Qul haazihee sabeeleee ad`ooo ilal laah; `alaa baseera tin ana wa manit taba`anee wa Subhaanal laahi wa maaa ana minal mushrikeen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) उन से कह दो कि मेरा तरीका तो ये है कि मै (लोगों) को ख़ुदा की तरफ बुलाता हूँ मैं और मेरा पैरव (पीछे चलने वाले) (दोनों) मज़बूत दलील पर हैं और ख़ुदा (हर ऐब व नुक़स से) पाक व पाकीज़ा है और मै मुशरेकीन से नहीं हूँ
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کہہ دو میرا رستہ تو یہ ہے میں خدا کی طرف بلاتا ہوں (از روئے یقین وبرہان) سمجھ بوجھ کر میں بھی (لوگوں کو خدا کی طرف بلاتا ہوں) اور میرے پیرو بھی۔ اور خدا پاک ہے۔ اور میں شرک کرنے والوں میں سے نہیں ہوں
(ऐ रसूल) उन से कह दो कि मेरा तरीका तो ये है कि मै (लोगों) को ख़ुदा की तरफ बुलाता हूँ मैं और मेरा पैरव (पीछे चलने वाले) (दोनों) मज़बूत दलील पर हैं और ख़ुदा (हर ऐब व नुक़स से) पाक व पाकीज़ा है और मै मुशरेकीन से नहीं हूँ
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
سَبِيلِي: मेरा मार्ग, मेरी राह।
بَصِيرَةٍ: स्पष्ट प्रमाण, दृढ़ विश्वास, ज्ञान और यक़ीन पर आधारित दृष्टि।
وَمَنِ اتَّبَعَنِي: और जिन्होंने मेरा अनुसरण किया (मेरे अनुयायी)।
سُبْحَانَ اللَّهِ: अल्लाह पाक है, वह हर कमी और दोष से मुक्त है।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप उन लोगों से कह दीजिए जो आपको झुठला रहे हैं और जो आपके मार्ग के बारे में संदेह में हैं: "यह मेरा मार्ग है, मेरी राह है। मैं लोगों को अल्लाह की ओर बुलाता हूँ—उसकी एकता और उसकी इबादत की ओर। यह बुलावा किसी अंधी परंपरा या मनगढ़ंत बात पर आधारित नहीं है, बल्कि स्पष्ट ज्ञान, दृढ़ विश्वास और ठोस प्रमाण पर टिका हुआ है। मैं स्वयं इस मार्ग पर चलता हूँ और जो लोग मेरा अनुसरण करते हैं, वे भी इसी ज्ञान और यक़ीन के साथ लोगों को अल्लाह की ओर बुलाते हैं।"
"मैं अल्लाह को हर उस चीज़ से पाक और मुक्त घोषित करता हूँ जो उसके साथ जोड़ी जाती है—चाहे वह मूर्तियाँ हों, सितारे हों या कोई और। मैं उन लोगों में से नहीं हूँ जो अल्लाह के साथ किसी को साझीदार ठहराते हैं। मेरा विश्वास पूर्ण एकेश्वरवाद (तौहीद) पर है, और मैं शिर्क से पूरी तरह मुक्त हूँ।"
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
दावत का सही तरीक़ा: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ओर बुलाने का काम ज्ञान और स्पष्ट प्रमाण के साथ होना चाहिए, न कि अज्ञानता और अंधी नक़ल के साथ। एक दाई (बुलाने वाला) को चाहिए कि वह जो कहे उसे ख़ुद समझे और उस पर यक़ीन रखे।
अनुयायियों की ज़िम्मेदारी: यह आयत सिर्फ़ नबी ﷺ तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो नबी ﷺ का अनुसरण करता है। हर मुसलमान को अपनी हैसियत और ज्ञान के अनुसार अल्लाह की ओर बुलाने का काम करना चाहिए।
शिर्क से बराअत (मुक्ति): यह आयत हमें सिखाती है कि एक सच्चे मुसलमान का विश्वास पूरी तरह से शिर्क से पाक होना चाहिए। अल्लाह को हर उस चीज़ से पाक मानना चाहिए जो उसके लिए उचित नहीं है।
इस्लाम की स्पष्टता: इस्लाम एक स्पष्ट और प्रमाण-आधारित धर्म है। इसमें कोई रहस्यवाद या अंधी आस्था नहीं है, बल्कि हर बात तर्क और ज्ञान पर आधारित है। यही इसकी सच्चाई की निशानी है।
आत्मविश्वास और साहस: नबी ﷺ ने बड़े आत्मविश्वास के साथ अपने मार्ग की घोषणा की। यह हमें सिखाता है कि सच्चाई पर होने का विश्वास हो तो उसे बेझिझक और साहस के साथ पेश करना चाहिए, चाहे लोग कितना भी विरोध करें।
(ऐ रसूल) उन से कह दो कि मेरा तरीका तो ये है कि मै (लोगों) को ख़ुदा की तरफ बुलाता हूँ मैं और मेरा पैरव (पीछे चलने वाले) (दोनों) मज़बूत दलील पर हैं और ख़ुदा (हर ऐब व नुक़स से) पाक व पाकीज़ा है और मै मुशरेकीन से नहीं हूँ
और (ऐ रसूल) तुमसे पहले भी हम गाँव ही के रहने वाले कुछ मर्दों को (पैग़म्बर बनाकर) भेजा किए है कि हम उन पर वही नाज़िल करते थे तो क्या ये लोग रुए ज़मीन पर चले फिरे नहीं कि ग़ौर करते कि जो लोग उनसे पहले हो गुज़रे हैं उनका अन्जाम क्या हुआ और जिन लोगों ने परहेज़गारी एख्तेयार की उनके लिए आख़िरत का घर (दुनिया से) यक़ीनन कहीं ज्यादा बेहतर है क्या ये लोग नहीं समझते
पहले के पैग़म्बरो ने तबलीग़े रिसालत यहाँ वक कि जब (क़ौम के ईमान लाने से) पैग़म्बर मायूस हो गए और उन लोगों ने समझ लिया कि वह झुठलाए गए तो उनके पास हमारी (ख़ास) मदद आ पहुँची तो जिसे हमने चाहा नजात दी और हमारा अज़ाब गुनेहगार लोगों के सर से तो टाला नहीं जाता
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।