Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَزْوَاجًا: पत्नियाँ।
- ذُرِّيَّةً: संतान, बच्चे।
- آيَةٍ: चमत्कार, निशानी।
- أَجَلٍ: नियत समय, अवधि।
- كِتَابٌ: लिखित आदेश, तय किया हुआ फैसला।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ नबी! जब मक्का के मुशरिकीन और यहूद आपकी शादियों पर आपत्ति जताते थे और कहते थे कि आप एक आम इंसान की तरह शादी क्यों करते हैं, और साथ ही वे आपसे ऐसे चमत्कारों की माँग करते थे जो उन्होंने अपनी जिद से तय किए थे, तो अल्लाह ने यह आयत उतारी।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने आपसे पहले भी कई रसूल भेजे, और वे सभी इंसान थे। हमने उन्हें भी पत्नियाँ दीं और संतान दी। वे फ़रिश्ते नहीं थे जो शादी और बच्चों से दूर हों। यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) रही है कि रसूल इंसान ही होते हैं, और उनका जीवन आम इंसानों जैसा होता है ताकि लोग उनसे सीख सकें और उनके साथ रह सकें। इसलिए आपका शादी करना और संतान रखना आपके नबूवत के खिलाफ नहीं, बल्कि पिछले नबियों की सुन्नत के अनुरूप है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि किसी भी रसूल के बस में नहीं है कि वह अपनी मर्जी से कोई चमत्कार ले आए। चमत्कार तो केवल अल्लाह के हुक्म से ही प्रकट होता है। अल्लाह जब चाहता है और जिस हिकमत से चाहता है, वह अपने रसूल के हाथ पर कोई निशानी दिखाता है। यह रसूल का काम नहीं कि वह हर माँग पर चमत्कार पेश करे।
आखिर में अल्लाह फ़रमाता है कि हर चीज़ के लिए एक नियत समय और एक लिखित फैसला है। जो कुछ भी होना है, वह अल्लाह के लिखे हुए समय पर ही होगा। न वह पहले आ सकता है और न बाद में। चमत्कार, अज़ाब, फतह, सब कुछ अल्लाह के तय किए हुए वक़्त पर ही आता है।
फ़ायदे (उपदेश):
- नबियों की ज़िंदगी में शादी और संतान होना इस बात का सबूत है कि इस्लाम फ़ितरत (प्राकृतिक स्वभाव) का दीन है। यह न तो दुनिया से दूर भागने की तालीम देता है और न ही शादी को बुरा समझता है। नबी खुद शादी करते थे और अपनी उम्मत को भी इसकी तरग़ीब देते थे।
- चमत्कार अल्लाह के इख्तियार में हैं, किसी इंसान के नहीं। इसलिए हमें अपने दीन की सच्चाई पर यकीन रखना चाहिए, भले ही लोग अपनी जिद के लिए निशानियाँ माँगें। सबसे बड़ा चमत्कार तो कुरआन है जो हमेशा के लिए मौजूद है।
- हर चीज़ का एक वक़्त है। अल्लाह की तरफ से जो फैसला आता है, वह अपने समय पर ही आता है। इसलिए हमें सब्र करना चाहिए और अल्लाह के फैसले पर भरोसा रखना चाहिए। जल्दबाज़ी और बेचैनी इंसान को नुकसान पहुँचाती है।
- इस आयत में नबी ﷺ की शान में तसल्ली है कि आप अकेले नहीं हैं, बल्कि आप अल्लाह के उन्हीं रसूलों की कड़ी हैं जो इंसान थे और आम ज़िंदगी गुज़ारते थे। यह हमारे लिए भी सबक है कि दीनदारी का मतलब दुनिया छोड़ देना नहीं, बल्कि दुनिया में रहकर अल्लाह के हुक्मों पर चलना है।
📜 आयत 36-40 — सूरा अर-राद
अनुवाद — अर-राद 38
सूरा अर-राद आयत 38 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने तुमसे पहले और (भी) बहुतेरे पैग़म्बर भेजे और…सूरा आयत 38/43 — सूरा अर-राद الرعد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-राद सुनें, सूरा अर-राद अनुवाद, सूरा अर-राद mp3, सूरा अर-राद pdf. आयत 36–40. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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