Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِيَمِيزَ: अलग करने के लिए, स्पष्ट करने के लिए।
- الْخَبِيثَ: नापाक, बुरा, अशुद्ध (यहाँ अर्थ: काफिर और उसका धन)।
- الطَّيِّبَ: पाक, अच्छा, शुद्ध (यहाँ अर्थ: मोमिन और उसका धन)।
- فَيَرْكُمَهُ: उसे एक दूसरे के ऊपर जमा कर दे, तह बा तह कर दे।
- الْخَاسِرُونَ: घाटे में रहने वाले, नुकसान उठाने वाले।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन काफिरों के अंजाम को बयान कर रही है जिन्होंने अपने माल को इसलिए खर्च किया ताकि लोगों को अल्लाह के रास्ते से रोकें और ईमान लाने से बाज़ रखें। अल्लाह तआला ने उनके इस खर्च को बेकार और नापाक क़रार दिया और फरमाया कि यह सब कुछ इसलिए है ताकि अल्लाह नापाक (ख़बीस) को पाक (तैय्यिब) से अलग कर दे। यानी काफिरों को मोमिनों से, और उनके नापाक अमल और नापाक माल को पाक अमल और पाक माल से जुदा कर दे।
फिर अल्लाह फरमाता है कि वह इस नापाक (ख़बीस) को — चाहे वह लोग हों, उनके अमल हों या उनके माल — एक दूसरे के ऊपर जमा करेगा, यानी उन्हें ढेर बना देगा, तह बा तह कर देगा, और फिर उस पूरे ढेर को जहन्नम की आग में झोंक देगा। यानी उनका सारा खर्च किया हुआ माल, उनकी सारी कोशिशें और वे खुद — सब कुछ जहन्नम में डाल दिया जाएगा। यही लोग असली घाटे में हैं, क्योंकि उन्होंने दुनिया में अपना माल और अपनी जान दोनों गंवाए, और आख़िरत में भी उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ बल्कि हमेशा के अज़ाब में डाल दिए गए। उन्होंने अपने आपको और अपने परिवारों को क़ियामत के दिन बड़े नुकसान में डाला।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह तआला का क़ानून है कि वह सच्चाई और झूठ, अच्छाई और बुराई को हमेशा अलग करता है। यह अलगाव क़ियामत के दिन पूरी तरह सामने आएगा, जब हर नेकी और बदी को उसके असल रूप में पेश किया जाएगा।
- जो माल और कोशिशें अल्लाह के रास्ते में रुकावट डालने के लिए खर्च की जाएं, वे न सिर्फ़ बेकार हैं बल्कि उनका अंजाम जहन्नम है। इससे हमें सीख मिलती है कि हमारा हर खर्च और हर अमल नेक नीयत और अल्लाह की रज़ा के लिए होना चाहिए।
- यह आयत मोमिनों के लिए खुशखबरी है कि उनका पाक माल और पाक अमल अल्लाह के यहाँ महफूज़ है, और काफिरों का नापाक माल और नापाक अमल उनके लिए अज़ाब का ज़रिया बनेगा। इसलिए हमें हमेशा हलाल कमाई और नेक अमल की तरफ ध्यान देना चाहिए।
- असली घाटा दुनिया का माल खोना नहीं है, बल्कि असली घाटा आख़िरत में अपने आपको और अपने अहल-ओ-अयाल को अल्लाह के अज़ाब से बचाने में नाकाम रहना है। यही वह नुकसान है जिसकी कोई तلافी नहीं।
📜 आयत 35-39 — सूरा अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 37
सूरा अल-अनफाल आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि ख़ुदा पाक को नापाक से जुदा कर दे और…सूरा आयत 37/75 — सूरा अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनफाल सुनें, सूरा अल-अनफाल अनुवाद, सूरा अल-अनफाल mp3, सूरा अल-अनफाल pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अनफाल
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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