لَا يَشْعُرُونَ: उन्हें इसका एहसास भी न हो, उन्हें इसकी भनक तक न लगे।
तफ़सीर (व्याख्या):
क्या इन मुशरिकों (बहुदेववादियों) ने अपने आपको इस बात से बिल्कुल निडर और सुरक्षित समझ लिया है कि उन पर अल्लाह का कोई ऐसा अज़ाब (यातना) आकर छा जाए जो उन्हें पूरी तरह से अपनी चपेट में ले ले और उनके पास उसे टालने की कोई ताक़त न हो? या फिर क़यामत (प्रलय) का दिन उन पर अचानक आ जाए, जबकि उन्हें इसका ज़रा भी एहसास न हो और वे इसके लिए कोई तैयारी न कर सकें? यह उनकी बड़ी भूल और भारी ग़फ़लत है कि वे अल्लाह की पकड़ से बेख़ौफ़ हो गए हैं। अल्लाह की यातना कभी बिजली के कड़कने, ज़लज़ले, तूफ़ान या किसी और रूप में अचानक आ सकती है, और क़यामत का दिन भी उन्हें उसी तरह अचानक आ घेरेगा, जबकि वे दुनिया के कामों में मशग़ूल होंगे और उन्हें इसका कोई शऊर (अहसास) तक न होगा। उनका यह अम्न (निडरता) महज़ एक धोखा है, क्योंकि अल्लाह का अज़ाब किसी को इस तरह नहीं छोड़ता।
फ़ायदे (सबक):
मोमिन (आस्तिक) को हमेशा अल्लाह के अज़ाब से डरते रहना चाहिए और उसकी पकड़ से बेख़ौफ़ नहीं होना चाहिए। यह डर इंसान को गुनाहों से बचाता है और नेक कामों की तरफ़ रग़बत (प्रेरणा) देता है।
क़यामत का दिन निश्चित रूप से आने वाला है, लेकिन उसका समय किसी को मालूम नहीं। इसलिए हर पल उसकी तैयारी में रहना चाहिए, ताकि जब वह आए तो हमें पछताना न पड़े।
अल्लाह की यातना कभी भी आ सकती है, चाहे इंसान कितना भी ताक़तवर या मालदार क्यों न हो। इसलिए अहंकार और ग़फ़लत में डूबे रहने के बजाय अल्लाह की रहमत और माफ़ी का तलबगार (खोजी) होना चाहिए।
यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की ज़िंदगी पर भरोसा करके आख़िरत (परलोक) को भूल जाना सबसे बड़ी नादानी है। सच्ची कामयाबी उसी को मिलेगी जो दुनिया और आख़िरत दोनों को साथ में संभाले और अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) को अपना निशाना बनाए।
(ऐ रसूल) उन से कह दो कि मेरा तरीका तो ये है कि मै (लोगों) को ख़ुदा की तरफ बुलाता हूँ मैं और मेरा पैरव (पीछे चलने वाले) (दोनों) मज़बूत दलील पर हैं और ख़ुदा (हर ऐब व नुक़स से) पाक व पाकीज़ा है और मै मुशरेकीन से नहीं हूँ
और (ऐ रसूल) तुमसे पहले भी हम गाँव ही के रहने वाले कुछ मर्दों को (पैग़म्बर बनाकर) भेजा किए है कि हम उन पर वही नाज़िल करते थे तो क्या ये लोग रुए ज़मीन पर चले फिरे नहीं कि ग़ौर करते कि जो लोग उनसे पहले हो गुज़रे हैं उनका अन्जाम क्या हुआ और जिन लोगों ने परहेज़गारी एख्तेयार की उनके लिए आख़िरत का घर (दुनिया से) यक़ीनन कहीं ज्यादा बेहतर है क्या ये लोग नहीं समझते
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।