से क़ादिर है। यह आयत इंसान को अल्लाह की तरफ़ लौटने, उसकी इबादत करने और उसके हुक्मों पर चलने की तरग़ीब देती है — क्योंकि जिसने पहली बार पैदा किया, वही दूसरी बार भी पैदा करेगा, और उसी के सामने हमें हिसाब देना है।
यह भी एक बड़ी नेमत है कि अल्लाह ने इंसान को याद रखा, उसे अपनी रहमत और हिदायत से नवाज़ा, और उसके लिए रसूल और किताबें भेजीं — ताकि वह अंधेरों से निकलकर रोशनी की तरफ़ आए। कितना बड़ा एहसान है अल्लाह का कि उसने हमें इस क़ाबिल बनाया कि हम उसे जानें, उसकी इबादत करें और उसकी रहमत के हक़दार बनें।
📜 आयत 1-3 — सूरा अल-इंसान
अनुवाद — अल-इंसान 1
सूरा अल-इंसान आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक इन्सान पर एक ऐसा वक्त अा चुका है कि…सूरा आयत 1/31 — सूरा अल-इंसान الإنسان (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-इंसान सुनें, सूरा अल-इंसान अनुवाद, सूरा अल-इंसान mp3, सूरा अल-इंसान pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-इंसान
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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