अत-तौबा · 38/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا مَا لَكُمْ إِذَا قِيلَ لَكُمُ انفِرُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ اثَّاقَلْتُمْ إِلَى الْأَرْضِ ۚ أَرَضِيتُم بِالْحَيَاةِ الدُّنْيَا مِنَ الْآخِرَةِ ۚ فَمَا مَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا فِي الْآخِرَةِ إِلَّا قَلِيلٌ ۝٣٨
Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo maa lakum izaa qeela lakumun firoo fee sabeelil laahis saaqaltum ilal ard; aradeetum bilhayaatid dunyaa minal Aakhirah; famaa ma taaul hayaatiddunyaa fil Aakhirati illaa qaleel
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानदारों तुम्हें क्या हो गया है कि जब तुमसे कहा जाता है कि ख़ुदा की राह में (जिहाद के लिए) निकलो तो तुम लदधड़ (ढीले) हो कर ज़मीन की तरफ झुके पड़ते हो क्या तुम आख़िरत के बनिस्बत दुनिया की (चन्द रोज़ा) जिन्दगी को पसन्द करते थे तो (समझ लो कि) दुनिया की ज़िन्दगी का साज़ो सामान (आख़िर के) ऐश व आराम के मुक़ाबले में बहुत ही थोड़ा है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • انفِرُوا: निकलो, जिहाद के लिए तैयार होकर बाहर जाओ।
  • اثَّاقَلْتُمْ: भारी होकर पीछे रह गए, काहिली और आलस दिखाई, टालमटोल की।
  • إِلَى الْأَرْضِ: ज़मीन की तरफ झुक गए, यानी अपने घरों और ठिकानों में बैठना पसंद किया।
  • مَتَاعُ: अस्थायी सुख-सामग्री, थोड़ा सा लाभ।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालों! तुम्हें क्या हो गया है कि जब तुमसे कहा जाता है कि अल्लाह के रास्ते में (जिहाद के लिए) निकलो, तो तुम ज़मीन की तरफ झुक जाते हो, यानी अपने घरों, खेतों और दुनियावी कामों में लगे रहना पसंद करते हो और निकलने में भारीपन महसूस करते हो? क्या तुमने आख़िरत (आने वाले जीवन) के बदले दुनिया की इस फ़ानी (नाशवान) ज़िंदगी को पसंद कर लिया है? यह कितनी बड़ी भूल है! दुनिया का यह सारा सुख-सामान, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, आख़िरत के सामने बिल्कुल थोड़ा और तुच्छ है। आख़िरत की नेमतें हमेशा रहने वाली हैं, जबकि दुनिया का मज़ा कुछ दिनों के लिए है। जो अक्लमंद है वह इस थोड़े और फ़ानी (नाशवान) को उस चीज़ पर कभी तरजीह नहीं दे सकता जो बहुत बड़ी और हमेशा रहने वाली हो।

यह आयत उस मौके पर उतरी जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ताइफ से वापस आकर रोम (क़ैसर) से जंग के लिए निकलने का हुक्म दिया, और यह ग़ज़वा-ए-तबूक था। उस वक्त गर्मी का मौसम था, फल पक रहे थे, और सफर दूर का था, इसलिए कुछ लोगों ने काहिली दिखाई और पीछे रहना चाहा। अल्लाह ने उन्हें इस आयत के ज़रिए डांटा और समझाया कि दुनिया की चंद रोज़ा आरामत आख़िरत की हमेशा वाली नेमतों के मुकाबले कुछ भी नहीं।

फ़ायदे (सबक):

  1. जिहाद और अल्लाह के रास्ते में निकलना ईमान का तकाज़ा है; जब हुक्म हो तो बिना किसी बहाने के फौरन निकलना चाहिए।
  2. दुनिया की मोहब्बत और आराम-तलबी इंसान को बड़ी से बड़ी नेकी से रोक सकती है, इसलिए दिल को दुनिया की चीज़ों से बचाकर रखना चाहिए।
  3. आख़िरत की नेमतें दुनिया की सारी नेमतों से कहीं बेहतर और हमेशा रहने वाली हैं; अक्लमंद वही है जो इस फ़ानी (नाशवान) दुनिया को आख़िरत पर पसंद न करे।
  4. यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि जब अल्लाह और उसके रसूल की पुकार हो, तो अपने घर, माल और आराम को छोड़कर उसकी तरफ दौड़ना चाहिए, क्योंकि अल्लाह के पास जो कुछ है वह सबसे बेहतर और बाकी रहने वाला है।


📜 आयत 36-40 — अत-तौबा

36إِنَّ عِدَّةَ الشُّهُورِ عِندَ اللَّهِ اثْنَا عَشَرَ شَهْرًا فِي كِتَابِ اللَّهِ يَوْمَ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ مِنْهَا أَرْبَعَةٌ حُرُمٌ ۚ ذَٰلِكَ الدِّينُ الْقَيِّمُ ۚ فَلَا تَظْلِمُوا فِيهِنَّ أَنفُسَكُمْ ۚ وَقَاتِلُوا الْمُشْرِكِينَ كَافَّةً كَمَا يُقَاتِلُونَكُمْ كَافَّةً ۚ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ مَعَ الْمُتَّقِينَ
इसमें तो शक़ ही नहीं कि ख़ुदा ने जिस दिन आसमान व ज़मीन को पैदा किया (उसी दिन से) ख़ुदा के नज़दीक ख़ुदा की किताब (लौहे महफूज़) में महीनों की गिनती बारह महीने है उनमें से चार महीने (अदब व) हुरमत के हैं यही दीन सीधी राह है तो उन चार महीनों में तुम अपने ऊपर (कुश्त व ख़ून (मार काट) करके) ज़ुल्म न करो और मुशरेकीन जिस तरह तुम से सबके बस मिलकर लड़ते हैं तुम भी उसी तरह सबके सब मिलकर उन से लड़ों और ये जान लो कि ख़ुदा तो यक़ीनन परहेज़गारों के साथ है
37إِنَّمَا النَّسِيءُ زِيَادَةٌ فِي الْكُفْرِ ۖ يُضَلُّ بِهِ الَّذِينَ كَفَرُوا يُحِلُّونَهُ عَامًا وَيُحَرِّمُونَهُ عَامًا لِّيُوَاطِئُوا عِدَّةَ مَا حَرَّمَ اللَّهُ فَيُحِلُّوا مَا حَرَّمَ اللَّهُ ۚ زُيِّنَ لَهُمْ سُوءُ أَعْمَالِهِمْ ۗ وَاللَّهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْكَافِرِينَ
महीनों का आगे पीछे कर देना भी कुफ़्र ही की ज्यादती है कि उनकी बदौलत कुफ्फ़ार (और) बहक जाते हैं एक बरस तो उसी एक महीने को हलाल समझ लेते हैं और (दूसरे) साल उसी महीने को हराम कहते हैं ताकि ख़ुदा ने जो (चार महीने) हराम किए हैं उनकी गिनती ही पूरी कर लें और ख़ुदा की हराम की हुई चीज़ को हलाल कर लें उनकी बुरी (बुरी) कारस्तानियॉ उन्हें भली कर दिखाई गई हैं और खुदा काफिर लोगो को मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता
38يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا مَا لَكُمْ إِذَا قِيلَ لَكُمُ انفِرُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ اثَّاقَلْتُمْ إِلَى الْأَرْضِ ۚ أَرَضِيتُم بِالْحَيَاةِ الدُّنْيَا مِنَ الْآخِرَةِ ۚ فَمَا مَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا فِي الْآخِرَةِ إِلَّا قَلِيلٌ
ऐ ईमानदारों तुम्हें क्या हो गया है कि जब तुमसे कहा जाता है कि ख़ुदा की राह में (जिहाद के लिए) निकलो तो तुम लदधड़ (ढीले) हो कर ज़मीन की तरफ झुके पड़ते हो क्या तुम आख़िरत के बनिस्बत दुनिया की (चन्द रोज़ा) जिन्दगी को पसन्द करते थे तो (समझ लो कि) दुनिया की ज़िन्दगी का साज़ो सामान (आख़िर के) ऐश व आराम के मुक़ाबले में बहुत ही थोड़ा है
39إِلَّا تَنفِرُوا يُعَذِّبْكُمْ عَذَابًا أَلِيمًا وَيَسْتَبْدِلْ قَوْمًا غَيْرَكُمْ وَلَا تَضُرُّوهُ شَيْئًا ۗ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
अगर (अब भी) तुम न निकलोगे तो ख़ुदा तुम पर दर्दनाक अज़ाब नाज़िल फरमाएगा और (ख़ुदा कुछ मजबरू तो है नहीं) तुम्हारे बदले किसी दूसरी क़ौम को ले आएगा और तुम उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
40إِلَّا تَنصُرُوهُ فَقَدْ نَصَرَهُ اللَّهُ إِذْ أَخْرَجَهُ الَّذِينَ كَفَرُوا ثَانِيَ اثْنَيْنِ إِذْ هُمَا فِي الْغَارِ إِذْ يَقُولُ لِصَاحِبِهِ لَا تَحْزَنْ إِنَّ اللَّهَ مَعَنَا ۖ فَأَنزَلَ اللَّهُ سَكِينَتَهُ عَلَيْهِ وَأَيَّدَهُ بِجُنُودٍ لَّمْ تَرَوْهَا وَجَعَلَ كَلِمَةَ الَّذِينَ كَفَرُوا السُّفْلَىٰ ۗ وَكَلِمَةُ اللَّهِ هِيَ الْعُلْيَا ۗ وَاللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
अगर तुम उस रसूल की मदद न करोगे तो (कुछ परवाह् नहीं ख़ुदा मददगार है) उसने तो अपने रसूल की उस वक्त मदद की जब उसकी कुफ्फ़ार (मक्का) ने (घर से) निकल बाहर किया उस वक्त सिर्फ (दो आदमी थे) दूसरे रसूल थे जब वह दोनो ग़ार (सौर) में थे जब अपने साथी को (उसकी गिरिया व ज़ारी (रोने) पर) समझा रहे थे कि घबराओ नहीं ख़ुदा यक़ीनन हमारे साथ है तो ख़ुदा ने उन पर अपनी (तरफ से) तसकीन नाज़िल फरमाई और (फ़रिश्तों के) ऐसे लश्कर से उनकी मदद की जिनको तुम लोगों ने देखा तक नहीं और ख़ुदा ने काफिरों की बात नीची कर दिखाई और ख़ुदा ही का बोल बाला है और ख़ुदा तो ग़ालिब हिकमत वाला है
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अनुवाद — अत-तौबा 38

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Tuesday, August 18, 2026

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