Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بِبَيِّنَةٍ: स्पष्ट प्रमाण, कोई ऐसा चमत्कार या दलील जो आपके दावे की सच्चाई को साबित करे।
- آلِهَتِنَا: हमारे पूज्य, हमारे देवता (जिन्हें वे पूजते थे)।
- عَن قَوْلِكَ: आपके कहने की वजह से, आपके कहे जाने मात्र से।
- بِمُؤْمِنِينَ: आप पर ईमान लाने वाले, आपको सच्चा मानने वाले।
तफसीर (व्याख्या):
जब हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम 'आद' को एक ईश्वर की इबादत की ओर बुलाया और उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराया, तो उनकी क़ौम ने जवाब में ये कठोर शब्द कहे। उन्होंने कहा: "ऐ हूद! तुम हमारे पास कोई स्पष्ट निशानी या चमत्कार लेकर नहीं आए जो ये साबित करे कि तुम सच में अल्लाह के पैग़म्बर हो। और हम तुम्हारे सिर्फ़ कहने से अपने उन देवताओं को नहीं छोड़ सकते जिन्हें हम पूजते आ रहे हैं। और न ही हम तुम पर ईमान लाने वाले हैं।"
यानी उन्होंने तीन बातें कहीं: पहली, उन्होंने हूद (अलैहिस्सलाम) पर ये इल्ज़ाम लगाया कि वो कोई चमत्कार या ठोस सबूत नहीं लाए। दूसरी, उन्होंने साफ़ कहा कि हम अपने पूर्वजों के धर्म और अपने देवताओं को नहीं छोड़ेंगे, चाहे तुम कितना भी कहो। तीसरी, उन्होंने खुले तौर पर ईमान लाने से इनकार कर दिया। ये उनकी हठधर्मिता और अहंकार का सबूत था कि उन्होंने सच्चाई को जानने की कोशिश ही नहीं की, बल्कि पहले से ही इनकार का फ़ैसला कर लिया था। उनका ये रवैया अल्लाह की नेमतों से नाइंशुक्री और अपने पैग़म्बर के प्रति सख़्त अदब-ए-मुख़ालिफ़त (बदतमीज़ी) पर आधारित था।
फ़ायदे (सबक):
- सबूत की ज़िम्मेदारी: पैग़म्बरों की सच्चाई के लिए अल्लाह की तरफ़ से निशानियाँ और चमत्कार होते हैं, लेकिन जिन लोगों का मक़सद सच्चाई को न मानना होता है, वो कितने ही सबूत देख लें, फिर भी इनकार करते रहते हैं। इससे हमें सीख मिलती है कि हमारा दिल सच्चाई के लिए खुला होना चाहिए।
- अंधी परंपरा का ख़तरा: अपने पूर्वजों के रास्ते पर आँखें बंद करके चलना और सच्चाई को ठुकरा देना, इंसान को हलाकत की तरफ़ ले जाता है। हमें हमेशा सच्चाई को क़बूल करने के लिए तैयार रहना चाहिए, चाहे वो किसी भी तरफ़ से आए।
- नबी की सब्र और हिम्मत: हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम की इस सख़्त गुफ़्तगू के बावजूद उन्हें दावत देते रहे। ये हमें सिखाता है कि सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों को मुख़ालिफ़त और तंज़ का सामना करना पड़ता है, लेकिन हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।
- ईमान की अहमियत: ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का दावा नहीं, बल्कि दिल का यक़ीन और अमल की पाबंदी है। जो लोग सच्चाई को सुनकर भी उस पर अमल नहीं करते, वो उन्हीं लोगों की तरह हैं जिन्होंने हूद (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया और आख़िरकार अल्लाह के अज़ाब का शिकार हुए।
📜 आयत 51-55 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 53
सूरा हूद आयत 53 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग कहने लगे ऐ हूद तुम हमारे पास कोई…सूरा आयत 53/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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