इससे तो बस कुछ समझदार लोग ही नसीहत हासिल करते हैं वह लोग है कि ख़ुदा से जो एहद किया उसे पूरा करते हैं और अपने पैमान को नहीं तोड़ते
📜
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
يُوفُونَ بِعَهْدِ اللَّهِ: अल्लाह के साथ किए गए वचन (अहद) को पूरा करते हैं।
يَنقُضُونَ: तोड़ते हैं, भंग करते हैं।
الْمِيثَاقَ: पक्का और मज़बूत अहदनामा (संधि/वचन)।
तफ़सीर:
ये वे लोग हैं जो अल्लाह के साथ किए गए वचन को पूरा करते हैं। अल्लाह ने अपने बंदों से यह वचन लिया है कि वे उसकी इबादत करें, उसके आदेशों का पालन करें और उसकी मनाही से बचें। यह वचन उन्होंने ईमान लाने, नमाज़ पढ़ने, रोज़ा रखने, हज़ करने और अन्य सभी आज्ञाकारिता के रूप में स्वीकार किया है। साथ ही, ये लोग उन अहदों और संधियों को भी नहीं तोड़ते जो उन्होंने लोगों से की हैं, चाहे वे मुसलमान हों या ग़ैर-मुस्लिम। वे अपने वादों पर पक्के रहते हैं, चाहे उन्हें कोई भी नुक़सान उठाना पड़े। वे अल्लाह के साथ किए गए पक्के और मज़बूत अहदनामे (मीसेक़) को कभी नहीं तोड़ते, क्योंकि वे जानते हैं कि अल्लाह के साथ वचन का पूरा करना ईमान की निशानी है और उसका तोड़ना निफ़ाक़ (दोहरेपन) की निशानी है।
फ़ायदे:
अल्लाह के साथ किए गए वचन को पूरा करना ईमान की सबसे बड़ी निशानी है, और यही सच्चे मुसलमान की पहचान है।
वादा पूरा करना और अहद को निभाना इस्लाम का अहम हिस्सा है; यह इंसान को समाज में भरोसेमंद और इज़्ज़तदार बनाता है।
जो लोग अल्लाह से किए गए वचन (इबादत, तक़वा, नेकी) को पूरा करते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत में कामयाबी और जन्नत से नवाज़ेगा।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी ज़िंदगी का हर पहलू — चाहे वह अल्लाह के साथ हो या इंसानों के साथ — अमानत और वचन की पाबंदी पर आधारित होना चाहिए।
जिन लोगों ने अपने परवरदिगार का कहना माना उनके लिए बहुत बेहतरी है और जिन लोगों ने उसका कहा न माना (क़यामत में उनकी ये हालत होगी) कि अगर उन्हें रुए ज़मीन के सब ख़ज़ाने बल्कि उसके साथ इतना और मिल जाए तो ये लोग अपनी नजात के बदले उसको (ये खुशी) दे डालें (मगर फिर भी कोई फायदा नहीं) यही लोग हैं जिनसे बुरी तरह हिसाब लिया जाएगा और आख़िर उन का ठिकाना जहन्नुम है और वह क्या बुरी जगह है
(ऐ रसूल) भला वह शख़्श जो ये जानता है कि जो कुछ तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर नाज़िल हुआ है बिल्कुल ठीक है कभी उस शख़्श के बराबर हो सकता है जो मुत्तलिक़ (पूरा) अंधा है (हरगिज़ नहीं)
(ये) वह लोग हैं कि जिन (ताल्लुक़ात) के क़ायम रखने का ख़ुदा ने हुक्म दिया उन्हें क़ायम रखते हैं और अपने परवरदिगार से डरते हैं और (क़यामत के दिन) बुरी तरह हिसाब लिए जाने से ख़ौफ खाते हैं
और (ये) वह लोग हैं जो अपने परवरदिगार की खुशनूदी हासिल करने की ग़रज़ से (जो मुसीबत उन पर पड़ी है) झेल गए और पाबन्दी से नमाज़ अदा की और जो कुछ हमने उन्हें रोज़ी दी थी उसमें से छिपाकर और खुल कर ख़ुदा की राह में खर्च किया और ये लोग बुराई को भी भलाई स दफा करते हैं -यही लोग हैं जिनके लिए आख़िरत की खूबी मख़सूस है
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।