Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- خَبَالًا: फ़साद, बिगाड़, यानी नुक़सान और खराबी।
- لَأَوْضَعُوا: वे तेज़ी से फैलते, दौड़-धूप करते।
- خِلَالَكُمْ: तुम्हारे बीच, तुम्हारे दरमियान।
- يَبْغُونَكُمُ الْفِتْنَةَ: वे तुम्हारे लिए फ़ितना (परीक्षा और उपद्रव) चाहते हैं।
- سَمَّاعُونَ لَهُمْ: उनकी बातें सुनने वाले (यानी उनके जासूस या उनकी बात मानने वाले)।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) की हालत बयान कर रहा है, जो जिहाद से पीछे रहने के लिए बहाने बनाते थे। अल्लाह फ़रमाता है: ऐ ईमान वालों! अगर ये मुनाफ़िक़ तुम्हारे साथ जिहाद के लिए निकलते, तो वे तुम्हारे लिए किसी भलाई का ज़रिया न बनते, बल्कि वे तुम्हारे बीच फ़साद, बिगाड़ और खराबी ही बढ़ाते। वे तुम्हारे दिलों में डर और कमज़ोरी पैदा करते, तुम्हारे हौसले पस्त करते और तुम्हारे बीच नफ़रत व दुश्मनी फैलाने के लिए तेज़ी से चुग़ली और बुराई फैलाते। उनका मक़सद सिर्फ़ यही होता कि तुम्हें फ़ितने में डालें, यानी तुम्हारे ईमान और एकता को कमज़ोर करें और तुम्हें जिहाद से रोकें। और तुम्हारे बीच (ऐ ईमान वालों!) कुछ ऐसे लोग भी मौजूद हैं जो उनकी बातें सुनते हैं, उनकी बातों पर यक़ीन कर लेते हैं और उन्हें आगे फैला देते हैं, जिससे तुम्हारे बीच अलगाव और झगड़े पैदा हो जाते हैं। अल्लाह तआला इन ज़ालिमों (मुनाफ़िक़ों) के हाल से पूरी तरह वाक़िफ़ है — वह उनके दिलों के भेद जानता है और उनके छिपे इरादों से बाख़बर है। वह उन्हें उनके किए की सज़ा ज़रूर देगा।
फ़ायदे (सबक़):
- मुनाफ़िक़ और बुरे लोग किसी भी काम में शामिल हों तो वे नुक़सान ही पहुँचाते हैं, भलाई नहीं। इसलिए उनसे दूर रहना चाहिए और उन पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
- मुसलमानों को चाहिए कि वे अपने बीच एकता और भाईचारे को बनाए रखें, और चुग़ली, बुराई फैलाने वालों की बातों से सावधान रहें।
- अल्लाह तआला हर चीज़ से बाख़बर है — वह ज़ालिमों के छिपे हुए मंसूबों को भी जानता है और उन्हें उनकी सज़ा देगा। यह ईमान वालों के लिए तसल्ली है कि अल्लाह उनका हिमायती है।
- मुसलमानों को चाहिए कि वे किसी की बात को बिना जाँचे-परखे न मानें, क्योंकि दुश्मन और मुनाफ़िक़ लोग झूठी बातें फैलाकर उनके बीच फूट डालने की कोशिश करते हैं।
📜 आयत 45-49 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 47
सूरा अत-तौबा आयत 47 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर ये लोग तुममें (मिलकर) निकलते भी तो बस तुममे…सूरा आयत 47/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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