अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- حُكْمًا عَرَبِيًّا: अर्थात ऐसा निर्णायक कानून जो अरबी भाषा में उतारा गया हो।
- أَهْوَاءَهُم: उनकी मनमानी इच्छाएँ और इच्छाएँ।
- وَلِيٌّ: सहायक, मददगार।
- وَاقٍ: रक्षक, बचाने वाला।
तफसीर (व्याख्या):
जिस प्रकार हमने पहले के नबियों पर उनकी अपनी क़ौम की भाषा में किताबें उतारीं, उसी प्रकार हमने आप (ऐ नबी) पर यह कुरआन उतारा है — जो एक निर्णायक और स्पष्ट कानून है, अरबी भाषा में, ताकि आप इसके द्वारा लोगों के बीच न्याय करें और उन्हें सत्य का मार्ग दिखाएँ। यह कुरआन अपने में पूर्ण सत्य और स्पष्ट मार्गदर्शन रखता है, और इसमें कोई कमी या भ्रम नहीं है।
फिर अल्लाह तआला आपको चेतावनी देते हुए कहता है: ऐ नबी! यदि आप उन लोगों (मुशरिकों और अहले-किताब) की मनमानी इच्छाओं का अनुसरण करते हैं — चाहे वह आपसे किब्ला बदलने, या किसी अन्य आदेश में हेर-फेर करने की माँग करें — उस सत्य और ज्ञान के बाद जो आपके पास आ चुका है, तो जान लीजिए कि अल्लाह की ओर से आपके लिए न कोई सहायक होगा जो आपकी मदद करे, और न कोई रक्षक जो आपको अल्लाह की यातना से बचा सके। यह बात आपको इस बात की ओर संकेत करती है कि सत्य पर स्थिर रहना ही एकमात्र रास्ता है, और किसी भी प्रकार का समझौता धर्म के मामले में विनाश का कारण बन सकता है।
यह आयत नबी ﷺ को संबोधित करते हुए भी उनके अनुयायियों को सिखाती है कि धर्म के मामले में किसी की इच्छाओं का अनुसरण नहीं करना चाहिए, चाहे वह कितना ही बड़ा या प्रभावशाली क्यों न हो।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- कुरआन की सर्वोच्चता: यह आयत सिखाती है कि कुरआन एक पूर्ण और निर्णायक कानून है, जो अरबी भाषा में उतारा गया ताकि लोग इसे आसानी से समझ सकें और इस पर अमल कर सकें। यह हमारे लिए सबसे बड़ी नेमत है।
- सत्य पर स्थिरता: हमें सत्य और सही मार्ग पर स्थिर रहना चाहिए, चाहे लोगों की इच्छाएँ कुछ भी हों। किसी की खुशी के लिए धर्म के मामले में समझौता करना बड़ी भूल है।
- अल्लाह पर भरोसा: जब हम सत्य पर चलते हैं, तो अल्लाह हमारा सहायक और रक्षक होता है। लेकिन यदि हम उसके आदेशों से विमुख हो जाएँ, तो कोई हमें उसकी पकड़ से नहीं बचा सकता।
- धर्म की रक्षा: यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम के मूल सिद्धांतों की रक्षा करना हर मुसलमान का कर्तव्य है, और किसी भी परिस्थिति में हमें अपने धर्म के सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।
- नबी ﷺ का आदर्श: यह आयत हमें नबी ﷺ की स्थिति का एहसास कराती है कि उन्होंने कितनी कठिन परिस्थितियों में सत्य का साथ दिया, और हमें उनके इस आदर्श का अनुसरण करना चाहिए।
📜 आयत 35-39 — अर-राद
अनुवाद — अर-राद 37
सूरा अर-राद आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और यूँ हमने उस क़ुरान को अरबी (ज़बान) का फरमान…सूरा आयत 37/43 — अर-राद الرعد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-राद सुनें, अर-राद अनुवाद, अर-राद mp3, अर-राद pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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