अल-अनफाल · 38/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
قُل لِّلَّذِينَ كَفَرُوا إِن يَنتَهُوا يُغْفَرْ لَهُم مَّا قَدْ سَلَفَ وَإِن يَعُودُوا فَقَدْ مَضَتْ سُنَّتُ الْأَوَّلِينَ ۝٣٨
Qul lillazeena kafarooo iny yantahoo yughfar lahum maa qad salafa wa iny ya`oodoo faqad madat sunnatul awwaleen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम काफिरों से कह दो कि अगर वह लोग (अब भी अपनी शरारत से) बाज़ रहें तो उनके पिछले कुसूर माफ कर दिए जाएं और अगर फिर कहीं पलटें तो यक़ीनन अगलों के तरीक़े गुज़र चुके जो, उनकी सज़ा हुई वही इनकी भी होगी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَنتَهُوا: रुक जाएँ, बाज़ आ जाएँ (अपने कुफ़्र और शत्रुता से)।
  • مَا قَدْ سَلَفَ: जो पहले हो चुका है (पिछले गुनाह)।
  • يَعُودُوا: वापस लौटें (कुफ़्र और ज़ुल्म की तरफ़)।
  • سُنَّتُ الْأَوَّلِينَ: पहले लोगों के साथ अल्लाह की चली आ रही रीति (यानी अज़ाब का नाज़िल होना)।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप उन लोगों से कह दीजिए जिन्होंने अल्लाह की वहदानियत को झुटलाया और आपकी दुश्मनी पर तुले हुए हैं—अगर ये लोग अपने कुफ़्र, अपनी दुश्मनी और रास्ते से रोकने के काम से बाज़ आ जाएँ और ईमान ले आएँ, तो अल्लाह उनके सारे पिछले गुनाह माफ़ कर देगा, क्योंकि इस्लाम पिछले सारे गुनाहों को मिटा देता है। लेकिन अगर ये लोग अपनी उसी हरकत पर लौट गए—यानी कुफ़्र और जंग की राह दोबारा अपना ली—तो उन्हें याद रखना चाहिए कि अल्लाह की सुन्नत (रीति) पहले के लोगों के साथ यही रही है कि जब वे हद से गुज़र जाते थे और झुटलाने पर अड़े रहते थे, तो अल्लाह उन्हें अज़ाब में पकड़ लेता था। बद्र की जंग में जो कुछ हुआ, वह इसी सुन्नत का एक नमूना है। अब अगर ये फिर वही रास्ता अपनाएँगे, तो अल्लाह का अज़ाब फिर से उनके लिए तैयार है।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह की रहमत बेहद वसी' है—गुनाह चाहे कितने भी बड़े हों, सच्चे दिल से तौबा और इस्लाम लाने पर सब माफ़ कर दिए जाते हैं। यह अल्लाह का बड़ा एहसान है कि उसने बंदों के लिए माफ़ी का दरवाज़ा खुला रखा है।
  2. इस्लाम की ताक़त यह है कि वह इंसान के अतीत को साफ़ कर देता है—जो भी इस्लाम में दाखिल होता है, वह गुनाहों से उसी तरह पाक हो जाता है जैसे उस दिन अपनी माँ के पेट से पैदा हुआ था।
  3. अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) कभी नहीं बदलती—जो लोग हक़ के बाद भी ज़िद और सरकशी पर अड़े रहते हैं, उनका अंजाम तबाही ही होता है। यह इतिहास का सबक़ है और आज भी उतना ही सच है।
  4. यह आयत दुश्मनों के लिए भी रहमत का दरवाज़ा खोलती है—मुसलमानों का तरीक़ा बदला लेना नहीं, बल्कि सुधार और माफ़ी की दावत देना है। यही इस्लाम की खूबसूरती है।


📜 आयत 36-40 — सूरा अल-अनफाल

36إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا يُنفِقُونَ أَمْوَالَهُمْ لِيَصُدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۚ فَسَيُنفِقُونَهَا ثُمَّ تَكُونُ عَلَيْهِمْ حَسْرَةً ثُمَّ يُغْلَبُونَ ۗ وَالَّذِينَ كَفَرُوا إِلَىٰ جَهَنَّمَ يُحْشَرُونَ
इसमें शक़ नहीं कि ये कुफ्फार अपने माल महज़ इस वास्ते खर्च करेगें फिर उसके बाद उनकी हसरत का बाइस होगा फिर आख़िर ये लोग हार जाएँगें और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तियार किया (क़यामत में) सब के सब जहन्नुम की तरफ हाके जाएँगें
37لِيَمِيزَ اللَّهُ الْخَبِيثَ مِنَ الطَّيِّبِ وَيَجْعَلَ الْخَبِيثَ بَعْضَهُ عَلَىٰ بَعْضٍ فَيَرْكُمَهُ جَمِيعًا فَيَجْعَلَهُ فِي جَهَنَّمَ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
ताकि ख़ुदा पाक को नापाक से जुदा कर दे और नापाक लोगों को एक दूसरे पर रखके ढेर बनाए फिर सब को जहन्नुम में झोंक दे यही लोग घाटा उठाने वाले हैं
38قُل لِّلَّذِينَ كَفَرُوا إِن يَنتَهُوا يُغْفَرْ لَهُم مَّا قَدْ سَلَفَ وَإِن يَعُودُوا فَقَدْ مَضَتْ سُنَّتُ الْأَوَّلِينَ
(ऐ रसूल) तुम काफिरों से कह दो कि अगर वह लोग (अब भी अपनी शरारत से) बाज़ रहें तो उनके पिछले कुसूर माफ कर दिए जाएं और अगर फिर कहीं पलटें तो यक़ीनन अगलों के तरीक़े गुज़र चुके जो, उनकी सज़ा हुई वही इनकी भी होगी
39وَقَاتِلُوهُمْ حَتَّىٰ لَا تَكُونَ فِتْنَةٌ وَيَكُونَ الدِّينُ كُلُّهُ لِلَّهِ ۚ فَإِنِ انتَهَوْا فَإِنَّ اللَّهَ بِمَا يَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
मुसलमानों काफ़िरों से लड़े जाओ यहाँ तक कि कोई फसाद (बाक़ी) न रहे और (बिल्कुल सारी ख़ुदाई में) ख़ुदा की दीन ही दीन हो जाए फिर अगर ये लोग (फ़साद से) न बाज़ आएं तो ख़ुदा उनकी कारवाइयों को ख़ूब देखता है
40وَإِن تَوَلَّوْا فَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ مَوْلَاكُمْ ۚ نِعْمَ الْمَوْلَىٰ وَنِعْمَ النَّصِيرُ
और अगर सरताबी करें तो (मुसलमानों) समझ लो कि ख़ुदा यक़ीनी तुम्हारा मालिक है और वह क्या अच्छा मालिक है और क्या अच्छा मददगार है
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
38आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 38

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Thursday, October 1, 2026

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