Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَأَعِدُّوا: तैयार करो
- مَا اسْتَطَعْتُم: जितना तुम सामर्थ्य रखते हो
- قُوَّةٍ: ताकत, शक्ति (सैन्य सामग्री, हथियार)
- رِبَاطِ الْخَيْلِ: घोड़ों को बाँधकर रखना (जिहाद के लिए घोड़े तैयार रखना)
- تُرْهِبُونَ: तुम डर पैदा करो
- آخَرِينَ مِن دُونِهِمْ: उनके अलावा दूसरे लोग
- يُوَفَّ إِلَيْكُمْ: तुम्हें पूरा-पूरा दिया जाएगा
- لَا تُظْلَمُونَ: तुम पर कोई ज़ुल्म नहीं किया जाएगा
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में मुसलमानों को दुश्मनों से मुकाबले की तैयारी का हुक्म दे रहा है। फ़रमाता है कि ऐ ईमानवालों! अपने दुश्मनों के मुकाबले के लिए अपनी पूरी ताकत से तैयारी करो — चाहे वह हथियार हो, सैन्य सामग्री हो, या जंग के घोड़े हों जिन्हें तुम हर वक़्त जिहाद के लिए तैयार रखो। इस तैयारी का मक़सद सिर्फ़ जंग लड़ना नहीं है, बल्कि दुश्मन के दिलों में रोब और खौफ़ पैदा करना है, ताकि वह तुम पर हमला करने की जुर्रत न कर सके। इससे अल्लाह के दुश्मन (काफ़िरों) और तुम्हारे दुश्मन (मक्का के कुफ़्फ़ार) दोनों डरेंगे। इसके अलावा कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्हें तुम नहीं जानते — चाहे वह मुनाफ़िक़ हों, यहूदी हों या फ़ारस के लोग — लेकिन अल्लाह उन्हें अच्छी तरह जानता है और उनके दिलों की बात से वाक़िफ़ है। यह तैयारी उनके लिए भी खौफ़ का ज़रिया बनेगी।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि जो कुछ भी तुम अल्लाह की राह में ख़र्च करोगे — चाहे वह कम हो या ज़्यादा — अल्लाह उसका पूरा बदला तुम्हें देगा। दुनिया में वह उसकी जगह और रिज़्क़ देगा, और आख़िरत में उसका पूरा अज्र बिना किसी कमी के तुम्हें मिलेगा। तुम्हारे साथ कोई ज़ुल्म नहीं होगा, न तुम्हारा अज्र घटाया जाएगा और न ही तुम्हारे अमल ज़ाया किए जाएँगे।
फ़ायदे:
- यह आयत मुसलमानों को ताकत और तैयारी का हुक्म देती है, ताकि वह कमज़ोर न हों और दुश्मन उनसे न डर सके। इस्लाम कमज़ोरी और बेबसी का नाम नहीं, बल्कि ताकत और हिम्मत का धर्म है।
- इस्लाम में सिर्फ़ जंग लड़ना ही नहीं, बल्कि दुश्मन को रोकने के लिए तैयार रहना भी इबादत है। यह अमन और सुरक्षा का ज़रिया है।
- अल्लाह की राह में ख़र्च करने का वादा है कि वह उसका बदला दुनिया और आख़िरत दोनों में देगा। यह मुसलमानों को सख़ावत (दानशीलता) और फ़िल्लाह की राह में ख़र्च करने की तरग़ीब देता है।
- अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है — वह उन दुश्मनों को भी जानता है जिन्हें हम नहीं जानते। यह हमें यक़ीन दिलाता है कि अल्लाह हमारी हिफ़ाज़त करता है और हमारे दुश्मनों से बेहतर वाक़िफ़ है।
- यह आयत मुसलमानों को यह सिखाती है कि दुनिया में इज़्ज़त और सुरक्षा तैयारी और मेहनत से मिलती है, और अल्लाह पर भरोसा करते हुए हमें अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभानी चाहिए।
📜 आयत 58-62 — सूरा अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 60
सूरा अल-अनफाल आयत 60 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (मुसलमानों तुम कुफ्फार के मुकाबले के) वास्ते जहाँ तक…सूरा आयत 60/75 — सूरा अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनफाल सुनें, सूरा अल-अनफाल अनुवाद, सूरा अल-अनफाल mp3, सूरा अल-अनफाल pdf. आयत 58–62. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अनफाल
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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