अल-अनफाल · 36/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا يُنفِقُونَ أَمْوَالَهُمْ لِيَصُدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۚ فَسَيُنفِقُونَهَا ثُمَّ تَكُونُ عَلَيْهِمْ حَسْرَةً ثُمَّ يُغْلَبُونَ ۗ وَالَّذِينَ كَفَرُوا إِلَىٰ جَهَنَّمَ يُحْشَرُونَ ۝٣٦
Innal lazeena kafaroo yunfiqoona amwaalahum liyasuddoo `an sabeelil laah; fasayunfiqoonahaa summa takoonu `alaihim hasratan summa yughlaboon; wal lazeena kafarooo ilaa Jahannnama yuhsharoona
📖 हिंदी अर्थ
इसमें शक़ नहीं कि ये कुफ्फार अपने माल महज़ इस वास्ते खर्च करेगें फिर उसके बाद उनकी हसरत का बाइस होगा फिर आख़िर ये लोग हार जाएँगें और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तियार किया (क़यामत में) सब के सब जहन्नुम की तरफ हाके जाएँगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُنفِقُونَ أَمْوَالَهُمْ: अपने धन को खर्च करते हैं।
  • لِيَصُدُّوا عَن سَبِيلِ اللهِ: अल्लाह के मार्ग (इस्लाम) से रोकने के लिए।
  • حَسْرَةً: पछतावा, अफसोस और निराशा।
  • يُغْلَبُونَ: वे पराजित होंगे।
  • يُحْشَرُونَ: एकत्र किए जाएँगे।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन काफिरों के हाल का वर्णन करती है जो अल्लाह की एकता को नकारते हैं और उसके रसूल की अवज्ञा करते हैं। ये लोग अपने धन को इसलिए खर्च करते हैं ताकि लोगों को अल्लाह के मार्ग (इस्लाम) से रोक सकें और मोमिनों को ईमान लाने से बचा सकें। वे सोचते हैं कि अपने धन के बल पर वे सत्य के प्रसार को रोक देंगे और अल्लाह के दीन को बुझा देंगे।

लेकिन अल्लाह ने स्पष्ट कर दिया कि उनका यह प्रयास पूरी तरह नाकाम होगा। वे अपना धन खर्च करेंगे, लेकिन उनका उद्देश्य पूरा नहीं होगा। फिर यही खर्च उनके लिए पछतावे और अफसोस का कारण बनेगा, क्योंकि एक तो उनका धन बर्बाद हो जाएगा, और दूसरे उन्हें अपने मंसूबे में कामयाबी भी नहीं मिलेगी। इसके बाद वे पराजित होंगे—दुनिया में मोमिनों के हाथों हारेंगे, और आख़िरत में उन्हें जहन्नम की ओर हाँक कर ले जाया जाएगा, जहाँ उन्हें हमेशा के लिए यातना दी जाएगी।

यह आयत उस ऐतिहासिक घटना की ओर भी इशारा करती है जब काफिरों ने बद्र के युद्ध में मुसलमानों के खिलाफ भारी धन खर्च किया था, लेकिन अल्लाह ने उन्हें बुरी तरह पराजित किया और उनका धन उनके किसी काम न आया।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह के मार्ग में खर्च किया गया धन कभी बेकार नहीं जाता, जबकि सत्य को रोकने के लिए खर्च किया गया धन अंततः बर्बादी और पछतावे का कारण बनता है।
  2. यह आयत मोमिनों के लिए साहस और आश्वासन का स्रोत है कि दुश्मन चाहे कितना भी धन और ताकत खर्च कर लें, अल्लाह की मदद से सत्य की ही जीत होगी।
  3. धन का सही उपयोग वही है जो अल्लाह की राह में हो; गलत रास्ते पर खर्च किया गया धन इंसान के लिए अफसोस और यातना का कारण बनता है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि काफिरों की चालें और साजिशें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अल्लाह की योजना उनसे कहीं बेहतर है और अंतिम सफलता मोमिनों के लिए ही है।
  5. आख़िरत में हर इंसान को अपने कर्मों का हिसाब देना होगा, और जो लोग अल्लाह के मार्ग से रोकने की कोशिश करते हैं, उनका ठिकाना जहन्नम है।


📜 आयत 34-38 — अल-अनफाल

34وَمَا لَهُمْ أَلَّا يُعَذِّبَهُمُ اللَّهُ وَهُمْ يَصُدُّونَ عَنِ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ وَمَا كَانُوا أَوْلِيَاءَهُ ۚ إِنْ أَوْلِيَاؤُهُ إِلَّا الْمُتَّقُونَ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
और जब ये लोग लोगों को मस्जिदुल हराम (ख़ान ए काबा की इबादत) से रोकते है तो फिर उनके लिए कौन सी बात बाक़ी है कि उन पर अज़ाब न नाज़िल करे और ये लोग तो ख़ानाए काबा के मुतवल्ली भी नहीं (फिर क्यों रोकते है) इसके मुतवल्ली तो सिर्फ परहेज़गार लोग हैं मगर इन काफ़िरों में से बहुतेरे नहीं जानते
35وَمَا كَانَ صَلَاتُهُمْ عِندَ الْبَيْتِ إِلَّا مُكَاءً وَتَصْدِيَةً ۚ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ
और ख़ानाए काबे के पास सीटियॉ तालिया बजाने के सिवा उनकी नमाज ही क्या थी तो (ऐ काफिरों) जब तुम कुफ्र किया करते थे उसकी सज़ा में (पड़े) अज़ाब के मज़े चखो
36إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا يُنفِقُونَ أَمْوَالَهُمْ لِيَصُدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۚ فَسَيُنفِقُونَهَا ثُمَّ تَكُونُ عَلَيْهِمْ حَسْرَةً ثُمَّ يُغْلَبُونَ ۗ وَالَّذِينَ كَفَرُوا إِلَىٰ جَهَنَّمَ يُحْشَرُونَ
इसमें शक़ नहीं कि ये कुफ्फार अपने माल महज़ इस वास्ते खर्च करेगें फिर उसके बाद उनकी हसरत का बाइस होगा फिर आख़िर ये लोग हार जाएँगें और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तियार किया (क़यामत में) सब के सब जहन्नुम की तरफ हाके जाएँगें
37لِيَمِيزَ اللَّهُ الْخَبِيثَ مِنَ الطَّيِّبِ وَيَجْعَلَ الْخَبِيثَ بَعْضَهُ عَلَىٰ بَعْضٍ فَيَرْكُمَهُ جَمِيعًا فَيَجْعَلَهُ فِي جَهَنَّمَ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
ताकि ख़ुदा पाक को नापाक से जुदा कर दे और नापाक लोगों को एक दूसरे पर रखके ढेर बनाए फिर सब को जहन्नुम में झोंक दे यही लोग घाटा उठाने वाले हैं
38قُل لِّلَّذِينَ كَفَرُوا إِن يَنتَهُوا يُغْفَرْ لَهُم مَّا قَدْ سَلَفَ وَإِن يَعُودُوا فَقَدْ مَضَتْ سُنَّتُ الْأَوَّلِينَ
(ऐ रसूल) तुम काफिरों से कह दो कि अगर वह लोग (अब भी अपनी शरारत से) बाज़ रहें तो उनके पिछले कुसूर माफ कर दिए जाएं और अगर फिर कहीं पलटें तो यक़ीनन अगलों के तरीक़े गुज़र चुके जो, उनकी सज़ा हुई वही इनकी भी होगी
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अनुवाद — अल-अनफाल 36

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Tuesday, August 18, 2026

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