Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- عُدَّةً (उद्दत): युद्ध के लिए आवश्यक सामान, जैसे हथियार, ज़ाद (रास्ते का खाना) और सवारी।
- انبِعَاث (इन्बि'आस): निकलने की जल्दी और उत्साह के साथ प्रस्थान करना।
- فَثَبَّطَهُمْ (फ़सब्बतहुम): उन्हें रोक दिया, उनके दिलों में सुस्ती और काहिली डाल दी।
- الْقَاعِدِينَ (अल-क़ा'इदीन): बैठने वाले, यानी वे लोग जो युद्ध में शामिल नहीं हो सकते—जैसे बीमार, कमज़ोर, स्त्रियाँ और बच्चे।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! अगर ये मुनाफ़िक़ (दिखावटी मुसलमान) सच्चे दिल से तुम्हारे साथ जिहाद के लिए निकलना चाहते होते, तो वे उसकी तैयारी पहले से कर लेते—अपने लिए ज़ाद, सवारी और हथियार का इंतज़ाम कर लेते, जैसा कि सच्चे इरादे वाले मोमिन करते हैं। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, क्योंकि उनका दावा झूठा था। अल्लाह ने उनके दिलों की खोटी नीयत देखते हुए उनका निकलना पसंद नहीं किया, इसलिए उसने उन्हें सुस्त कर दिया और उनके दिलों में काहिली डाल दी, यहाँ तक कि वे घर बैठे रहे। यह अल्लाह की ओर से उनकी सज़ा थी, क्योंकि उन्होंने निकलने का इरादा नहीं किया था। फिर उनसे कहा गया: "तुम बैठने वालों (यानी बीमारों, कमज़ोरों, स्त्रियों और बच्चों) के साथ बैठे रहो।" यानी तुम्हारा हाल उन्हीं लोगों जैसा है जो युद्ध से माफ़ हैं, क्योंकि तुम्हारे दिल जिहाद के लिए तैयार नहीं हैं, चाहे तुम्हारे जिस्म भले ही स्वस्थ हों।
फ़ायदे (सीख):
- सच्चे इरादे का सबूत अमल से होता है—जो व्यक्ति सच में कोई काम करना चाहता है, वह उसकी तैयारी करता है। अगर तैयारी नहीं है, तो इरादा अधूरा और झूठा है।
- अल्लाह की मदद और तौफ़ीक़ (सफलता) सच्ची नीयत पर निर्भर है—जिसका दिल खोटा हो, अल्लाह उसे अच्छे कामों की तौफ़ीक़ नहीं देता।
- इस्लाम में जिहाद और अच्छे कामों की अहमियत इतनी बड़ी है कि उसके लिए तैयारी करना भी इबादत है, और जो लोग सच्चे दिल से निकलते हैं, अल्लाह उन्हें सफलता देता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने दिलों की नीयत को साफ़ रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह हर दिल का हाल जानता है और वही हमारे कामों को क़ुबूल करता है या नहीं।
- इस्लाम में बीमार, कमज़ोर और माज़ूर (जिनके पास कोई उज़्र हो) लोगों को जिहाद से माफ़ रखा गया है, यह दीन की आसानी और रहमत की निशानी है।
📜 आयत 44-48 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 46
सूरा अत-तौबा आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (कि क्या करें क्या न करें) और अगर ये लोग…सूरा आयत 46/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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