अर-राद · 21/43
अनुवाद उच्चारण — अर-राद
وَالَّذِينَ يَصِلُونَ مَا أَمَرَ اللَّهُ بِهِ أَن يُوصَلَ وَيَخْشَوْنَ رَبَّهُمْ وَيَخَافُونَ سُوءَ الْحِسَابِ ۝٢١
Wallazeena yasiloona maaa amaral laahu bihee an yoosala wa yakhshawna Rabbahum wa yakhaafoona sooo`al hisaab
📖 हिंदी अर्थ
(ये) वह लोग हैं कि जिन (ताल्लुक़ात) के क़ायम रखने का ख़ुदा ने हुक्म दिया उन्हें क़ायम रखते हैं और अपने परवरदिगार से डरते हैं और (क़यामत के दिन) बुरी तरह हिसाब लिए जाने से ख़ौफ खाते हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَصِلُونَ: जोड़ते हैं, मिलाते हैं।
  • مَا أَمَرَ اللَّهُ بِهِ أَن يُوصَلَ: जिसे जोड़ने का अल्लाह ने आदेश दिया है, जैसे रिश्तेदारी (सिलह-रहमी) और अन्य संबंध।
  • يَخْشَوْنَ: डरते हैं, भय रखते हैं।
  • سُوءَ الْحِسَابِ: कठोर हिसाब, जिसमें कोई रियायत या माफ़ी न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ये वे लोग हैं जो उन सभी संबंधों को जोड़ते हैं जिन्हें जोड़ने का अल्लाह ने आदेश दिया है, विशेष रूप से रिश्तेदारी के संबंध (सिलह-रहमी)। वे अपने रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार करते हैं, उनकी मदद करते हैं, उनसे मिलते-जुलते हैं और उनके साथ भलाई का बर्ताव करते हैं। साथ ही, वे अपने रब का भय रखते हैं — यह भय उन्हें उसके आदेशों का पालन करने और उसकी मनाही से बचने पर मजबूर करता है। वे क़ियामत के दिन के कठोर हिसाब से भी डरते हैं, जिसमें कोई छूट या माफ़ी नहीं होगी। वे जानते हैं कि जिसका हिसाब सख्ती से लिया गया, वह सचमुच तबाह हो गया। इसलिए वे अपने कर्मों में सावधानी बरतते हैं, छोटे-बड़े हर गुनाह से बचते हैं और अपने कर्तव्यों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ते।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. सिलह-रहमी (रिश्तेदारों से अच्छा व्यवहार) इस्लाम का एक महत्वपूर्ण आदेश है, जो समाज में प्रेम और एकता पैदा करता है।
  2. अल्लाह का डर इंसान को अच्छे कर्म करने और बुराई से बचने की ताकत देता है — यही सच्ची परहेज़गारी है।
  3. क़ियामत के कठोर हिसाब का डर इंसान को लापरवाही से बचाता है और उसे अपने जीवन को सुधारने की प्रेरणा देता है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा मोमिन वही है जो अल्लाह के आदेशों का पालन करे, रिश्तेदारों के साथ भलाई करे और आख़िरत के हिसाब को हमेशा याद रखे।
🎧 सुनें

📜 आयत 19-23 — अर-राद

19۞ أَفَمَن يَعْلَمُ أَنَّمَا أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ الْحَقُّ كَمَنْ هُوَ أَعْمَىٰ ۚ إِنَّمَا يَتَذَكَّرُ أُولُو الْأَلْبَابِ
(ऐ रसूल) भला वह शख़्श जो ये जानता है कि जो कुछ तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर नाज़िल हुआ है बिल्कुल ठीक है कभी उस शख़्श के बराबर हो सकता है जो मुत्तलिक़ (पूरा) अंधा है (हरगिज़ नहीं)
20الَّذِينَ يُوفُونَ بِعَهْدِ اللَّهِ وَلَا يَنقُضُونَ الْمِيثَاقَ
इससे तो बस कुछ समझदार लोग ही नसीहत हासिल करते हैं वह लोग है कि ख़ुदा से जो एहद किया उसे पूरा करते हैं और अपने पैमान को नहीं तोड़ते
21وَالَّذِينَ يَصِلُونَ مَا أَمَرَ اللَّهُ بِهِ أَن يُوصَلَ وَيَخْشَوْنَ رَبَّهُمْ وَيَخَافُونَ سُوءَ الْحِسَابِ
(ये) वह लोग हैं कि जिन (ताल्लुक़ात) के क़ायम रखने का ख़ुदा ने हुक्म दिया उन्हें क़ायम रखते हैं और अपने परवरदिगार से डरते हैं और (क़यामत के दिन) बुरी तरह हिसाब लिए जाने से ख़ौफ खाते हैं
22وَالَّذِينَ صَبَرُوا ابْتِغَاءَ وَجْهِ رَبِّهِمْ وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَأَنفَقُوا مِمَّا رَزَقْنَاهُمْ سِرًّا وَعَلَانِيَةً وَيَدْرَءُونَ بِالْحَسَنَةِ السَّيِّئَةَ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عُقْبَى الدَّارِ
और (ये) वह लोग हैं जो अपने परवरदिगार की खुशनूदी हासिल करने की ग़रज़ से (जो मुसीबत उन पर पड़ी है) झेल गए और पाबन्दी से नमाज़ अदा की और जो कुछ हमने उन्हें रोज़ी दी थी उसमें से छिपाकर और खुल कर ख़ुदा की राह में खर्च किया और ये लोग बुराई को भी भलाई स दफा करते हैं -यही लोग हैं जिनके लिए आख़िरत की खूबी मख़सूस है
23جَنَّاتُ عَدْنٍ يَدْخُلُونَهَا وَمَن صَلَحَ مِنْ آبَائِهِمْ وَأَزْوَاجِهِمْ وَذُرِّيَّاتِهِمْ ۖ وَالْمَلَائِكَةُ يَدْخُلُونَ عَلَيْهِم مِّن كُلِّ بَابٍ
(यानि) हमेशा रहने के बाग़ जिनमें वह आप जाएॅगे और उनके बाप, दादाओं, बीवियों और उनकी औलाद में से जो लोग नेको कार है (वह सब भी) और फरिश्ते बेहश्त के हर दरवाजे से उनके पास आएगें
अर-रादकुरान सूची
43आयत
मदनीRevelation
21आयत

अनुवाद — अर-राद 21

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Tuesday, August 18, 2026

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