Wa yaa qawmis taghfiroo Rabbakum summa toobooo ilaihi yursilis samaaa`a `alaikum midraaranw wa yazidkum quwwatan ilaa quwwatikum wa laa tatawallaw mujrimeen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और ऐ मेरी क़ौम अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में अपने (गुनाहों से) तौबा करो तो वह तुम पर मूसलाधार मेह आसमान से बरसाएगा ख़ुश्क साली न होगी और तुम्हारी क़ूवत (ताक़त) में और क़ूवत बढ़ा देगा और मुजरिम बन कर उससे मुँह न मोड़ों
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
اور اے قوم! اپنے پروردگار سے بخشش مانگو پھر اس کے آگے توبہ کرو۔ وہ تم پر آسمان سے موسلادھار مینہ برسائے گا اور تمہاری طاقت پر طاقت بڑھائے گا اور (دیکھو) گنہگار بن کر روگردانی نہ کرو
और ऐ मेरी क़ौम अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में अपने (गुनाहों से) तौबा करो तो वह तुम पर मूसलाधार मेह आसमान से बरसाएगा ख़ुश्क साली न होगी और तुम्हारी क़ूवत (ताक़त) में और क़ूवत बढ़ा देगा और मुजरिम बन कर उससे मुँह न मोड़ों
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
استغفروا: अपने पालनहार से क्षमा माँगो।
توبوا: पश्चाताप करो और उसकी ओर लौटो।
مدراراً: लगातार और प्रचुर मात्रा में बरसने वाला (मूसलाधार वर्षा)।
قوة إلى قوتكم: तुम्हारी मौजूदा ताकत के साथ और अधिक ताकत बढ़ा देना।
تتولوا: मुँह मोड़ो, विमुख हो जाओ।
مجرمين: अपराधी बनकर, पाप में डूबे हुए।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! अपने रब से अपने पिछले गुनाहों की माफ़ी माँगो, और उस पर ईमान लाओ। फिर उसकी ओर सच्चे दिल से पलटो—अपने शिर्क (बुत-परस्ती) और गुनाहों से तौबा करो। अगर तुम ऐसा करोगे, तो वह तुम पर आसमान से लगातार और खूब बारिश भेजेगा, जिससे तुम्हारी ज़मीनें हरी-भरी होंगी और ख़ैरात बढ़ेंगी। साथ ही, वह तुम्हारी मौजूदा ताक़त में और इज़ाफ़ा करेगा—चाहे वह ताक़त औलाद की हो, माल की हो, या जिस्मानी और इज़्ज़त की हो। यानी तुम्हें और ज़्यादा क़ुव्वत, औलाद और बरकत देगा। लेकिन ध्यान रखो, उस दावत से मुँह मत मोड़ो जिसकी तरफ़ मैं तुम्हें बुला रहा हूँ, और अपने कुफ़्र और जुर्म पर अड़े मत रहो। अगर तुम ऐसा करोगे, तो तुम अपराधी और गुनाहगार ठहरोगे, और उसका अंजाम बहुत बुरा होगा।
फ़ायदे (उपदेश):
इस्तिग़फ़ार और तौबा की बरकत: यह आयत सिखाती है कि गुनाहों से तौबा करना और अल्लाह से माफ़ी माँगना सिर्फ आख़िरत की कामयाबी का ज़रिया नहीं, बल्कि दुनिया में भी रिज़्क़, बारिश, औलाद और ताक़त में बरकत का सबब बनता है। अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों के दरवाज़े खोल देता है।
तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला है: चाहे इंसान कितना ही बड़ा गुनाहगार क्यों न हो, अल्लाह उसे बुला रहा है कि वह पलट आए। यह अल्लाह की रहमत की वसीअत (विशालता) को दर्शाता है।
ईमान और ताक़त का रिश्ता: यह आयत बताती है कि असली ताक़त और इज़्ज़त अल्लाह की तरफ़ रुजू करने में है। जो लोग अल्लाह से जुड़ते हैं, उन्हें दुनिया में भी क़ुव्वत और सरबुलंदी मिलती है।
गुनाह पर अड़े रहना हलाकत का सबब: जो लोग नबी की दावत से मुँह मोड़ते हैं और अपने जुर्म पर ज़िद करते हैं, वह अपना ही नुक़्सान करते हैं। यह आयत हमें आगाह करती है कि हम अपनी ज़िद और हठधर्मी से बचें।
अल्लाह की रहमत की पेशकश: यह आयत हर उस इंसान के लिए उम्मीद की किरण है जो महसूस करता है कि उसकी ज़िंदगी में तंगी या मुश्किलें हैं। हल यही है कि वह अल्लाह की तरफ़ लौटे, तो सारे बंद दरवाज़े खुल जाएँगे।
और (हमने) क़ौमे आद के पास उनके भाई हूद को (पैग़म्बर बनाकर भेजा और) उन्होनें अपनी क़ौम से कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा ही की परसतिश करों उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं तुम बस निरे इफ़तेरा परदाज़ (झूठी बात बनाने वाले) हो
और ऐ मेरी क़ौम अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में अपने (गुनाहों से) तौबा करो तो वह तुम पर मूसलाधार मेह आसमान से बरसाएगा ख़ुश्क साली न होगी और तुम्हारी क़ूवत (ताक़त) में और क़ूवत बढ़ा देगा और मुजरिम बन कर उससे मुँह न मोड़ों
हम तो बस ये कहते हैं कि हमारे ख़ुदाओं में से किसने तुम्हें मजनून (दीवाना) बना दिया है (इसी वजह से तुम) बहकी बहकी बातें करते हो हूद ने जवाब दिया बेशक मै ख़ुदा को गवाह करता हूँ और तुम भी गवाह रहो कि तुम ख़ुदा के सिवा (दूसरों को) उसका शरीक बनाते हो
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