अल-अनफाल · 61/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
۞ وَإِن جَنَحُوا لِلسَّلْمِ فَاجْنَحْ لَهَا وَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ ۝٦١
Wa in janahoo lissalmi fajnah lahaa wa tawakkal `alal laah; innahoo Huwas Samee`ul `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
और अगर ये कुफ्फार सुलह की तरफ माएल हो तो तुम भी उसकी तरफ माएल हो और ख़ुदा पर भरोसा रखो (क्योंकि) वह बेशक (सब कुछ) सुनता जानता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • جَنَحُوا: झुके, रुझान किया, इच्छा की।
  • لِلسَّلْمِ: शांति, संधि (सुलह) की ओर।
  • فَاجْنَحْ لَهَا: तो आप भी उसकी ओर झुकें, उसे स्वीकार करें।
  • تَوَكَّلْ عَلَى اللهِ: अल्लाह पर भरोसा रखें, अपना मामला उसे सौंप दें।
  • السَّمِيعُ: सब कुछ सुनने वाला।
  • العَلِيمُ: सब कुछ जानने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत मुसलमानों को युद्ध और शांति के मामले में एक स्पष्ट और संतुलित नीति सिखाती है। जब शत्रु पक्ष युद्ध से हटकर शांति और संधि की ओर झुके, और वे सच्चे दिल से सुलह का इरादा रखें, तो आप (ऐ नबी!) भी उनकी इस पेशकश को स्वीकार करें और उनसे संधि कर लें। यह न तो कमज़ोरी है और न ही डर का सबूत, बल्कि इस्लाम की मौलिक शिक्षा है कि शांति को प्राथमिकता दी जाए, जब तक कि दूसरा पक्ष धोखा न दे।

इस आदेश के साथ ही अल्लाह ने अपने नबी को निर्देश दिया कि वे इस मामले में पूरी तरह अल्लाह पर भरोसा रखें, क्योंकि संधि करने में कभी-कभी डर होता है कि दुश्मन धोखा दे सकता है। इसलिए अल्लाह ने यह आश्वासन दिया कि वह सब कुछ सुनने वाला और जानने वाला है। वह दुश्मनों की बातों को सुनता है और उनके दिलों के भेदों को जानता है। यदि वे संधि में धोखा देंगे, तो अल्लाह अपने नबी की रक्षा करेगा और उनके मक्कारी का सामना करने की ताकत देगा। अतः नबी को चाहिए कि वह अल्लाह पर भरोसा रखते हुए शांति का रास्ता अपनाए, क्योंकि अल्लाह ही सबसे अच्छा संरक्षक और सहायक है।


फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. इस्लाम शांति का धर्म है: यह आयत सिखाती है कि इस्लाम में युद्ध अपने आप में लक्ष्य नहीं है, बल्कि मजबूरी है। जैसे ही शांति का रास्ता खुलता है, उसे अपनाना चाहिए। यह दुनिया को दिखाता है कि मुसलमान हमेशा अमन और सुलह के पक्षधर हैं।
  2. अल्लाह पर भरोसा (तवक्कुल) की अहमियत: इंसान को अपनी तरफ से पूरी कोशिश करनी चाहिए, लेकिन अंतिम भरोसा अल्लाह पर ही रखना चाहिए। यह दिल को सुकून देता है और हर मुश्किल में राह दिखाता है।
  3. अल्लाह की निगरानी का एहसास: यह जानना कि अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है, इंसान को नेक नीयत से काम करने की ताकत देता है। दुश्मन की चालें चाहे कितनी भी छिपी हों, अल्लाह से कुछ छिपा नहीं है।
  4. धोखे से सुरक्षा: यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि संधि करते समय भी अल्लाह पर भरोसा रखें, क्योंकि वही धोखे से बचाने वाला है। इससे मुसलमानों का हौसला बुलंद रहता है और वे किसी के डर से समझौता नहीं करते, बल्कि अल्लाह की रज़ा के लिए शांति अपनाते हैं।


📜 आयत 59-63 — सूरा अल-अनफाल

59وَلَا يَحْسَبَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا سَبَقُوا ۚ إِنَّهُمْ لَا يُعْجِزُونَ
और कुफ्फ़ार ये न ख्याल करें कि वह (मुसलमानों से) आगे बढ़ निकले (क्योंकि) वह हरगिज़ (मुसलमानों को) हरा नहीं सकते
60وَأَعِدُّوا لَهُم مَّا اسْتَطَعْتُم مِّن قُوَّةٍ وَمِن رِّبَاطِ الْخَيْلِ تُرْهِبُونَ بِهِ عَدُوَّ اللَّهِ وَعَدُوَّكُمْ وَآخَرِينَ مِن دُونِهِمْ لَا تَعْلَمُونَهُمُ اللَّهُ يَعْلَمُهُمْ ۚ وَمَا تُنفِقُوا مِن شَيْءٍ فِي سَبِيلِ اللَّهِ يُوَفَّ إِلَيْكُمْ وَأَنتُمْ لَا تُظْلَمُونَ
और (मुसलमानों तुम कुफ्फार के मुकाबले के) वास्ते जहाँ तक तुमसे हो सके (अपने बाज़ू के) ज़ोर से और बॅधे हुए घोड़े से लड़ाई का सामान मुहय्या करो इससे ख़ुदा के दुश्मन और अपने दुश्मन और उसके सिवा दूसरे लोगों पर भी अपनी धाक बढ़ा लेगें जिन्हें तुम नहीं जानते हो मगर ख़ुदा तो उनको जानता है और ख़ुदा की राह में तुम जो कुछ भी ख़र्च करोगें वह तुम पूरा पूरा भर पाओगें और तुम पर किसी तरह ज़ुल्म नहीं किया जाएगा
61۞ وَإِن جَنَحُوا لِلسَّلْمِ فَاجْنَحْ لَهَا وَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
और अगर ये कुफ्फार सुलह की तरफ माएल हो तो तुम भी उसकी तरफ माएल हो और ख़ुदा पर भरोसा रखो (क्योंकि) वह बेशक (सब कुछ) सुनता जानता है
62وَإِن يُرِيدُوا أَن يَخْدَعُوكَ فَإِنَّ حَسْبَكَ اللَّهُ ۚ هُوَ الَّذِي أَيَّدَكَ بِنَصْرِهِ وَبِالْمُؤْمِنِينَ
और अगर वह लोग तुम्हें फरेब देना चाहे तो (कुछ परवा नहीं) ख़ुदा तुम्हारे वास्ते यक़ीनी काफी है-(ऐ रसूल) वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने अपनी ख़ास मदद और मोमिनीन से तुम्हारी ताईद की
63وَأَلَّفَ بَيْنَ قُلُوبِهِمْ ۚ لَوْ أَنفَقْتَ مَا فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا مَّا أَلَّفْتَ بَيْنَ قُلُوبِهِمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ أَلَّفَ بَيْنَهُمْ ۚ إِنَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
और उसी ने उन मुसलमानों के दिलों में बाहम ऐसी उलफ़त पैदा कर दी कि अगर तुम जो कुछ ज़मीन में है सब का सब खर्च कर डालते तो भी उनके दिलो में ऐसी उलफ़त पैदा न कर सकते मगर ख़ुदा ही था जिसने बाहम उलफत पैदा की बेशक वह ज़बरदस्त हिक़मत वाला है
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
61आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 61

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Thursday, October 1, 2026

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