अल-बय्यिना · 5/8
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बय्यिना
وَمَا أُمِرُوا إِلَّا لِيَعْبُدُوا اللَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ حُنَفَاءَ وَيُقِيمُوا الصَّلَاةَ وَيُؤْتُوا الزَّكَاةَ ۚ وَذَٰلِكَ دِينُ الْقَيِّمَةِ ۝٥
Wa maa umiroo il-la liy`abu dul laaha mukhliseena lahud-deena huna faa-a wa yuqeemus salaahta wa yu-tuz zakaata; wa zaalika deenul qaiyimah
📖 हिंदी अर्थ
(तब) और उन्हें तो बस ये हुक्म दिया गया था कि निरा ख़ुरा उसी का एतक़ाद रख के बातिल से कतरा के ख़ुदा की इबादत करे और पाबन्दी से नमाज़ पढ़े और ज़कात अदा करता रहे और यही सच्चा दीन है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ: अल्लाह की इबादत को पूरी तरह से सिर्फ उसी के लिए खालिस करना, बिना किसी शिर्क (साझीदार) के।
  • حُنَفَاءَ: बातिल (झूठे) धर्मों से हटकर सच्चे धर्म (इस्लाम) की ओर झुकने वाले, एकेश्वरवादी।
  • دِينُ الْقَيِّمَةِ: सीधा, स्थिर और अटल धर्म, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं।

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला हमें बताते हैं कि पिछली किताबों (तौरात और इंजील) के लोगों को भी यही हुक्म दिया गया था, और इस कुरआन में भी उन्हें यही आदेश दिया गया है कि वे अल्लाह की इबादत करें, लेकिन इस शर्त के साथ कि उनकी इबादत पूरी तरह से खालिस अल्लाह के लिए हो — न किसी दिखावे के लिए, न किसी साझीदार के साथ। उन्हें हुक्म दिया गया कि वे शिर्क से बचकर हनाफा (एकेश्वरवादी और सीधे रास्ते पर चलने वाले) बनें।

साथ ही, उन्हें नमाज़ क़ायम करने का हुक्म दिया गया — यानी उसे सही तरीके से, अपने समय पर, पूरी पाबंदी के साथ अदा करें। और ज़कात देने का भी हुक्म दिया गया — यानी अपने माल में से अल्लाह का हक़ निकालकर ज़रूरतमंदों को दें। यही वह सीधा और स्थिर धर्म है, जिसमें कोई कमी या टेढ़ापन नहीं — और यही इस्लाम है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

प्यारे भाइयों और बहनों! देखिए, अल्लाह तआला ने हर ज़माने में, हर नबी के ज़रिए, बस यही एक ही पैग़ाम भेजा — कि इबादत सिर्फ अल्लाह की हो, दिल साफ़ हो, नीयत खालिस हो, और ज़िंदगी में नमाज़ और ज़कात जैसे अच्छे काम शामिल हों। यही वह रास्ता है जो इंसान को सुकून देता है, उसके दिल को रोशन करता है और उसे अल्लाह के करीब लाता है।

जब हम अपनी इबादत को सिर्फ अल्लाह के लिए खालिस कर लेते हैं, तो हमारी ज़िंदगी में बरकत आती है, हमारे दिल से बेचैनी दूर होती है, और हमें एक अजीब सी राहत मिलती है। नमाज़ हमें दिन में पाँच बार अल्लाह से जोड़ती है, और ज़कात हमारे माल को पाक करती है और समाज में भाईचारा पैदा करती है। यही वह दीन है जो सीधा है, स्थिर है और क़यामत तक के लिए अटल है।

आओ, हम सब अपनी नीयतों को सुधारें, अपनी इबादत को खालिस करें, और इस सीधे रास्ते पर चलकर अल्लाह की रहमत और जन्नत के हक़दार बनें। यही हमारी कामयाबी है, यही हमारी नजात है।



📜 आयत 3-7 — सूरा अल-बय्यिना

3فِيهَا كُتُبٌ قَيِّمَةٌ
उनमें (जो) पुरज़ोर और दरूस्त बातें लिखी हुई हैं (सुनाये)
4وَمَا تَفَرَّقَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ إِلَّا مِن بَعْدِ مَا جَاءَتْهُمُ الْبَيِّنَةُ
अहले किताब मुताफ़र्रिक़ हुए भी तो जब उनके पास खुली हुई दलील आ चुकी
5وَمَا أُمِرُوا إِلَّا لِيَعْبُدُوا اللَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ حُنَفَاءَ وَيُقِيمُوا الصَّلَاةَ وَيُؤْتُوا الزَّكَاةَ ۚ وَذَٰلِكَ دِينُ الْقَيِّمَةِ
(तब) और उन्हें तो बस ये हुक्म दिया गया था कि निरा ख़ुरा उसी का एतक़ाद रख के बातिल से कतरा के ख़ुदा की इबादत करे और पाबन्दी से नमाज़ पढ़े और ज़कात अदा करता रहे और यही सच्चा दीन है
6إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ وَالْمُشْرِكِينَ فِي نَارِ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ أُولَٰئِكَ هُمْ شَرُّ الْبَرِيَّةِ
बेशक अहले किताब और मुशरेकीन से जो लोग (अब तक) काफ़िर हैं वह दोज़ख़ की आग में (होंगे) हमेशा उसी में रहेंगे यही लोग बदतरीन ख़लाएक़ हैं
7إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ أُولَٰئِكَ هُمْ خَيْرُ الْبَرِيَّةِ
बेशक जो लोग ईमान लाए और अच्छे काम करते रहे यही लोग बेहतरीन ख़लाएक़ हैं
अल-बय्यिनाकुरान सूची
8आयत
मदनीअवतरण स्थान
5आयत

अनुवाद — अल-बय्यिना 5

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Wednesday, September 30, 2026

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