हूद · 51/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
يَا قَوْمِ لَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْرًا ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَى الَّذِي فَطَرَنِي ۚ أَفَلَا تَعْقِلُونَ ۝٥١
Yaa qawmi laaa as`alukum `alaihi ajran in ajriya illaa `alal lazee fataranee; afalaa ta`qiloon
📖 हिंदी अर्थ
ऐ मेरी क़ौम मै उस (समझाने पर तुमसे कुछ मज़दूरी नहीं मॉगता मेरी मज़दूरी तो बस उस शख़्श के ज़िम्मे है जिसने मुझे पैदा किया तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَطَرَنِي: मुझे पैदा किया।
  • أَجْرًا: बदला, पारिश्रमिक।
  • تَعْقِلُونَ: समझते हो, विवेक से काम लेते हो।

व्याख्या:

हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम 'आद' को सम्बोधित करते हुए कहते हैं: "ऐ मेरी क़ौम! मैं तुमसे इस बुलावे और नसीहत के बदले कोई मेहनताना या इनाम नहीं माँगता। मेरा अज्र और सवाब सिर्फ़ उस अल्लाह के ज़िम्मे है जिसने मुझे पैदा किया। मैं तुमसे किसी दुनियावी फ़ायदे की ख़्वाहिश नहीं रखता, बल्कि मेरा मक़सद सिर्फ़ तुम्हारी भलाई और तुम्हें सीधे रास्ते पर लाना है। क्या तुम इतना भी नहीं समझते कि जो व्यक्ति बिना किसी दुनियावी मुआवज़े के तुम्हारी हिदायत के लिए आया है, वह सच्चा और नेक इरादा रखने वाला है? क्या तुम अपनी अक़्ल से काम लेकर सच और झूठ में फ़र्क़ नहीं कर सकते?"

यहाँ हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि उनकी दावत ख़ालिस अल्लाह के लिए है, न कि किसी सांसारिक लाभ के लिए। वे अपनी क़ौम को यह बताना चाहते हैं कि उनका रिश्ता सिर्फ़ अल्लाह से है, और उन्हें उसी से अज्र की उम्मीद है, जो सबसे बड़ा रज़्ज़ाक़ और ख़ालिक़ है।

फ़ायदे:

  1. दावत और नसीहत का काम बिल्कुल निःस्वार्थ होना चाहिए। दावत देने वाले को दुनियावी माल या रुत्बे की तमन्ना नहीं रखनी चाहिए।
  2. एक सच्चा दावत देने वाला अपनी मेहनत का अज्र सिर्फ़ अल्लाह से उम्मीद रखता है, जो सबसे बड़ा इनाम देने वाला है।
  3. अक़्ल और विवेक का इस्तेमाल करके इंसान सच और झूठ में फ़र्क़ कर सकता है। जो व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ के भलाई की तरफ़ बुलाता है, वह सच्चा होता है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि दुनियावी फ़ायदे की लालच से पाक होकर अल्लाह के दीन की ख़िदमत करनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही सबसे अच्छा बदला देने वाला है।
🎧 सुनें

📜 आयत 49-53 — हूद

49تِلْكَ مِنْ أَنبَاءِ الْغَيْبِ نُوحِيهَا إِلَيْكَ ۖ مَا كُنتَ تَعْلَمُهَا أَنتَ وَلَا قَوْمُكَ مِن قَبْلِ هَٰذَا ۖ فَاصْبِرْ ۖ إِنَّ الْعَاقِبَةَ لِلْمُتَّقِينَ
(ऐ रसूल) ये ग़ैब की चन्द ख़बरे हैं जिनको तुम्हारी तरफ वही के ज़रिए पहुँचाते हैं जो उसके क़ब्ल न तुम जानते थे और न तुम्हारी क़ौम ही (जानती थी) तो तुम सब्र करो इसमें शक़ नहीं कि आख़िारत (की खूबियाँ) परहेज़गारों ही के वास्ते हैं
50وَإِلَىٰ عَادٍ أَخَاهُمْ هُودًا ۚ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا مُفْتَرُونَ
और (हमने) क़ौमे आद के पास उनके भाई हूद को (पैग़म्बर बनाकर भेजा और) उन्होनें अपनी क़ौम से कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा ही की परसतिश करों उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं तुम बस निरे इफ़तेरा परदाज़ (झूठी बात बनाने वाले) हो
51يَا قَوْمِ لَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْرًا ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَى الَّذِي فَطَرَنِي ۚ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
ऐ मेरी क़ौम मै उस (समझाने पर तुमसे कुछ मज़दूरी नहीं मॉगता मेरी मज़दूरी तो बस उस शख़्श के ज़िम्मे है जिसने मुझे पैदा किया तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते
52وَيَا قَوْمِ اسْتَغْفِرُوا رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوبُوا إِلَيْهِ يُرْسِلِ السَّمَاءَ عَلَيْكُم مِّدْرَارًا وَيَزِدْكُمْ قُوَّةً إِلَىٰ قُوَّتِكُمْ وَلَا تَتَوَلَّوْا مُجْرِمِينَ
और ऐ मेरी क़ौम अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में अपने (गुनाहों से) तौबा करो तो वह तुम पर मूसलाधार मेह आसमान से बरसाएगा ख़ुश्क साली न होगी और तुम्हारी क़ूवत (ताक़त) में और क़ूवत बढ़ा देगा और मुजरिम बन कर उससे मुँह न मोड़ों
53قَالُوا يَا هُودُ مَا جِئْتَنَا بِبَيِّنَةٍ وَمَا نَحْنُ بِتَارِكِي آلِهَتِنَا عَن قَوْلِكَ وَمَا نَحْنُ لَكَ بِمُؤْمِنِينَ
वह लोग कहने लगे ऐ हूद तुम हमारे पास कोई दलील लेकर तो आए नहीं और तुम्हारे कहने से अपने ख़ुदाओं को तो छोड़ने वाले नहीं और न हम तुम पर ईमान लाने वाले हैं
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अनुवाद — हूद 51

सूरा हूद आयत 51 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ मेरी क़ौम मै उस (समझाने पर तुमसे कुछ मज़दूरी…

सूरा आयत 51/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 49–53. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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