हूद · 49/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
تِلْكَ مِنْ أَنبَاءِ الْغَيْبِ نُوحِيهَا إِلَيْكَ ۖ مَا كُنتَ تَعْلَمُهَا أَنتَ وَلَا قَوْمُكَ مِن قَبْلِ هَٰذَا ۖ فَاصْبِرْ ۖ إِنَّ الْعَاقِبَةَ لِلْمُتَّقِينَ ۝٤٩
Tilka min ambaaa`il ghaibi nooheehaaa ilaika maa kunta ta`lamuhaaaa anta wa laa qawmuka min qabli haazaa fasbir innal `aaqibata lilmuttaqeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) ये ग़ैब की चन्द ख़बरे हैं जिनको तुम्हारी तरफ वही के ज़रिए पहुँचाते हैं जो उसके क़ब्ल न तुम जानते थे और न तुम्हारी क़ौम ही (जानती थी) तो तुम सब्र करो इसमें शक़ नहीं कि आख़िारत (की खूबियाँ) परहेज़गारों ही के वास्ते हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَنبَاءِ الْغَيْبِ: परोक्ष (छिपी हुई) ख़बरें, जो इंसान के ज्ञान और अनुभव से परे हों।
  • نُوحِيهَا: हम (अल्लाह) उसे तुम्हारी ओर वह्य (प्रकाशना) के रूप में भेजते हैं।
  • الْعَاقِبَةُ: अंतिम परिणाम, आख़िरत का अंजाम या अंततः मिलने वाला प्रतिफल।
  • الْمُتَّقِينَ: वे लोग जो अल्लाह से डरते हैं और उसके आदेशों का पालन करते हुए निषेधों से बचते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत नूह (अलैहिस्सलाम) की कहानी के अंत में आई है, और अल्लाह अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को संबोधित करते हुए फ़रमाता है कि ये वृत्तांत, जो तुम्हें सुनाए गए हैं, परोक्ष की ख़बरें हैं। ये ऐसी घटनाएँ हैं जो तुम्हारी अपनी जानकारी में नहीं थीं और न ही तुम्हारी क़ौम को इनका कोई ज्ञान था। यह सब कुछ अल्लाह की ओर से वह्य के माध्यम से तुम्हें दिया गया है, ताकि तुम इनसे सबक़ लो और अपने क़ौम को सचेत करो।

इससे पहले, न तो तुम (ऐ मुहम्मद!) इन ऐतिहासिक घटनाओं से वाक़िफ़ थे और न ही तुम्हारी क़ौम के लोग, क्योंकि ये बातें किसी किताब में दर्ज नहीं थीं और न ही कोई इंसानी ज्ञान इन तक पहुँच सकता था। यह स्वयं इस बात का प्रमाण है कि यह वह्य अल्लाह की ओर से है, क्योंकि एक अनपढ़ व्यक्ति के लिए इतनी गहरी और सटीक ऐतिहासिक जानकारियाँ लाना असंभव है।

फिर अल्लाह अपने नबी को धैर्य का आदेश देता है: जैसे नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम के अत्याचारों और झुठलाने पर सैकड़ों वर्षों तक धैर्य दिखाया, उसी प्रकार तुम भी अपनी क़ौम की ओर से मिलने वाले कष्टों और आरोपों पर धैर्य रखो। अल्लाह का वादा है कि अंतिम सफलता और विजय उन्हीं को मिलेगी जो उससे डरते हैं, उसके आदेशों का पालन करते हैं और उसकी मनाही से बचते हैं। यह सफलता दुनिया में भी हो सकती है और आख़िरत में अवश्य होगी, जहाँ उन्हें जन्नत और अल्लाह की रज़ा मिलेगी।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. वह्य की सच्चाई: यह आयत साबित करती है कि क़ुरआन अल्लाह की ओर से है, क्योंकि इसमें ऐसी परोक्ष ख़बरें हैं जो किसी इंसान को नहीं मालूम थीं। यह हमारे ईमान को मज़बूत करता है।
  2. धैर्य का महत्व: नबियों की ज़िंदगी हमें सिखाती है कि सच्चाई के रास्ते में मुश्किलें आएँगी, लेकिन धैर्य और अल्लाह पर भरोसा ही कामयाबी की कुंजी है।
  3. परिणाम का नियम: दुनिया में चाहे कुछ भी हो, आख़िरी फ़ैसला अल्लाह के पास है, और वहाँ सिर्फ़ मुत्तक़ी (परहेज़गार) लोग ही कामयाब होंगे। यह हमें अच्छे कर्मों और तक़वा अपनाने की प्रेरणा देता है।
  4. क़ुरआन की शिक्षा: यह कहानियाँ सिर्फ़ इतिहास नहीं हैं, बल्कि हमारे लिए सबक़ हैं कि हम अपने जीवन में सच्चाई, धैर्य और अल्लाह की आज्ञाकारिता को अपनाएँ।
🎧 सुनें

📜 आयत 47-51 — हूद

47قَالَ رَبِّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ أَنْ أَسْأَلَكَ مَا لَيْسَ لِي بِهِ عِلْمٌ ۖ وَإِلَّا تَغْفِرْ لِي وَتَرْحَمْنِي أَكُن مِّنَ الْخَاسِرِينَ
और अगर तु मुझे (मेरे कसूर न बख्श देगा और मुझ पर रहम न खाएगा तो मैं सख्त घाटा उठाने वालों में हो जाऊँगा (जब तूफान जाता रहा तो) हुक्म दिया गया ऐ नूह हमारी तरफ से सलामती और उन बरकतों के साथ कश्ती से उतरो
48قِيلَ يَا نُوحُ اهْبِطْ بِسَلَامٍ مِّنَّا وَبَرَكَاتٍ عَلَيْكَ وَعَلَىٰ أُمَمٍ مِّمَّن مَّعَكَ ۚ وَأُمَمٌ سَنُمَتِّعُهُمْ ثُمَّ يَمَسُّهُم مِّنَّا عَذَابٌ أَلِيمٌ
जो तुम पर हैं और जो लोग तुम्हारे साथ हैं उनमें से न कुछ लोगों पर और (तुम्हारे बाद) कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें हम थोड़े ही दिन बाद बहरावर करेगें फिर हमारी तरफ से उनको दर्दनाक अज़ाब पहुँचेगा
49تِلْكَ مِنْ أَنبَاءِ الْغَيْبِ نُوحِيهَا إِلَيْكَ ۖ مَا كُنتَ تَعْلَمُهَا أَنتَ وَلَا قَوْمُكَ مِن قَبْلِ هَٰذَا ۖ فَاصْبِرْ ۖ إِنَّ الْعَاقِبَةَ لِلْمُتَّقِينَ
(ऐ रसूल) ये ग़ैब की चन्द ख़बरे हैं जिनको तुम्हारी तरफ वही के ज़रिए पहुँचाते हैं जो उसके क़ब्ल न तुम जानते थे और न तुम्हारी क़ौम ही (जानती थी) तो तुम सब्र करो इसमें शक़ नहीं कि आख़िारत (की खूबियाँ) परहेज़गारों ही के वास्ते हैं
50وَإِلَىٰ عَادٍ أَخَاهُمْ هُودًا ۚ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا مُفْتَرُونَ
और (हमने) क़ौमे आद के पास उनके भाई हूद को (पैग़म्बर बनाकर भेजा और) उन्होनें अपनी क़ौम से कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा ही की परसतिश करों उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं तुम बस निरे इफ़तेरा परदाज़ (झूठी बात बनाने वाले) हो
51يَا قَوْمِ لَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْرًا ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَى الَّذِي فَطَرَنِي ۚ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
ऐ मेरी क़ौम मै उस (समझाने पर तुमसे कुछ मज़दूरी नहीं मॉगता मेरी मज़दूरी तो बस उस शख़्श के ज़िम्मे है जिसने मुझे पैदा किया तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते
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अनुवाद — हूद 49

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Tuesday, August 18, 2026

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