अल-अनफाल · 37/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
لِيَمِيزَ اللَّهُ الْخَبِيثَ مِنَ الطَّيِّبِ وَيَجْعَلَ الْخَبِيثَ بَعْضَهُ عَلَىٰ بَعْضٍ فَيَرْكُمَهُ جَمِيعًا فَيَجْعَلَهُ فِي جَهَنَّمَ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ ۝٣٧
Liyameezal laahul khabeesa minat taiyibi wa yaj`alal khabeesa ba`dahoo `ala ba`din fayarkumahoo jamee`an fayaj`alahoo fee Jahannnam; ulaaa`ika humul khaasiroon
📖 हिंदी अर्थ
ताकि ख़ुदा पाक को नापाक से जुदा कर दे और नापाक लोगों को एक दूसरे पर रखके ढेर बनाए फिर सब को जहन्नुम में झोंक दे यही लोग घाटा उठाने वाले हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لِيَمِيزَ: अलग करने के लिए, स्पष्ट करने के लिए।
  • الْخَبِيثَ: नापाक, बुरा, अशुद्ध (यहाँ अर्थ: काफिर और उसका धन)।
  • الطَّيِّبَ: पाक, अच्छा, शुद्ध (यहाँ अर्थ: मोमिन और उसका धन)।
  • فَيَرْكُمَهُ: उसे एक दूसरे के ऊपर जमा कर दे, तह बा तह कर दे।
  • الْخَاسِرُونَ: घाटे में रहने वाले, नुकसान उठाने वाले।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन काफिरों के अंजाम को बयान कर रही है जिन्होंने अपने माल को इसलिए खर्च किया ताकि लोगों को अल्लाह के रास्ते से रोकें और ईमान लाने से बाज़ रखें। अल्लाह तआला ने उनके इस खर्च को बेकार और नापाक क़रार दिया और फरमाया कि यह सब कुछ इसलिए है ताकि अल्लाह नापाक (ख़बीस) को पाक (तैय्यिब) से अलग कर दे। यानी काफिरों को मोमिनों से, और उनके नापाक अमल और नापाक माल को पाक अमल और पाक माल से जुदा कर दे।

फिर अल्लाह फरमाता है कि वह इस नापाक (ख़बीस) को — चाहे वह लोग हों, उनके अमल हों या उनके माल — एक दूसरे के ऊपर जमा करेगा, यानी उन्हें ढेर बना देगा, तह बा तह कर देगा, और फिर उस पूरे ढेर को जहन्नम की आग में झोंक देगा। यानी उनका सारा खर्च किया हुआ माल, उनकी सारी कोशिशें और वे खुद — सब कुछ जहन्नम में डाल दिया जाएगा। यही लोग असली घाटे में हैं, क्योंकि उन्होंने दुनिया में अपना माल और अपनी जान दोनों गंवाए, और आख़िरत में भी उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ बल्कि हमेशा के अज़ाब में डाल दिए गए। उन्होंने अपने आपको और अपने परिवारों को क़ियामत के दिन बड़े नुकसान में डाला।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह तआला का क़ानून है कि वह सच्चाई और झूठ, अच्छाई और बुराई को हमेशा अलग करता है। यह अलगाव क़ियामत के दिन पूरी तरह सामने आएगा, जब हर नेकी और बदी को उसके असल रूप में पेश किया जाएगा।
  2. जो माल और कोशिशें अल्लाह के रास्ते में रुकावट डालने के लिए खर्च की जाएं, वे न सिर्फ़ बेकार हैं बल्कि उनका अंजाम जहन्नम है। इससे हमें सीख मिलती है कि हमारा हर खर्च और हर अमल नेक नीयत और अल्लाह की रज़ा के लिए होना चाहिए।
  3. यह आयत मोमिनों के लिए खुशखबरी है कि उनका पाक माल और पाक अमल अल्लाह के यहाँ महफूज़ है, और काफिरों का नापाक माल और नापाक अमल उनके लिए अज़ाब का ज़रिया बनेगा। इसलिए हमें हमेशा हलाल कमाई और नेक अमल की तरफ ध्यान देना चाहिए।
  4. असली घाटा दुनिया का माल खोना नहीं है, बल्कि असली घाटा आख़िरत में अपने आपको और अपने अहल-ओ-अयाल को अल्लाह के अज़ाब से बचाने में नाकाम रहना है। यही वह नुकसान है जिसकी कोई तلافी नहीं।


📜 आयत 35-39 — अल-अनफाल

35وَمَا كَانَ صَلَاتُهُمْ عِندَ الْبَيْتِ إِلَّا مُكَاءً وَتَصْدِيَةً ۚ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ
और ख़ानाए काबे के पास सीटियॉ तालिया बजाने के सिवा उनकी नमाज ही क्या थी तो (ऐ काफिरों) जब तुम कुफ्र किया करते थे उसकी सज़ा में (पड़े) अज़ाब के मज़े चखो
36إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا يُنفِقُونَ أَمْوَالَهُمْ لِيَصُدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۚ فَسَيُنفِقُونَهَا ثُمَّ تَكُونُ عَلَيْهِمْ حَسْرَةً ثُمَّ يُغْلَبُونَ ۗ وَالَّذِينَ كَفَرُوا إِلَىٰ جَهَنَّمَ يُحْشَرُونَ
इसमें शक़ नहीं कि ये कुफ्फार अपने माल महज़ इस वास्ते खर्च करेगें फिर उसके बाद उनकी हसरत का बाइस होगा फिर आख़िर ये लोग हार जाएँगें और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तियार किया (क़यामत में) सब के सब जहन्नुम की तरफ हाके जाएँगें
37لِيَمِيزَ اللَّهُ الْخَبِيثَ مِنَ الطَّيِّبِ وَيَجْعَلَ الْخَبِيثَ بَعْضَهُ عَلَىٰ بَعْضٍ فَيَرْكُمَهُ جَمِيعًا فَيَجْعَلَهُ فِي جَهَنَّمَ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
ताकि ख़ुदा पाक को नापाक से जुदा कर दे और नापाक लोगों को एक दूसरे पर रखके ढेर बनाए फिर सब को जहन्नुम में झोंक दे यही लोग घाटा उठाने वाले हैं
38قُل لِّلَّذِينَ كَفَرُوا إِن يَنتَهُوا يُغْفَرْ لَهُم مَّا قَدْ سَلَفَ وَإِن يَعُودُوا فَقَدْ مَضَتْ سُنَّتُ الْأَوَّلِينَ
(ऐ रसूल) तुम काफिरों से कह दो कि अगर वह लोग (अब भी अपनी शरारत से) बाज़ रहें तो उनके पिछले कुसूर माफ कर दिए जाएं और अगर फिर कहीं पलटें तो यक़ीनन अगलों के तरीक़े गुज़र चुके जो, उनकी सज़ा हुई वही इनकी भी होगी
39وَقَاتِلُوهُمْ حَتَّىٰ لَا تَكُونَ فِتْنَةٌ وَيَكُونَ الدِّينُ كُلُّهُ لِلَّهِ ۚ فَإِنِ انتَهَوْا فَإِنَّ اللَّهَ بِمَا يَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
मुसलमानों काफ़िरों से लड़े जाओ यहाँ तक कि कोई फसाद (बाक़ी) न रहे और (बिल्कुल सारी ख़ुदाई में) ख़ुदा की दीन ही दीन हो जाए फिर अगर ये लोग (फ़साद से) न बाज़ आएं तो ख़ुदा उनकी कारवाइयों को ख़ूब देखता है
अल-अनफालकुरान सूची
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अनुवाद — अल-अनफाल 37

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Tuesday, August 18, 2026

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