Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اهْبِطْ (उह्बित) – उतरो, नीचे जाओ
- بِسَلَامٍ (बिसलामिन) – सलामती और अमन के साथ
- بَرَكَاتٍ (बरकातिन) – खैर और बरकतें, भलाइयाँ
- أُمَمٍ (उममिन) – समुदाय, जमातें, वंश
- سَنُمَتِّعُهُمْ (सनुमत्तिउहुम) – हम उन्हें (दुनिया में) आराम और सुख देंगे
- يَمَسُّهُمْ (यमस्सुहुम) – उन्हें छूएगा, उन तक पहुँचेगा
- عَذَابٌ أَلِيمٌ (अज़ाबुन अलीम) – दर्दनाक और दुखदायी यातना
तफसीर (व्याख्या):
जब नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम पर अल्लाह का अज़ाब आया और तूफ़ान ने सब कुछ तबाह कर दिया, तो अल्लाह तआला ने अपने नबी नूह (अलैहिस्सलाम) को आदेश दिया कि वे कश्ती से ज़मीन पर उतरें। यह उतरना सिर्फ़ एक साधारण उतरना नहीं था, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से सलामती, अमन और बरकतों के साथ था।
अल्लाह ने फ़रमाया: "ऐ नूह! हमारी तरफ़ से सलामती और बरकतों के साथ उतरो।" यह सलामती सिर्फ़ उस वक़्त के लिए नहीं थी, बल्कि नूह (अलैहिस्सलाम) पर और उनकी औलाद और उनके साथियों की नस्लों पर हमेशा के लिए अल्लाह की रहमत और भलाई का एलान था। यह बरकतें उन लोगों के लिए थीं जो ईमान लाए थे और कश्ती में सवार थे, और उनकी आने वाली नस्लों के लिए भी जो ईमान पर क़ायम रहेंगी।
लेकिन अल्लाह ने यह भी बताया कि नूह (अलैहिस्सलाम) की औलाद में से कुछ ऐसे समुदाय भी होंगे जो काफ़िर और नाफ़रमान होंगे। अल्लाह उन्हें दुनिया में कुछ समय के लिए सुख-चैन और आराम की ज़िंदगी देगा, वे दुनिया के माल-ओ-मत्ता से फ़ायदा उठाएँगे, खाएँगे-पीएँगे और अपनी ज़िंदगी के दिन पूरे करेंगे। लेकिन यह सब कुछ अस्थायी है। जब उनकी मौत का वक़्त आएगा और वे आख़िरत में पहुँचेंगे, तो उन्हें अल्लाह की तरफ़ से ऐसा दर्दनाक अज़ाब मिलेगा जो उनके सारे दुनियावी सुखों को भुला देगा।
इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है। अल्लाह अपने नेक बंदों को सलामती और बरकतें देता है, और उनकी नस्लों पर भी रहमत फ़रमाता है। लेकिन जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं, वे दुनिया में चाहे कितना भी आराम पा लें, आख़िरकार उनका अंजाम दर्दनाक अज़ाब ही है। यह हमारे लिए एक चेतावनी है कि हम ईमान और नेक अमल पर क़ायम रहें, ताकि हम अल्लाह की बरकतों और रहमत के हक़दार बनें और उस दर्दनाक अज़ाब से बचे रहें।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की रहमत उसके नेक बंदों पर हमेशा रहती है, और वह अपने नबियों को इज़्ज़त और सलामती से नवाज़ता है। हमें चाहिए कि हम नूह (अलैहिस्सलाम) की तरह सब्र और ईमान पर क़ायम रहें, और अल्लाह की हर बात को दिल से क़बूल करें, ताकि हम भी उसकी बरकतों और रहमत के हक़दार बन सकें।
📜 आयत 46-50 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 48
सूरा हूद आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो तुम पर हैं और जो लोग तुम्हारे साथ हैं…सूरा आयत 48/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


