यूसुफ · 45/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूसुफ
وَقَالَ الَّذِي نَجَا مِنْهُمَا وَادَّكَرَ بَعْدَ أُمَّةٍ أَنَا أُنَبِّئُكُم بِتَأْوِيلِهِ فَأَرْسِلُونِ ۝٤٥
Wa qaalal lazee najaa minhumaa waddakara ba`da ummatin ana unabbi`ukum bitalweelihee fa-arsiloon
📖 हिंदी अर्थ
और जिसने उन दोनों में से रिहाई पाई थी (साकी) और उसको एक ज़माने के बाद (यूसुफ का क़िस्सा) याद आया बोल उठा कि मुझे (क़ैद ख़ाने तक) जाने दीजिए तो मैं उसकी ताबीर बताए देता हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَجَا: बच निकला, छुटकारा पाया।
  • وَادَّكَرَ: याद किया, स्मरण किया (यहाँ इसका अर्थ है कि वह यूसुफ़ अलैहिस्सलाम को याद कर बैठा)।
  • أُمَّةٍ: यहाँ इसका अर्थ है "लंबी अवधि" या "कुछ समय"।
  • أُنَبِّئُكُم: मैं तुम्हें सूचित करता हूँ, बताता हूँ।
  • تَأْوِيلِهِ: इसकी व्याख्या, इसका अर्थ (यहाँ स्वप्न की व्याख्या)।
  • فَأَرْسِلُونِ: मुझे भेज दो (राजा से कहा)।

विस्तृत व्याख्या:

यह वह व्यक्ति था जो यूसुफ़ अलैहिस्सलाम के साथ जेल में था और उन दोनों क़ैदियों में से एक था जिसे (स्वप्न के अनुसार) छुड़ाया गया और वह राजा का पिलाने वाला (साक़ी) बन गया। उसने काफ़ी समय बीत जाने के बाद यूसुफ़ अलैहिस्सलाम को याद किया — वह समय जब वह उनके साथ जेल में था और उनकी स्वप्न व्याख्या की विद्वता देख चुका था। उस समय राजा ने एक अजीब स्वप्न देखा था (सात मोटी गायें जिन्हें सात पतली गायें खा रही थीं, और सात हरी बालियाँ तथा सात सूखी बालियाँ) और सभी दरबारी उसकी व्याख्या से असमंजस में थे। तब यह साक़ी बोला: "मैं तुम्हें इस स्वप्न की व्याख्या बताऊँगा, मुझे यूसुफ़ के पास भेज दो।" उसने यह इसलिए कहा क्योंकि उसे विश्वास था कि यूसुफ़ अलैहिस्सलाम इसका सही अर्थ बता सकते हैं।

यह उसकी ओर से एक प्रकार का पश्चाताप और यूसुफ़ अलैहिस्सलाम की याद थी, क्योंकि वह पहले उनका ज़िक्र भूल चुका था। अब उसने महसूस किया कि यूसुफ़ ही इस समस्या का हल हैं, इसलिए उसने राजा से कहा: "मुझे यूसुफ़ के पास भेजिए, ताकि मैं उनसे इस स्वप्न की व्याख्या पूछकर आपके पास लाऊँ।"


इस आयत से मिलने वाली शिक्षाएँ और लाभ:

  1. विद्या और ज्ञान की महत्ता: यह आयत दिखाती है कि सच्चा ज्ञान और विद्वता — विशेषकर वह जो अल्लाह की ओर से दी गई हो — समाज में सबसे अधिक आवश्यक और सम्मानित होती है। राजा के दरबार में कोई भी स्वप्न की व्याख्या नहीं कर सका, लेकिन यूसुफ़ अलैहिस्सलाम का ज्ञान सबसे ऊपर था।
  2. भूलने के बाद याद करना और सच्चाई की ओर लौटना: साक़ी ने यूसुफ़ को काफ़ी समय तक भुलाए रखा, लेकिन जब ज़रूरत पड़ी तो उसने उन्हें याद किया। यह हमें सिखाता है कि इंसान को चाहिए कि वह सच्चाई और अच्छाई को कभी पूरी तरह न भूलें, और जब भी अवसर मिले, उसकी ओर लौट जाए।
  3. अच्छे लोगों से मदद लेना: जब इंसान किसी मुश्किल में होता है, तो उसे उन लोगों की ओर रुख करना चाहिए जिनके पास दीन और दुनिया का ज्ञान हो। यह विनम्रता और सही रास्ते की पहचान है।
  4. अल्लाह के नबियों की विशेषता: यूसुफ़ अलैहिस्सलाम का जेल में रहते हुए भी ज्ञान और हिकमत का खज़ाना होना दिखाता है कि अल्लाह के प्यारे बंदे किसी भी हालत में अपनी विद्वता और अच्छाई से लोगों की भलाई करते हैं। यह हमें सिखाता है कि मुसीबत में भी हमें अपने ज्ञान और अख़लाक़ का इस्तेमाल करते रहना चाहिए।
  5. स्वप्न की व्याख्या का महत्व: इस आयत से पता चलता है कि स्वप्न की सही व्याख्या एक विशेष ज्ञान है जो अल्लाह अपने चुने हुए बंदों को देता है। यह उनकी नबुव्वत और अल्लाह से निकटता की निशानी है।


📜 आयत 43-47 — सूरा यूसुफ

43وَقَالَ الْمَلِكُ إِنِّي أَرَىٰ سَبْعَ بَقَرَاتٍ سِمَانٍ يَأْكُلُهُنَّ سَبْعٌ عِجَافٌ وَسَبْعَ سُنبُلَاتٍ خُضْرٍ وَأُخَرَ يَابِسَاتٍ ۖ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ أَفْتُونِي فِي رُؤْيَايَ إِن كُنتُمْ لِلرُّؤْيَا تَعْبُرُونَ
और (इसी असना (बीच) में) बादशाह ने (भी ख्वाब देखा और) कहा मैने देखा है कि सात मोटी ताज़ी गाए हैं उनको सात दुबली पतली गाय खाए जाती हैं और सात ताज़ी सब्ज़ बालियॉ (देखीं) और फिर (सात) सूखी बालियॉ ऐ (मेरे दरबार के) सरदारों अगर तुम लोगों को ख्वाब की ताबीर देनी आती हो तो मेरे (इस) ख्वाब के बारे में हुक्म लगाओ
44قَالُوا أَضْغَاثُ أَحْلَامٍ ۖ وَمَا نَحْنُ بِتَأْوِيلِ الْأَحْلَامِ بِعَالِمِينَ
उन लोगों ने अर्ज़ की कि ये तो (कुछ) ख्वाब परेशॉ (सा) है और हम लोग ऐसे ख्वाब (परेशॉ) की ताबीर तो नहीं जानते हैं
45وَقَالَ الَّذِي نَجَا مِنْهُمَا وَادَّكَرَ بَعْدَ أُمَّةٍ أَنَا أُنَبِّئُكُم بِتَأْوِيلِهِ فَأَرْسِلُونِ
और जिसने उन दोनों में से रिहाई पाई थी (साकी) और उसको एक ज़माने के बाद (यूसुफ का क़िस्सा) याद आया बोल उठा कि मुझे (क़ैद ख़ाने तक) जाने दीजिए तो मैं उसकी ताबीर बताए देता हूँ
46يُوسُفُ أَيُّهَا الصِّدِّيقُ أَفْتِنَا فِي سَبْعِ بَقَرَاتٍ سِمَانٍ يَأْكُلُهُنَّ سَبْعٌ عِجَافٌ وَسَبْعِ سُنبُلَاتٍ خُضْرٍ وَأُخَرَ يَابِسَاتٍ لَّعَلِّي أَرْجِعُ إِلَى النَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَعْلَمُونَ
(ग़रज़ वह गया और यूसुफ से कहने लगा) ऐ यूसुफ ऐ बड़े सच्चे (यूसुफ) ज़रा हमें ये तो बताइए कि सात मोटी ताज़ी गायों को सात पतली गाय खाए जाती है और सात बालियॉ हैं हरी कचवा और फिर (सात) सूखी मुरझाई (इसकी ताबीर क्या है) तो मैं लोगों के पास पलट कर जाऊँ (और बयान करुँ)
47قَالَ تَزْرَعُونَ سَبْعَ سِنِينَ دَأَبًا فَمَا حَصَدتُّمْ فَذَرُوهُ فِي سُنبُلِهِ إِلَّا قَلِيلًا مِّمَّا تَأْكُلُونَ
ताकि उनको भी (तुम्हारी क़दर) मालूम हो जाए यूसुफ ने कहा (इसकी ताबीर ये है) कि तुम लोग लगातार सात बरस काश्तकारी करते रहोगे तो जो (फसल) तुम काटो उस (के दाने) को बालियों में रहने देना (छुड़ाना नहीं) मगर थोड़ा (बहुत) जो तुम खुद खाओ
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
45आयत

अनुवाद — यूसुफ 45

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Friday, October 2, 2026

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