Illaa tanfiroo yu`az zibkum `azaaban aleemanw wa yastabdil qawman ghairakum wa laa tadurroohu shai`aa; wal laahu `alaa kulli shai`in Qadeer
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
अगर (अब भी) तुम न निकलोगे तो ख़ुदा तुम पर दर्दनाक अज़ाब नाज़िल फरमाएगा और (ख़ुदा कुछ मजबरू तो है नहीं) तुम्हारे बदले किसी दूसरी क़ौम को ले आएगा और तुम उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
اور اگر تم نہ نکلو گے تو خدا تم کو بڑی تکلیف کا عذاب دے گا۔ اور تمہاری جگہ اور لوگ پیدا کر دے گا (جو خدا کے پورے فرمانبردار ہوں گے) اور تم اس کو کچھ نقصان نہ پہنچا سکو گے اور خدا ہر چیز پر قدرت رکھتا ہے
अगर (अब भी) तुम न निकलोगे तो ख़ुदा तुम पर दर्दनाक अज़ाब नाज़िल फरमाएगा और (ख़ुदा कुछ मजबरू तो है नहीं) तुम्हारे बदले किसी दूसरी क़ौम को ले आएगा और तुम उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
📜
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
تَنفِرُوا: निकलो, जिहाद के लिए तैयार होकर दुश्मन से युद्ध करने जाओ।
يَسْتَبْدِلْ: बदल देगा, तुम्हारी जगह दूसरे लोगों को ले आएगा।
تَضُرُّوهُ: तुम उसे नुकसान पहुँचाओगे (अल्लाह को या उसके रसूल को)।
قَدِيرٌ: हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे ईमानवालो! यदि तुम अल्लाह के रास्ते में जिहाद के लिए नहीं निकले, और अपने दुश्मनों से युद्ध करने से पीछे हटे, तो अल्लाह तुम्हें दर्दनाक अज़ाब में डाल देगा। यह अज़ाब दुनिया में भी हो सकता है (जैसे बारिश रुक जाना, अपमान और ज़िल्लत) और आख़िरत में भी। इसके अलावा, वह तुम्हारी जगह दूसरे लोगों को ले आएगा जो तुमसे बेहतर और अधिक आज्ञाकारी होंगे—जैसे यमन के लोग या फ़ारस के वंशज—जो जब बुलाए जाएँगे तो तुरंत निकल पड़ेंगे और अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करेंगे। तुम अपने पीछे हटने से अल्लाह का कुछ भी नुकसान नहीं कर सकते, क्योंकि वह तो सबसे बेनियाज़ (आत्मनिर्भर) है और तुम उसके मोहताज हो। असल में तुम अपनी ही आत्माओं को नुकसान पहुँचाते हो। अल्लाह हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है, वह अपने दीन और अपने नबी की मदद तुम्हारे बिना भी कर सकता है, और उसका वादा अवश्य पूरा होकर रहेगा।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
जिहाद और अल्लाह के रास्ते में निकलना ईमान का अहम हिस्सा है, और इसे छोड़ने पर अल्लाह की ओर से सख्त चेतावनी है।
अल्लाह को किसी की मदद की ज़रूरत नहीं; वह अपने दीन की मदद किसी से भी करा सकता है, इसलिए हमें अपनी सेवा को अल्लाह की रहमत समझनी चाहिए, न कि उस पर एहसान।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की आज्ञा का पालन करने में जल्दी करनी चाहिए, क्योंकि देरी करने पर नुकसान हमारा ही होता है।
अल्लाह की क़ुदरत (सामर्थ्य) पर भरोसा रखना चाहिए—वह हर मुश्किल को आसान कर सकता है और अपने वादे को पूरा करके रहता है।
यह आयत मुसलमानों को यह भी बताती है कि अगर वे अपनी ज़िम्मेदारियों से भागेंगे, तो अल्लाह उनकी जगह दूसरे लोगों को ले आएगा जो दीन की खिदमत करेंगे—यह एक बड़ी चेतावनी है कि हम अपनी अहमियत को न भूलें और दीन के कामों में आगे बढ़ें।
महीनों का आगे पीछे कर देना भी कुफ़्र ही की ज्यादती है कि उनकी बदौलत कुफ्फ़ार (और) बहक जाते हैं एक बरस तो उसी एक महीने को हलाल समझ लेते हैं और (दूसरे) साल उसी महीने को हराम कहते हैं ताकि ख़ुदा ने जो (चार महीने) हराम किए हैं उनकी गिनती ही पूरी कर लें और ख़ुदा की हराम की हुई चीज़ को हलाल कर लें उनकी बुरी (बुरी) कारस्तानियॉ उन्हें भली कर दिखाई गई हैं और खुदा काफिर लोगो को मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता
ऐ ईमानदारों तुम्हें क्या हो गया है कि जब तुमसे कहा जाता है कि ख़ुदा की राह में (जिहाद के लिए) निकलो तो तुम लदधड़ (ढीले) हो कर ज़मीन की तरफ झुके पड़ते हो क्या तुम आख़िरत के बनिस्बत दुनिया की (चन्द रोज़ा) जिन्दगी को पसन्द करते थे तो (समझ लो कि) दुनिया की ज़िन्दगी का साज़ो सामान (आख़िर के) ऐश व आराम के मुक़ाबले में बहुत ही थोड़ा है
अगर (अब भी) तुम न निकलोगे तो ख़ुदा तुम पर दर्दनाक अज़ाब नाज़िल फरमाएगा और (ख़ुदा कुछ मजबरू तो है नहीं) तुम्हारे बदले किसी दूसरी क़ौम को ले आएगा और तुम उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
अगर तुम उस रसूल की मदद न करोगे तो (कुछ परवाह् नहीं ख़ुदा मददगार है) उसने तो अपने रसूल की उस वक्त मदद की जब उसकी कुफ्फ़ार (मक्का) ने (घर से) निकल बाहर किया उस वक्त सिर्फ (दो आदमी थे) दूसरे रसूल थे जब वह दोनो ग़ार (सौर) में थे जब अपने साथी को (उसकी गिरिया व ज़ारी (रोने) पर) समझा रहे थे कि घबराओ नहीं ख़ुदा यक़ीनन हमारे साथ है तो ख़ुदा ने उन पर अपनी (तरफ से) तसकीन नाज़िल फरमाई और (फ़रिश्तों के) ऐसे लश्कर से उनकी मदद की जिनको तुम लोगों ने देखा तक नहीं और ख़ुदा ने काफिरों की बात नीची कर दिखाई और ख़ुदा ही का बोल बाला है और ख़ुदा तो ग़ालिब हिकमत वाला है
(मुसलमानों) तुम हलके फुलके (हॅसते) हो या भारी भरकम (मसलह) बहर हाल जब तुमको हुक्म दिया जाए फौरन चल खड़े हो और अपनी जानों से अपने मालों से ख़ुदा की राह में जिहाद करो अगर तुम (कुछ जानते हो तो) समझ लो कि यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।