अत-तौबा · 112/129
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तौबा
التَّائِبُونَ الْعَابِدُونَ الْحَامِدُونَ السَّائِحُونَ الرَّاكِعُونَ السَّاجِدُونَ الْآمِرُونَ بِالْمَعْرُوفِ وَالنَّاهُونَ عَنِ الْمُنكَرِ وَالْحَافِظُونَ لِحُدُودِ اللَّهِ ۗ وَبَشِّرِ الْمُؤْمِنِينَ ۝١١٢
At taaa`iboonal `aabidoonal haamidoonas saaa`ihoonar raaki`oonas saajidoonal aamiroona bilma`roofi wannaahoona `anil munkari walhaafizoona lihudoodil laah; wa bashshiril mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
(ये लोग) तौबा करने वाले इबादत गुज़ार (ख़ुदा की) हम्दो सना (तारीफ़) करने वाले (उस की राह में) सफर करने वाले रूकूउ करने वाले सजदा करने वाले नेक काम का हुक्म करने वाले और बुरे काम से रोकने वाले और ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुई) हदो को निगाह रखने वाले हैं और (ऐ रसूल) उन मोमिनीन को (बेहिश्त की) ख़ुशख़बरी दे दो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • السَّائِحُونَ: अधिकांश मुफ़स्सिरीन के अनुसार इसका अर्थ 'रोज़ेदार' (सियाम) है, क्योंकि रोज़ेदार अपनी वैध इच्छाओं और सुखों को छोड़ देता है, जैसे यात्री (साइह) अपने घर और आराम को छोड़ देता है।
  • الْحَافِظُونَ لِحُدُودِ اللَّهِ: अल्लाह की सीमाओं की रक्षा करने वाले, यानी उसके आदेशों का पालन करने वाले और उसकी मनाही से बचने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन ईमानवालों के गुणों का वर्णन करती है जिनके लिए स्वर्ग की शुभ सूचना है। ये वे लोग हैं जो अल्लाह की नापसंदीदा चीज़ों से तौबा करके उसकी पसंदीदा चीज़ों की ओर लौट आए हैं। वे केवल अल्लाह की इबादत करते हैं और उसकी आज्ञा का पालन करने में लगे रहते हैं। वे हर हाल में — चाहे सुख हो या दुख — अल्लाह की हम्द (प्रशंसा) करते हैं। वे रोज़ेदार हैं, नमाज़ में रुकू और सजदा करने वाले हैं। वे लोगों को अच्छे कामों का आदेश देते हैं और बुरे कामों से रोकते हैं। वे अल्लाह की सीमाओं की रक्षा करते हैं, यानी उसके हुक्मों का पालन करते हैं और उसकी मनाही से बचते हैं। अल्लाह अपने नबी ﷺ से कहता है कि इन ईमानवालों को उसकी रज़ा और जन्नत की खुशखबरी सुना दो।

फ़ायदे (सीख):

  1. तौबा (पश्चाताप) एक महान गुण है जो इंसान को अल्लाह के करीब लाता है और उसके गुनाहों को माफ करवाता है।
  2. अल्लाह की इबादत और हम्द हर हाल में करनी चाहिए, चाहे हालात अच्छे हों या बुरे।
  3. रोज़ा और नमाज़ जैसी इबादतें इंसान के ईमान को मज़बूत करती हैं और उसे अल्लाह की रज़ा के करीब लाती हैं।
  4. अच्छे कामों का आदेश देना और बुरे कामों से रोकना (अम्र बिल मारूफ़ व नही अनिल मुनकर) हर मुसलमान की ज़िम्मेदारी है।
  5. अल्लाह की सीमाओं की रक्षा करना, यानी उसके आदेशों का पालन करना और उसकी मनाही से बचना, सच्चे ईमान की निशानी है।
  6. इन गुणों से सुसज्जित लोगों के लिए अल्लाह की ओर से खुशखबरी है — उसकी रज़ा और जन्नत। यह हमें इन गुणों को अपनाने की प्रेरणा देती है।


📜 आयत 110-114 — सूरा अत-तौबा

110لَا يَزَالُ بُنْيَانُهُمُ الَّذِي بَنَوْا رِيبَةً فِي قُلُوبِهِمْ إِلَّا أَن تَقَطَّعَ قُلُوبُهُمْ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
(ये इमारत की) बुनियाद जो उन लोगों ने क़ायम की उसके सबब से उनके दिलो में हमेशा धरपकड़ रहेगी यहाँ तक कि उनके दिलों के परख़चे उड़ जाएँ और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हकीम हैं
111۞ إِنَّ اللَّهَ اشْتَرَىٰ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ أَنفُسَهُمْ وَأَمْوَالَهُم بِأَنَّ لَهُمُ الْجَنَّةَ ۚ يُقَاتِلُونَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَيَقْتُلُونَ وَيُقْتَلُونَ ۖ وَعْدًا عَلَيْهِ حَقًّا فِي التَّوْرَاةِ وَالْإِنجِيلِ وَالْقُرْآنِ ۚ وَمَنْ أَوْفَىٰ بِعَهْدِهِ مِنَ اللَّهِ ۚ فَاسْتَبْشِرُوا بِبَيْعِكُمُ الَّذِي بَايَعْتُم بِهِ ۚ وَذَٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
इसमें तो शक़ ही नहीं कि ख़ुदा ने मोमिनीन से उनकी जानें और उनके माल इस बात पर ख़रीद लिए हैं कि (उनकी क़ीमत) उनके लिए बेहश्त है (इसी वजह से) ये लोग ख़ुदा की राह में लड़ते हैं तो (कुफ्फ़ार को) मारते हैं और ख़ुद (भी) मारे जाते हैं (ये) पक्का वायदा है (जिसका पूरा करना) ख़ुदा पर लाज़िम है और ऐसा पक्का है कि तौरैत और इन्जील और क़ुरान (सब) में (लिखा हुआ है) और अपने एहद का पूरा करने वाला ख़ुदा से बढ़कर कौन है तुम तो अपनी ख़रीद फरोख्त से जो तुमने ख़ुदा से की है खुशियाँ मनाओ यही तो बड़ी कामयाबी है
112التَّائِبُونَ الْعَابِدُونَ الْحَامِدُونَ السَّائِحُونَ الرَّاكِعُونَ السَّاجِدُونَ الْآمِرُونَ بِالْمَعْرُوفِ وَالنَّاهُونَ عَنِ الْمُنكَرِ وَالْحَافِظُونَ لِحُدُودِ اللَّهِ ۗ وَبَشِّرِ الْمُؤْمِنِينَ
(ये लोग) तौबा करने वाले इबादत गुज़ार (ख़ुदा की) हम्दो सना (तारीफ़) करने वाले (उस की राह में) सफर करने वाले रूकूउ करने वाले सजदा करने वाले नेक काम का हुक्म करने वाले और बुरे काम से रोकने वाले और ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुई) हदो को निगाह रखने वाले हैं और (ऐ रसूल) उन मोमिनीन को (बेहिश्त की) ख़ुशख़बरी दे दो
113مَا كَانَ لِلنَّبِيِّ وَالَّذِينَ آمَنُوا أَن يَسْتَغْفِرُوا لِلْمُشْرِكِينَ وَلَوْ كَانُوا أُولِي قُرْبَىٰ مِن بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمْ أَنَّهُمْ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ
नबी और मोमिनीन पर जब ज़ाहिर हो चुका कि मुशरेकीन जहन्नुमी है तो उसके बाद मुनासिब नहीं कि उनके लिए मग़फिरत की दुआएं माँगें अगरचे वह मुशरेकीन उनके क़राबतदार हो (क्यों न) हो
114وَمَا كَانَ اسْتِغْفَارُ إِبْرَاهِيمَ لِأَبِيهِ إِلَّا عَن مَّوْعِدَةٍ وَعَدَهَا إِيَّاهُ فَلَمَّا تَبَيَّنَ لَهُ أَنَّهُ عَدُوٌّ لِّلَّهِ تَبَرَّأَ مِنْهُ ۚ إِنَّ إِبْرَاهِيمَ لَأَوَّاهٌ حَلِيمٌ
और इबराहीम का अपने बाप के लिए मग़फिरत की दुआ माँगना सिर्फ इस वायदे की वजह से था जो उन्होंने अपने बाप से कर लिया था फिर जब उनको मालूम हो गया कि वह यक़ीनी ख़ुदा का दुश्मन है तो उससे बेज़ार हो गए, बेशक इबराहीम यक़ीनन बड़े दर्दमन्द बुर्दबार (सहन करने वाले) थे
अत-तौबाकुरान सूची
129आयत
मदनीअवतरण स्थान
112आयत

अनुवाद — अत-तौबा 112

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Tuesday, September 29, 2026

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