Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- غَاشِيَةٌ: ऐसी आपदा जो सब कुछ ढक ले, छा जाए।
- بَغْتَةً: अचानक, बिना किसी पूर्व सूचना के।
- لَا يَشْعُرُونَ: उन्हें इसका एहसास भी न हो, उन्हें इसकी भनक तक न लगे।
तफ़सीर (व्याख्या):
क्या इन मुशरिकों (बहुदेववादियों) ने अपने आपको इस बात से बिल्कुल निडर और सुरक्षित समझ लिया है कि उन पर अल्लाह का कोई ऐसा अज़ाब (यातना) आकर छा जाए जो उन्हें पूरी तरह से अपनी चपेट में ले ले और उनके पास उसे टालने की कोई ताक़त न हो? या फिर क़यामत (प्रलय) का दिन उन पर अचानक आ जाए, जबकि उन्हें इसका ज़रा भी एहसास न हो और वे इसके लिए कोई तैयारी न कर सकें? यह उनकी बड़ी भूल और भारी ग़फ़लत है कि वे अल्लाह की पकड़ से बेख़ौफ़ हो गए हैं। अल्लाह की यातना कभी बिजली के कड़कने, ज़लज़ले, तूफ़ान या किसी और रूप में अचानक आ सकती है, और क़यामत का दिन भी उन्हें उसी तरह अचानक आ घेरेगा, जबकि वे दुनिया के कामों में मशग़ूल होंगे और उन्हें इसका कोई शऊर (अहसास) तक न होगा। उनका यह अम्न (निडरता) महज़ एक धोखा है, क्योंकि अल्लाह का अज़ाब किसी को इस तरह नहीं छोड़ता।
फ़ायदे (सबक):
- मोमिन (आस्तिक) को हमेशा अल्लाह के अज़ाब से डरते रहना चाहिए और उसकी पकड़ से बेख़ौफ़ नहीं होना चाहिए। यह डर इंसान को गुनाहों से बचाता है और नेक कामों की तरफ़ रग़बत (प्रेरणा) देता है।
- क़यामत का दिन निश्चित रूप से आने वाला है, लेकिन उसका समय किसी को मालूम नहीं। इसलिए हर पल उसकी तैयारी में रहना चाहिए, ताकि जब वह आए तो हमें पछताना न पड़े।
- अल्लाह की यातना कभी भी आ सकती है, चाहे इंसान कितना भी ताक़तवर या मालदार क्यों न हो। इसलिए अहंकार और ग़फ़लत में डूबे रहने के बजाय अल्लाह की रहमत और माफ़ी का तलबगार (खोजी) होना चाहिए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की ज़िंदगी पर भरोसा करके आख़िरत (परलोक) को भूल जाना सबसे बड़ी नादानी है। सच्ची कामयाबी उसी को मिलेगी जो दुनिया और आख़िरत दोनों को साथ में संभाले और अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) को अपना निशाना बनाए।
📜 आयत 105-109 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 107
सूरा यूसुफ आयत 107 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या ये लोग इस बात से मुतमइन हो बैठें…सूरा आयत 107/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 105–109. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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