फिर जब ख़ुदा ने उन्हें नजात दी तो वह लोग ज़मीन पर (कदम रखते ही) फौरन नाहक़ सरकशी करने लगते हैं (ऐ लोगों तुम्हारी सरकशी का वबाल) तो तुम्हारी ही जान पर है - (ये भी) दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी का फायदा है फिर आख़िर हमारी (ही) तरफ तुमको लौटकर आना है तो (उस वक्त) हम तुमको जो कुछ (दुनिया में) करते थे बता देगे
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لیکن جب وہ ان کو نجات دے دیتا ہے تو ملک میں ناحق شرارت کرنے لگتے ہیں۔ لوگو! تمہاری شرارت کا وبال تمہاری ہی جانوں پر ہوگا تم دنیا کی زندگی کے فائدے اُٹھا لو۔ پھر تم کو ہمارے پاس لوٹ کر آنا ہے۔ اس وقت ہم تم کو بتائیں گے جو کچھ تم کیا کرتے تھے
مَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا: दुनिया की जीवन का अस्थायी सुख-सामान।
فَنُنَبِّئُكُم: हम तुम्हें बता देंगे (सब कुछ खोल देंगे)।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब लोग मुसीबत में होते हैं—जैसे समुद्र में तूफ़ान या किसी भयानक आपदा में—तो वे सच्चे दिल से अल्लाह को पुकारते हैं और उसी से मदद माँगते हैं। लेकिन जैसे ही अल्लाह उन्हें उस मुसीबत से बचा लेता है, वे फिर से ज़मीन पर ज़ुल्म और फ़साद करने लगते हैं। वे अल्लाह के हुक्म को भूलकर नाहक़ सरकशी और बग़ावत पर उतर आते हैं।
अल्लाह तआला फ़रमाता है: "ऐ लोगो! तुम्हारा ये ज़ुल्म और सरकशी दरअसल तुम्हारे ही ख़िलाफ़ है।" यानी जो नुक़सान होता है, वह अल्लाह को नहीं, बल्कि ख़ुद तुम्हें ही होता है। अल्लाह तो बेनियाज़ है, उस पर तुम्हारे ज़ुल्म का कोई असर नहीं पड़ता। तुम्हें दुनिया की ज़िंदगी का थोड़ा सा अस्थायी सुख मिलता है, जो जल्द ही ख़त्म हो जाने वाला है। उसके बाद तुम्हें हमारी तरफ़ लौटकर आना है, और हम तुम्हें वह सब कुछ बता देंगे जो तुम दुनिया में करते रहे—अच्छा हो या बुरा—और उसका पूरा-पूरा बदला देंगे।
फ़ायदे (सीख):
मुसीबत में इंसान अल्लाह को याद करता है, लेकिन आराम मिलते ही उसे भूल जाता है। यह इंसान की कमज़ोरी है, और इससे बचना चाहिए। असली मोमिन वह है जो सुख-दुख दोनों हालतों में अल्लाह को याद रखे।
ज़ुल्म और फ़साद का नुक़सान सिर्फ़ उसी को होता है जो करता है। अल्लाह पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। यह अद्भुत न्याय है कि हर इंसान अपने कर्मों का फल खुद भुगतेगा।
दुनिया की ज़िंदगी बहुत छोटी और अस्थायी है। इसे ही सब कुछ समझ लेना बड़ी नादानी है। असली ज़िंदगी आख़िरत की है, जहाँ हर अच्छे और बुरे काम का हिसाब होगा।
यह आयत हमें सिखाती है कि जब अल्लाह हमें किसी मुसीबत से बचाए, तो हमें शुक्रगुज़ार होना चाहिए और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में गुज़ारना चाहिए, न कि फिर से गुनाह और ज़ुल्म में पड़ जाना चाहिए।
अल्लाह का इंसाफ़ पूर्ण है—वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि हर इंसान को उसके किए का बदला देता है। यह हमें अच्छे काम करने की तरफ़ राग़िब करता है और बुरे कामों से डराता है।
फिर जब ख़ुदा ने उन्हें नजात दी तो वह लोग ज़मीन पर (कदम रखते ही) फौरन नाहक़ सरकशी करने लगते हैं (ऐ लोगों तुम्हारी सरकशी का वबाल) तो तुम्हारी ही जान पर है - (ये भी) दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी का फायदा है फिर आख़िर हमारी (ही) तरफ तुमको लौटकर आना है तो (उस वक्त) हम तुमको जो कुछ (दुनिया में) करते थे बता देगे
और लोगों को जो तकलीफ पहुँची उसके बाद जब हमने अपनी रहमत का जाएक़ा चखा दिया तो यकायक उन लोगों से हमारी आयतों में हीले बाज़ी शुरू कर दी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तद्बीर में ख़ुदा सब से ज्यादा तेज़ है तुम जो कुछ मक्कारी करते हो वह हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) लिखते जाते हैं
वह वही ख़ुदा है जो तुम्हें ख़ुश्की और दरिया में सैर कराता फिरता है यहाँ तक कि जब (कभी) तुम कश्तियों पर सवार होते हो और वह उन लोगों को बाद मुवाफिक़ (हवा के धारे) की मदद से लेकर चली और लोग उस (की रफ्तार) से ख़ुश हुए (यकायक) कश्ती पर हवा का एक झोंका आ पड़ा और (आना था कि) हर तरफ से उस पर लहरें (बढ़ी चली) आ रही हैं और उन लोगों ने समझ लिया कि अब घिर गए (और जान न बचेगी) तब अपने अक़ीदे को उसके वास्ते निरा खरा करके खुदा से दुआएँ मागँने लगते हैं कि (ख़ुदाया) अगर तूने इस (मुसीबत) से हमें नजात दी तो हम ज़रुर बड़े शुक्र गुज़ार होंगे
फिर जब ख़ुदा ने उन्हें नजात दी तो वह लोग ज़मीन पर (कदम रखते ही) फौरन नाहक़ सरकशी करने लगते हैं (ऐ लोगों तुम्हारी सरकशी का वबाल) तो तुम्हारी ही जान पर है - (ये भी) दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी का फायदा है फिर आख़िर हमारी (ही) तरफ तुमको लौटकर आना है तो (उस वक्त) हम तुमको जो कुछ (दुनिया में) करते थे बता देगे
दुनियावी ज़िदगी की मसल तो बस पानी की सी है कि हमने उसको आसमान से बरसाया फिर ज़मीन के साग पात जिसको लोग और चौपाए खा जाते हैं (उसके साथ मिल जुलकर निकले यहाँ तक कि जब ज़मीन ने (फसल की चीज़ों से) अपना बनाओ सिंगार कर लिया और (हर तरह) आरास्ता हो गई और खेत वालों ने समझ लिया कि अब वह उस पर यक़ीनन क़ाबू पा गए (जब चाहेंगे काट लेगे) यकायक हमारा हुक्म व अज़ाब रात या दिन को आ पहुँचा तो हमने उस खेत को ऐसा साफ कटा हुआ बना दिया कि गोया कुल उसमें कुछ था ही नहीं जो लोग ग़ौर व फिक्र करते हैं उनके वास्ते हम आयतों को यूँ तफसीलदार बयान करते है
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।