Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- جَنَحُوا: झुके, रुझान किया, इच्छा की।
- لِلسَّلْمِ: शांति, संधि (सुलह) की ओर।
- فَاجْنَحْ لَهَا: तो आप भी उसकी ओर झुकें, उसे स्वीकार करें।
- تَوَكَّلْ عَلَى اللهِ: अल्लाह पर भरोसा रखें, अपना मामला उसे सौंप दें।
- السَّمِيعُ: सब कुछ सुनने वाला।
- العَلِيمُ: सब कुछ जानने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत मुसलमानों को युद्ध और शांति के मामले में एक स्पष्ट और संतुलित नीति सिखाती है। जब शत्रु पक्ष युद्ध से हटकर शांति और संधि की ओर झुके, और वे सच्चे दिल से सुलह का इरादा रखें, तो आप (ऐ नबी!) भी उनकी इस पेशकश को स्वीकार करें और उनसे संधि कर लें। यह न तो कमज़ोरी है और न ही डर का सबूत, बल्कि इस्लाम की मौलिक शिक्षा है कि शांति को प्राथमिकता दी जाए, जब तक कि दूसरा पक्ष धोखा न दे।
इस आदेश के साथ ही अल्लाह ने अपने नबी को निर्देश दिया कि वे इस मामले में पूरी तरह अल्लाह पर भरोसा रखें, क्योंकि संधि करने में कभी-कभी डर होता है कि दुश्मन धोखा दे सकता है। इसलिए अल्लाह ने यह आश्वासन दिया कि वह सब कुछ सुनने वाला और जानने वाला है। वह दुश्मनों की बातों को सुनता है और उनके दिलों के भेदों को जानता है। यदि वे संधि में धोखा देंगे, तो अल्लाह अपने नबी की रक्षा करेगा और उनके मक्कारी का सामना करने की ताकत देगा। अतः नबी को चाहिए कि वह अल्लाह पर भरोसा रखते हुए शांति का रास्ता अपनाए, क्योंकि अल्लाह ही सबसे अच्छा संरक्षक और सहायक है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- इस्लाम शांति का धर्म है: यह आयत सिखाती है कि इस्लाम में युद्ध अपने आप में लक्ष्य नहीं है, बल्कि मजबूरी है। जैसे ही शांति का रास्ता खुलता है, उसे अपनाना चाहिए। यह दुनिया को दिखाता है कि मुसलमान हमेशा अमन और सुलह के पक्षधर हैं।
- अल्लाह पर भरोसा (तवक्कुल) की अहमियत: इंसान को अपनी तरफ से पूरी कोशिश करनी चाहिए, लेकिन अंतिम भरोसा अल्लाह पर ही रखना चाहिए। यह दिल को सुकून देता है और हर मुश्किल में राह दिखाता है।
- अल्लाह की निगरानी का एहसास: यह जानना कि अल्लाह सब कुछ सुनता और जानता है, इंसान को नेक नीयत से काम करने की ताकत देता है। दुश्मन की चालें चाहे कितनी भी छिपी हों, अल्लाह से कुछ छिपा नहीं है।
- धोखे से सुरक्षा: यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि संधि करते समय भी अल्लाह पर भरोसा रखें, क्योंकि वही धोखे से बचाने वाला है। इससे मुसलमानों का हौसला बुलंद रहता है और वे किसी के डर से समझौता नहीं करते, बल्कि अल्लाह की रज़ा के लिए शांति अपनाते हैं।
📜 आयत 59-63 — सूरा अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 61
सूरा अल-अनफाल आयत 61 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर ये कुफ्फार सुलह की तरफ माएल हो तो…सूरा आयत 61/75 — सूरा अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनफाल सुनें, सूरा अल-अनफाल अनुवाद, सूरा अल-अनफाल mp3, सूरा अल-अनफाल pdf. आयत 59–63. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अनफाल
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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