हूद · 52/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَيَا قَوْمِ اسْتَغْفِرُوا رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوبُوا إِلَيْهِ يُرْسِلِ السَّمَاءَ عَلَيْكُم مِّدْرَارًا وَيَزِدْكُمْ قُوَّةً إِلَىٰ قُوَّتِكُمْ وَلَا تَتَوَلَّوْا مُجْرِمِينَ ۝٥٢
Wa yaa qawmis taghfiroo Rabbakum summa toobooo ilaihi yursilis samaaa`a `alaikum midraaranw wa yazidkum quwwatan ilaa quwwatikum wa laa tatawallaw mujrimeen
📖 हिंदी अर्थ
और ऐ मेरी क़ौम अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में अपने (गुनाहों से) तौबा करो तो वह तुम पर मूसलाधार मेह आसमान से बरसाएगा ख़ुश्क साली न होगी और तुम्हारी क़ूवत (ताक़त) में और क़ूवत बढ़ा देगा और मुजरिम बन कर उससे मुँह न मोड़ों
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • استغفروا: अपने पालनहार से क्षमा माँगो।
  • توبوا: पश्चाताप करो और उसकी ओर लौटो।
  • مدراراً: लगातार और प्रचुर मात्रा में बरसने वाला (मूसलाधार वर्षा)।
  • قوة إلى قوتكم: तुम्हारी मौजूदा ताकत के साथ और अधिक ताकत बढ़ा देना।
  • تتولوا: मुँह मोड़ो, विमुख हो जाओ।
  • مجرمين: अपराधी बनकर, पाप में डूबे हुए।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ मेरी क़ौम के लोगो! अपने रब से अपने पिछले गुनाहों की माफ़ी माँगो, और उस पर ईमान लाओ। फिर उसकी ओर सच्चे दिल से पलटो—अपने शिर्क (बुत-परस्ती) और गुनाहों से तौबा करो। अगर तुम ऐसा करोगे, तो वह तुम पर आसमान से लगातार और खूब बारिश भेजेगा, जिससे तुम्हारी ज़मीनें हरी-भरी होंगी और ख़ैरात बढ़ेंगी। साथ ही, वह तुम्हारी मौजूदा ताक़त में और इज़ाफ़ा करेगा—चाहे वह ताक़त औलाद की हो, माल की हो, या जिस्मानी और इज़्ज़त की हो। यानी तुम्हें और ज़्यादा क़ुव्वत, औलाद और बरकत देगा। लेकिन ध्यान रखो, उस दावत से मुँह मत मोड़ो जिसकी तरफ़ मैं तुम्हें बुला रहा हूँ, और अपने कुफ़्र और जुर्म पर अड़े मत रहो। अगर तुम ऐसा करोगे, तो तुम अपराधी और गुनाहगार ठहरोगे, और उसका अंजाम बहुत बुरा होगा।


फ़ायदे (उपदेश):

  1. इस्तिग़फ़ार और तौबा की बरकत: यह आयत सिखाती है कि गुनाहों से तौबा करना और अल्लाह से माफ़ी माँगना सिर्फ आख़िरत की कामयाबी का ज़रिया नहीं, बल्कि दुनिया में भी रिज़्क़, बारिश, औलाद और ताक़त में बरकत का सबब बनता है। अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों के दरवाज़े खोल देता है।
  2. तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला है: चाहे इंसान कितना ही बड़ा गुनाहगार क्यों न हो, अल्लाह उसे बुला रहा है कि वह पलट आए। यह अल्लाह की रहमत की वसीअत (विशालता) को दर्शाता है।
  3. ईमान और ताक़त का रिश्ता: यह आयत बताती है कि असली ताक़त और इज़्ज़त अल्लाह की तरफ़ रुजू करने में है। जो लोग अल्लाह से जुड़ते हैं, उन्हें दुनिया में भी क़ुव्वत और सरबुलंदी मिलती है।
  4. गुनाह पर अड़े रहना हलाकत का सबब: जो लोग नबी की दावत से मुँह मोड़ते हैं और अपने जुर्म पर ज़िद करते हैं, वह अपना ही नुक़्सान करते हैं। यह आयत हमें आगाह करती है कि हम अपनी ज़िद और हठधर्मी से बचें।
  5. अल्लाह की रहमत की पेशकश: यह आयत हर उस इंसान के लिए उम्मीद की किरण है जो महसूस करता है कि उसकी ज़िंदगी में तंगी या मुश्किलें हैं। हल यही है कि वह अल्लाह की तरफ़ लौटे, तो सारे बंद दरवाज़े खुल जाएँगे।
🎧 सुनें

📜 आयत 50-54 — हूद

50وَإِلَىٰ عَادٍ أَخَاهُمْ هُودًا ۚ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا مُفْتَرُونَ
और (हमने) क़ौमे आद के पास उनके भाई हूद को (पैग़म्बर बनाकर भेजा और) उन्होनें अपनी क़ौम से कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा ही की परसतिश करों उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं तुम बस निरे इफ़तेरा परदाज़ (झूठी बात बनाने वाले) हो
51يَا قَوْمِ لَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْرًا ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَى الَّذِي فَطَرَنِي ۚ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
ऐ मेरी क़ौम मै उस (समझाने पर तुमसे कुछ मज़दूरी नहीं मॉगता मेरी मज़दूरी तो बस उस शख़्श के ज़िम्मे है जिसने मुझे पैदा किया तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते
52وَيَا قَوْمِ اسْتَغْفِرُوا رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوبُوا إِلَيْهِ يُرْسِلِ السَّمَاءَ عَلَيْكُم مِّدْرَارًا وَيَزِدْكُمْ قُوَّةً إِلَىٰ قُوَّتِكُمْ وَلَا تَتَوَلَّوْا مُجْرِمِينَ
और ऐ मेरी क़ौम अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में अपने (गुनाहों से) तौबा करो तो वह तुम पर मूसलाधार मेह आसमान से बरसाएगा ख़ुश्क साली न होगी और तुम्हारी क़ूवत (ताक़त) में और क़ूवत बढ़ा देगा और मुजरिम बन कर उससे मुँह न मोड़ों
53قَالُوا يَا هُودُ مَا جِئْتَنَا بِبَيِّنَةٍ وَمَا نَحْنُ بِتَارِكِي آلِهَتِنَا عَن قَوْلِكَ وَمَا نَحْنُ لَكَ بِمُؤْمِنِينَ
वह लोग कहने लगे ऐ हूद तुम हमारे पास कोई दलील लेकर तो आए नहीं और तुम्हारे कहने से अपने ख़ुदाओं को तो छोड़ने वाले नहीं और न हम तुम पर ईमान लाने वाले हैं
54إِن نَّقُولُ إِلَّا اعْتَرَاكَ بَعْضُ آلِهَتِنَا بِسُوءٍ ۗ قَالَ إِنِّي أُشْهِدُ اللَّهَ وَاشْهَدُوا أَنِّي بَرِيءٌ مِّمَّا تُشْرِكُونَ
हम तो बस ये कहते हैं कि हमारे ख़ुदाओं में से किसने तुम्हें मजनून (दीवाना) बना दिया है (इसी वजह से तुम) बहकी बहकी बातें करते हो हूद ने जवाब दिया बेशक मै ख़ुदा को गवाह करता हूँ और तुम भी गवाह रहो कि तुम ख़ुदा के सिवा (दूसरों को) उसका शरीक बनाते हो
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीRevelation
52आयत

अनुवाद — हूद 52

सूरा हूद आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ऐ मेरी क़ौम अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ…

सूरा आयत 52/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए