Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُؤْمِنُ: ईमान लाना, स्वीकार करना, मानना।
- أَكْثَرُهُمْ: उनमें से अधिकतर लोग।
- مُشْرِكُونَ: शिर्क करने वाले, अल्लाह के साथ दूसरों को साझीदार ठहराने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों की हालत बयान करती है जो अल्लाह को तो मानते हैं कि वही उनका रब और रिज़्क़ देने वाला है, लेकिन साथ ही वे उसके साथ दूसरों की इबादत भी करते हैं। अधिकतर लोग अल्लाह पर ईमान तो रखते हैं, लेकिन उनका ईमान खालिस और पूर्ण नहीं होता। वे यह मानते हुए कि अल्लाह ही सृष्टिकर्ता और प्रदाता है, फिर भी मूर्तियों और देवताओं की पूजा करते हैं, और उन्हें अल्लाह का साझीदार ठहराते हैं। कुछ लोग तो यहाँ तक दावा करते हैं कि अल्लाह की कोई संतान है — यह उसकी पवित्रता के खिलाफ है। यह ईमान और शिर्क का मिश्रण है, जो उनके ईमान को अशुद्ध कर देता है। अल्लाह इन सब बातों से बहुत ऊपर और पाक है।
फ़ायदे (सीख):
- सच्चा ईमान वही है जो पूर्ण रूप से अल्लाह के लिए हो, बिना किसी साझीदार के। ईमान के साथ शिर्क का मिश्रण उसे बेकार कर देता है।
- यह आयत हमें चेतावनी देती है कि केवल अल्लाह को रब मान लेना काफी नहीं, बल्कि उसकी इबादत भी अकेले उसी की होनी चाहिए।
- मुसलमान को चाहिए कि वह अपने ईमान को हर प्रकार के शिर्क से पाक रखे — चाहे वह बड़ा शिर्क हो या छोटा, जैसे रिया (दिखावा) या किसी और पर भरोसा रखना।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की तौहीद (एकता) ही सच्ची नजात का रास्ता है, और यही वह पैगाम है जो सभी नबियों ने दिया।
- हमें अपने ईमान की जाँच करते रहना चाहिए कि कहीं हमारे अंदर भी ऐसा मिश्रण तो नहीं जो हमारे ईमान को कमजोर कर रहा है।
📜 आयत 104-108 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 106
सूरा यूसुफ आयत 106 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अक्सर लोगों की ये हालत है कि वह ख़ुदा…सूरा आयत 106/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 104–108. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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