यूसुफ · 44/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूसुफ
قَالُوا أَضْغَاثُ أَحْلَامٍ ۖ وَمَا نَحْنُ بِتَأْوِيلِ الْأَحْلَامِ بِعَالِمِينَ ۝٤٤
Qaalooo adghaasu ahlaa minw wa maa nahnu bitaaweelil ahlaami bi`aalimeen
📖 हिंदी अर्थ
उन लोगों ने अर्ज़ की कि ये तो (कुछ) ख्वाब परेशॉ (सा) है और हम लोग ऐसे ख्वाब (परेशॉ) की ताबीर तो नहीं जानते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَضْغَاثُ أَحْلَامٍ: सपनों का मिला-जुला समूह, अर्थात् ऐसे सपने जो आपस में गड्ड-मड्ड हों और जिनका कोई स्पष्ट अर्थ न निकले। "ضِغْث" का अर्थ है घास या पौधों का गट्ठर, और "أَحْلَام" सपनों को कहते हैं।
  • بِتَأْوِيلِ: ताबीर (अर्थ निकालने) के बारे में।
  • بِعَالِمِينَ: जानने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब राजा ने अपने दरबारियों और पंडितों को अपना सपना बताया—जिसमें सात मोटी गायें थीं जिन्हें सात दुबली गायें खा रही थीं, और सात हरी बालियाँ तथा सात सूखी बालियाँ थीं—तो उन्होंने कहा: "यह तो सपनों का एक मिला-जुला और उलझा हुआ समूह है, जिसका कोई ठोस अर्थ नहीं है। यह कोई सच्चा और स्पष्ट सपना नहीं है जिसकी ताबीर की जा सके। और हम ऐसे मिले-जुले और भ्रामक सपनों का अर्थ निकालने का ज्ञान नहीं रखते।" उन्होंने अपनी असमर्थता और अज्ञानता का इज़हार किया, क्योंकि इस प्रकार के सपने न तो स्पष्ट होते हैं और न ही उनकी कोई निश्चित व्याख्या होती है। यह उत्तर उनकी निरुत्तरता और ज्ञान की कमी को दर्शाता है, क्योंकि वे सपने की ताबीर के उस्ताद नहीं थे।

फ़ायदे (सीख):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि ज्ञान की कमी को स्वीकार करना कोई शर्म की बात नहीं है। जब किसी चीज़ का ज्ञान न हो, तो स्पष्ट रूप से कह देना चाहिए कि हमें नहीं मालूम, बजाय इसके कि मनमानी बात कही जाए।
  2. सपनों की ताबीर एक विशेष ज्ञान है, जो अल्लाह किसी को देता है। यह सामान्य ज्ञान नहीं है, बल्कि अल्लाह की ओर से विशेष देन है, जैसा कि यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को दी गई थी।
  3. इससे पता चलता है कि सच्चे ज्ञानी और विद्वान वही हैं जो अल्लाह की दी हुई समझ और ज्ञान से काम लें, और जो बात न आती हो उसे अल्लाह के नबियों और उनके वारिसों (विद्वानों) से पूछें।
  4. यह आयत यह भी बताती है कि मुसीबत और उलझन के समय अल्लाह के नेक बंदों की ओर रुख करना चाहिए, क्योंकि अल्लाह उन्हें ऐसे मामलों में हल निकालने की तौफ़ीक़ देता है, जैसा कि आगे की आयतों में यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने सपने की सही ताबीर बताई।


📜 आयत 42-46 — सूरा यूसुफ

42وَقَالَ لِلَّذِي ظَنَّ أَنَّهُ نَاجٍ مِّنْهُمَا اذْكُرْنِي عِندَ رَبِّكَ فَأَنسَاهُ الشَّيْطَانُ ذِكْرَ رَبِّهِ فَلَبِثَ فِي السِّجْنِ بِضْعَ سِنِينَ
और उन दोनों में से जिसकी निस्बत यूसुफ ने समझा था वह रिहा हो जाएगा उससे कहा कि अपने मालिक के पास मेरा भी तज़किरा करना (कि मैं बेजुर्म क़ैद हूँ) तो शैतान ने उसे अपने आक़ा से ज़िक्र करना भुला दिया तो यूसुफ क़ैद ख़ाने में कई बरस रहे
43وَقَالَ الْمَلِكُ إِنِّي أَرَىٰ سَبْعَ بَقَرَاتٍ سِمَانٍ يَأْكُلُهُنَّ سَبْعٌ عِجَافٌ وَسَبْعَ سُنبُلَاتٍ خُضْرٍ وَأُخَرَ يَابِسَاتٍ ۖ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ أَفْتُونِي فِي رُؤْيَايَ إِن كُنتُمْ لِلرُّؤْيَا تَعْبُرُونَ
और (इसी असना (बीच) में) बादशाह ने (भी ख्वाब देखा और) कहा मैने देखा है कि सात मोटी ताज़ी गाए हैं उनको सात दुबली पतली गाय खाए जाती हैं और सात ताज़ी सब्ज़ बालियॉ (देखीं) और फिर (सात) सूखी बालियॉ ऐ (मेरे दरबार के) सरदारों अगर तुम लोगों को ख्वाब की ताबीर देनी आती हो तो मेरे (इस) ख्वाब के बारे में हुक्म लगाओ
44قَالُوا أَضْغَاثُ أَحْلَامٍ ۖ وَمَا نَحْنُ بِتَأْوِيلِ الْأَحْلَامِ بِعَالِمِينَ
उन लोगों ने अर्ज़ की कि ये तो (कुछ) ख्वाब परेशॉ (सा) है और हम लोग ऐसे ख्वाब (परेशॉ) की ताबीर तो नहीं जानते हैं
45وَقَالَ الَّذِي نَجَا مِنْهُمَا وَادَّكَرَ بَعْدَ أُمَّةٍ أَنَا أُنَبِّئُكُم بِتَأْوِيلِهِ فَأَرْسِلُونِ
और जिसने उन दोनों में से रिहाई पाई थी (साकी) और उसको एक ज़माने के बाद (यूसुफ का क़िस्सा) याद आया बोल उठा कि मुझे (क़ैद ख़ाने तक) जाने दीजिए तो मैं उसकी ताबीर बताए देता हूँ
46يُوسُفُ أَيُّهَا الصِّدِّيقُ أَفْتِنَا فِي سَبْعِ بَقَرَاتٍ سِمَانٍ يَأْكُلُهُنَّ سَبْعٌ عِجَافٌ وَسَبْعِ سُنبُلَاتٍ خُضْرٍ وَأُخَرَ يَابِسَاتٍ لَّعَلِّي أَرْجِعُ إِلَى النَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَعْلَمُونَ
(ग़रज़ वह गया और यूसुफ से कहने लगा) ऐ यूसुफ ऐ बड़े सच्चे (यूसुफ) ज़रा हमें ये तो बताइए कि सात मोटी ताज़ी गायों को सात पतली गाय खाए जाती है और सात बालियॉ हैं हरी कचवा और फिर (सात) सूखी मुरझाई (इसकी ताबीर क्या है) तो मैं लोगों के पास पलट कर जाऊँ (और बयान करुँ)
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
44आयत

अनुवाद — यूसुफ 44

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Friday, October 2, 2026

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