Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नजस (نجس): गंदगी, अपवित्रता। यहाँ इसका अर्थ आध्यात्मिक और नैतिक अपवित्रता है, न कि शारीरिक।
- अल-मस्जिद अल-हराम: पवित्र मस्जिद (काबा), लेकिन इसका विस्तार पूरे हरम (मक्का के पवित्र क्षेत्र) पर है।
- आमिहिम हाज़ा (بعد عامهم هذا): उनके इस वर्ष के बाद, यानी हिजरी वर्ष 9।
- अयलाह (عيلة): गरीबी, आर्थिक तंगी, आजीविका का संकट।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे ईमानवालों! अल्लाह तआला स्पष्ट कर रहा है कि मुशरिक (जो अल्लाह के साथ किसी को साझीदार ठहराते हैं) अपनी कुफ्रियत, बुरे आचरण, और झूठी मान्यताओं के कारण नापाक हैं। यह नापाकी शारीरिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और नैतिक है, जो उनके दिलों और कर्मों में गहराई तक बसी हुई है। इसलिए उन्हें इस वर्ष (हिजरी 9) के बाद मस्जिद-ए-हराम और पूरे पवित्र हरम क्षेत्र में आने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, चाहे वे हज या उमरा के इरादे से ही क्यों न आएँ।
जब यह आदेश सुनाया गया, तो कुछ मुसलमानों को चिंता हुई कि मुशरिकों के आने-जाने और व्यापार के बंद होने से उनकी आजीविका प्रभावित होगी और वे गरीबी में डूब जाएँगे। अल्लाह ने उन्हें आश्वस्त किया कि यदि तुम इस बंदिश के कारण गरीबी से डरते हो, तो अल्लाह अपने असीम अनुग्रह से तुम्हें समृद्ध कर देगा। यह उसकी शक्ति में है, और वह जब चाहे, जिस तरह चाहे, रोज़ी के द्वार खोल देता है। वास्तव में ऐसा ही हुआ — मुसलमानों को वैकल्पिक साधन मिले, उनके क्षेत्र में बारिश हुई, और अल्लाह ने उन्हें अपनी कृपा से नवाज़ा। अल्लाह तुम्हारी हर स्थिति को जानता है और अपनी बुद्धि के अनुसार जो देना चाहता है, देता है, और जो रोकना चाहता है, रोकता है।
फ़ायदे (सबक):
- पवित्रता का महत्व: इस्लाम में आस्था और आचरण की पवित्रता को अत्यधिक महत्व दिया गया है। यह हमें सिखाता है कि सच्ची पवित्रता सिर्फ बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक विश्वास और नैतिकता से जुड़ी है।
- अल्लाह पर भरोसा: जब हम अल्लाह के आदेशों का पालन करते हैं, तो हमें उसकी रोज़ी पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह कभी अपने बंदों को उनके ईमान की वजह से बेसहारा नहीं छोड़ता।
- आर्थिक चिंताएँ और ईमान: यह आयत सिखाती है कि दुनियावी माल और आजीविका की चिंता हमें अल्लाह के आदेशों से नहीं रोकनी चाहिए। अल्लाह के पास हर चीज़ का खज़ाना है, और वह अपने बंदों की मदद करने पर कादिर है।
- इस्लाम की सामाजिक व्यवस्था: इस आयत से हमें यह समझ मिलती है कि इस्लाम में समाज की पवित्रता और एकता का विशेष ध्यान रखा गया है। यह हमें अपने समाज को नैतिक और आध्यात्मिक रूप से स्वच्छ बनाने की प्रेरणा देता है।
- अल्लाह की बुद्धि और ज्ञान: अल्लाह हर चीज़ को जानता है और उसका हर फैसला बुद्धि और हिकमत पर आधारित होता है। हमें उसके फैसलों पर संतुष्ट रहना चाहिए, भले ही हमें उनके पीछे की हिकमत समझ न आए।
📜 आयत 26-30 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 28
सूरा अत-तौबा आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों मुशरेकीन तो निरे नजिस हैं तो अब वह…सूरा आयत 28/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए

