अर-राद · 20/43
अनुवाद उच्चारण — अर-राद
الَّذِينَ يُوفُونَ بِعَهْدِ اللَّهِ وَلَا يَنقُضُونَ الْمِيثَاقَ ۝٢٠
Allazeena yoofoona bi`ahdil laahi wa laa yanqu doonal meesaaq
📖 हिंदी अर्थ
इससे तो बस कुछ समझदार लोग ही नसीहत हासिल करते हैं वह लोग है कि ख़ुदा से जो एहद किया उसे पूरा करते हैं और अपने पैमान को नहीं तोड़ते
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُوفُونَ بِعَهْدِ اللَّهِ: अल्लाह के साथ किए गए वचन (अहद) को पूरा करते हैं।
  • يَنقُضُونَ: तोड़ते हैं, भंग करते हैं।
  • الْمِيثَاقَ: पक्का और मज़बूत अहदनामा (संधि/वचन)।

तफ़सीर:

ये वे लोग हैं जो अल्लाह के साथ किए गए वचन को पूरा करते हैं। अल्लाह ने अपने बंदों से यह वचन लिया है कि वे उसकी इबादत करें, उसके आदेशों का पालन करें और उसकी मनाही से बचें। यह वचन उन्होंने ईमान लाने, नमाज़ पढ़ने, रोज़ा रखने, हज़ करने और अन्य सभी आज्ञाकारिता के रूप में स्वीकार किया है। साथ ही, ये लोग उन अहदों और संधियों को भी नहीं तोड़ते जो उन्होंने लोगों से की हैं, चाहे वे मुसलमान हों या ग़ैर-मुस्लिम। वे अपने वादों पर पक्के रहते हैं, चाहे उन्हें कोई भी नुक़सान उठाना पड़े। वे अल्लाह के साथ किए गए पक्के और मज़बूत अहदनामे (मीसेक़) को कभी नहीं तोड़ते, क्योंकि वे जानते हैं कि अल्लाह के साथ वचन का पूरा करना ईमान की निशानी है और उसका तोड़ना निफ़ाक़ (दोहरेपन) की निशानी है।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह के साथ किए गए वचन को पूरा करना ईमान की सबसे बड़ी निशानी है, और यही सच्चे मुसलमान की पहचान है।
  2. वादा पूरा करना और अहद को निभाना इस्लाम का अहम हिस्सा है; यह इंसान को समाज में भरोसेमंद और इज़्ज़तदार बनाता है।
  3. जो लोग अल्लाह से किए गए वचन (इबादत, तक़वा, नेकी) को पूरा करते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत में कामयाबी और जन्नत से नवाज़ेगा।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी ज़िंदगी का हर पहलू — चाहे वह अल्लाह के साथ हो या इंसानों के साथ — अमानत और वचन की पाबंदी पर आधारित होना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 18-22 — अर-राद

18لِلَّذِينَ اسْتَجَابُوا لِرَبِّهِمُ الْحُسْنَىٰ ۚ وَالَّذِينَ لَمْ يَسْتَجِيبُوا لَهُ لَوْ أَنَّ لَهُم مَّا فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا وَمِثْلَهُ مَعَهُ لَافْتَدَوْا بِهِ ۚ أُولَٰئِكَ لَهُمْ سُوءُ الْحِسَابِ وَمَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ ۖ وَبِئْسَ الْمِهَادُ
जिन लोगों ने अपने परवरदिगार का कहना माना उनके लिए बहुत बेहतरी है और जिन लोगों ने उसका कहा न माना (क़यामत में उनकी ये हालत होगी) कि अगर उन्हें रुए ज़मीन के सब ख़ज़ाने बल्कि उसके साथ इतना और मिल जाए तो ये लोग अपनी नजात के बदले उसको (ये खुशी) दे डालें (मगर फिर भी कोई फायदा नहीं) यही लोग हैं जिनसे बुरी तरह हिसाब लिया जाएगा और आख़िर उन का ठिकाना जहन्नुम है और वह क्या बुरी जगह है
19۞ أَفَمَن يَعْلَمُ أَنَّمَا أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ الْحَقُّ كَمَنْ هُوَ أَعْمَىٰ ۚ إِنَّمَا يَتَذَكَّرُ أُولُو الْأَلْبَابِ
(ऐ रसूल) भला वह शख़्श जो ये जानता है कि जो कुछ तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर नाज़िल हुआ है बिल्कुल ठीक है कभी उस शख़्श के बराबर हो सकता है जो मुत्तलिक़ (पूरा) अंधा है (हरगिज़ नहीं)
20الَّذِينَ يُوفُونَ بِعَهْدِ اللَّهِ وَلَا يَنقُضُونَ الْمِيثَاقَ
इससे तो बस कुछ समझदार लोग ही नसीहत हासिल करते हैं वह लोग है कि ख़ुदा से जो एहद किया उसे पूरा करते हैं और अपने पैमान को नहीं तोड़ते
21وَالَّذِينَ يَصِلُونَ مَا أَمَرَ اللَّهُ بِهِ أَن يُوصَلَ وَيَخْشَوْنَ رَبَّهُمْ وَيَخَافُونَ سُوءَ الْحِسَابِ
(ये) वह लोग हैं कि जिन (ताल्लुक़ात) के क़ायम रखने का ख़ुदा ने हुक्म दिया उन्हें क़ायम रखते हैं और अपने परवरदिगार से डरते हैं और (क़यामत के दिन) बुरी तरह हिसाब लिए जाने से ख़ौफ खाते हैं
22وَالَّذِينَ صَبَرُوا ابْتِغَاءَ وَجْهِ رَبِّهِمْ وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَأَنفَقُوا مِمَّا رَزَقْنَاهُمْ سِرًّا وَعَلَانِيَةً وَيَدْرَءُونَ بِالْحَسَنَةِ السَّيِّئَةَ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عُقْبَى الدَّارِ
और (ये) वह लोग हैं जो अपने परवरदिगार की खुशनूदी हासिल करने की ग़रज़ से (जो मुसीबत उन पर पड़ी है) झेल गए और पाबन्दी से नमाज़ अदा की और जो कुछ हमने उन्हें रोज़ी दी थी उसमें से छिपाकर और खुल कर ख़ुदा की राह में खर्च किया और ये लोग बुराई को भी भलाई स दफा करते हैं -यही लोग हैं जिनके लिए आख़िरत की खूबी मख़सूस है
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Tuesday, August 18, 2026

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