अत-तौबा · 70/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
أَلَمْ يَأْتِهِمْ نَبَأُ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ قَوْمِ نُوحٍ وَعَادٍ وَثَمُودَ وَقَوْمِ إِبْرَاهِيمَ وَأَصْحَابِ مَدْيَنَ وَالْمُؤْتَفِكَاتِ ۚ أَتَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ ۖ فَمَا كَانَ اللَّهُ لِيَظْلِمَهُمْ وَلَٰكِن كَانُوا أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ ۝٧٠
Alam yaatihim naba ul lazeena min qablihim qawmi Noohinw wa `Aadinw wa Samooda wa qawmi Ibraaheema wa ashaabi adyana walmu`tafikaat; atathum Rusuluhum bilbaiyinaati famaa kaanal laahu liyazlimahum wa laakin kaanooo anfusahum yazlimoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या इन मुनाफिक़ों को उन लोगों की ख़बर नहीं पहुँची है जो उनसे पहले हो गुज़रे हैं नूह की क़ौम और आद और समूद और इबराहीम की क़ौम और मदियन वाले और उलटी हुई बस्तियों के रहने वाले कि उनके पास उनके रसूल वाजेए (और रौशन) मौजिज़े लेकर आए तो (वह मुब्तिलाए अज़ाब हुए) और ख़ुदा ने उन पर जुल्म नहीं किया मगर ये लोग ख़ुद अपने ऊपर जुल्म करते थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • नबा: समाचार, खबर
  • मु'तफिकात: उलटी हुई बस्तियाँ (क़ौमे लूत की बस्तियाँ जो उलट दी गईं)
  • बय्यिनात: स्पष्ट प्रमाण, चमत्कार और आदेश

तफसीर:

क्या इन मुनाफ़िक़ों तक उन लोगों की खबर नहीं पहुँची जो इनसे पहले गुज़र चुके हैं? नूह की क़ौम, जिन्हें तूफ़ान में डुबो दिया गया; आद की क़ौम, जिन्हें तेज़ और ठंडी हवा से नष्ट किया गया; समूद की क़ौम, जिन्हें भयंकर चीख़ और कंपकंपी से हलाक किया गया; इब्राहीम की क़ौम, जिनका अंजाम बुरा हुआ; मदयन के लोग (शुऐब अलैहिस्सलाम की क़ौम), जिन्हें दिन के सायबान के अज़ाब ने आ लिया; और उलटी हुई बस्तियों वाले (लूत की क़ौम), जिनकी बस्तियाँ उलट दी गईं और उन पर पत्थरों की बारिश हुई।

ये सब वे लोग थे जिनके पास अल्लाह के रसूल स्पष्ट प्रमाणों, चमत्कारों और सीधे आदेशों के साथ आए, लेकिन उन्होंने झुठलाया और नाफ़रमानी की। तो अल्लाह ने उन्हें उनके बुरे कर्मों की सज़ा दी। अल्लाह ऐसा नहीं कि उन पर ज़ुल्म करे — उसने तो उनके पास रसूल भेजे, सबूत क़ायम किए और उन्हें आगाह किया — लेकिन उन्होंने खुद अपनी जानों पर ज़ुल्म किया, क्योंकि उन्होंने कुफ्र और झुठलाने का रास्ता चुना और अपने हाथों अपनी तबाही मोल ली।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह का इंसाफ़ पूर्ण है — वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता; वह पहले रसूल भेजता है, सबूत क़ायम करता है, फिर अज़ाब देता है। यह अल्लाह की रहमत और अदल का सबूत है।
  2. इतिहास की इबरत — पिछली क़ौमों का अंजाम हमारे लिए नसीहत है; जो लोग अल्लाह के रसूलों को झुठलाते हैं, उनका अंजाम बुरा होता है।
  3. ज़ुल्म असल में इंसान अपनी जान पर करता है — अल्लाह ने हिदायत के रास्ते खोले, लेकिन इंसान अपनी गलत पसंद से खुद को नुक़सान पहुँचाता है।
  4. अल्लाह के रसूलों का आना रहमत है — वे लोगों को सीधा रास्ता दिखाने और अज़ाब से बचाने के लिए आते हैं; जो उन्हें मानता है वह सफल होता है, और जो नहीं मानता वह खुद को तबाही में डालता है।
  5. यह आयत मुनाफ़िक़ों और काफ़िरों को डराती है कि अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) बदलती नहीं — जैसे पिछली क़ौमों को पकड़ा गया, वैसे ही इन्हें भी पकड़ा जाएगा।


📜 आयत 68-72 — अत-तौबा

68وَعَدَ اللَّهُ الْمُنَافِقِينَ وَالْمُنَافِقَاتِ وَالْكُفَّارَ نَارَ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ هِيَ حَسْبُهُمْ ۚ وَلَعَنَهُمُ اللَّهُ ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ مُّقِيمٌ
मुनाफिक़ मर्द और मुनाफिक़ औरतें और काफिरों से ख़ुदा ने जहन्नुम की आग का वायदा तो कर लिया है कि ये लोग हमेशा उसी में रहेगें और यही उन के लिए काफ़ी है और ख़ुदा ने उन पर लानत की है और उन्हीं के लिए दाइमी (हमेशा रहने वाला) अज़ाब है
69كَالَّذِينَ مِن قَبْلِكُمْ كَانُوا أَشَدَّ مِنكُمْ قُوَّةً وَأَكْثَرَ أَمْوَالًا وَأَوْلَادًا فَاسْتَمْتَعُوا بِخَلَاقِهِمْ فَاسْتَمْتَعْتُم بِخَلَاقِكُمْ كَمَا اسْتَمْتَعَ الَّذِينَ مِن قَبْلِكُم بِخَلَاقِهِمْ وَخُضْتُمْ كَالَّذِي خَاضُوا ۚ أُولَٰئِكَ حَبِطَتْ أَعْمَالُهُمْ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
(मुनाफिक़ो तुम्हारी तो) उनकी मसल है जो तुमसे पहले थे वह लोग तुमसे कूवत में (भी) ज्यादा थे और औलाद में (भी) कही बढ़ कर तो वह अपने हिस्से से भी फ़ायदा उठा हो चुके तो जिस तरह तुम से पहले लोग अपने हिस्से से फायदा उठा चुके हैं इसी तरह तुम ने अपने हिस्से से फायदा उठा लिया और जिस तरह वह बातिल में घुसे रहे उसी तरह तुम भी घुसे रहे ये वह लोग हैं जिन का सब किया धरा दुनिया और आख़िरत (दोनों) में अकारत हुआ और यही लोग घाटे में हैं
70أَلَمْ يَأْتِهِمْ نَبَأُ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ قَوْمِ نُوحٍ وَعَادٍ وَثَمُودَ وَقَوْمِ إِبْرَاهِيمَ وَأَصْحَابِ مَدْيَنَ وَالْمُؤْتَفِكَاتِ ۚ أَتَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ ۖ فَمَا كَانَ اللَّهُ لِيَظْلِمَهُمْ وَلَٰكِن كَانُوا أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
क्या इन मुनाफिक़ों को उन लोगों की ख़बर नहीं पहुँची है जो उनसे पहले हो गुज़रे हैं नूह की क़ौम और आद और समूद और इबराहीम की क़ौम और मदियन वाले और उलटी हुई बस्तियों के रहने वाले कि उनके पास उनके रसूल वाजेए (और रौशन) मौजिज़े लेकर आए तो (वह मुब्तिलाए अज़ाब हुए) और ख़ुदा ने उन पर जुल्म नहीं किया मगर ये लोग ख़ुद अपने ऊपर जुल्म करते थे
71وَالْمُؤْمِنُونَ وَالْمُؤْمِنَاتُ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَاءُ بَعْضٍ ۚ يَأْمُرُونَ بِالْمَعْرُوفِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ الْمُنكَرِ وَيُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَيُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَيُطِيعُونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۚ أُولَٰئِكَ سَيَرْحَمُهُمُ اللَّهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
और ईमानदार मर्द और ईमानदार औरते उनमें से बाज़ के बाज़ रफीक़ है और नामज़ पाबन्दी से पढ़ते हैं और ज़कात देते हैं और ख़ुदा और उसके रसूल की फरमाबरदारी करते हैं यही लोग हैं जिन पर ख़ुदा अनक़रीब रहम करेगा बेशक ख़ुदा ग़ालिब हिकमत वाला है
72وَعَدَ اللَّهُ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا وَمَسَاكِنَ طَيِّبَةً فِي جَنَّاتِ عَدْنٍ ۚ وَرِضْوَانٌ مِّنَ اللَّهِ أَكْبَرُ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
ख़ुदा ने ईमानदार मर्दों और ईमानदारा औरतों से (बेहश्त के) उन बाग़ों का वायदा कर लिया है जिनके नीचे नहरें जारी हैं और वह उनमें हमेशा रहेगें (बेहश्त) अदन के बाग़ो में उम्दा उम्दा मकानात का (भी वायदा फरमाया) और ख़ुदा की ख़ुशनूदी उन सबसे बालातर है- यही तो बड़ी (आला दर्जे की) कामयाबी है
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अनुवाद — अत-तौबा 70

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Tuesday, August 18, 2026

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