इब्राहीम · 4/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
وَمَا أَرْسَلْنَا مِن رَّسُولٍ إِلَّا بِلِسَانِ قَوْمِهِ لِيُبَيِّنَ لَهُمْ ۖ فَيُضِلُّ اللَّهُ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ ۝٤
Wa maaa arsalnaa mir Rasoolin illaa bilisaani qawmihee liyubaiyina lahum faiudillul laahu mai yashaaa`u wa yahde mai yashaaa`; wa Huwal `Azeezul Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
और हमने जब कभी कोई पैग़म्बर भेजा तो उसकी क़ौम की ज़बान में बातें करता हुआ (ताकि उसके सामने (हमारे एहक़ाम) बयान कर सके तो यही ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिस की चाहता है हिदायत करता है वही सब पर ग़ालिब हिकमत वाला है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لِسَانِ قَوْمِهِ: अपनी क़ौम की भाषा
  • لِيُبَيِّنَ لَهُمْ: ताकि वह उन्हें (धर्म की बातें) स्पष्ट कर दे
  • فَيُضِلُّ اللهُ: तो अल्लाह गुमराह करता है
  • يَهْدِي: मार्गदर्शन करता है
  • الْعَزِيزُ: सब पर प्रभुत्व रखने वाला, जिसे कोई पराजित न कर सके
  • الْحَكِيمُ: पूर्ण ज्ञान और तदबीर वाला, जो हर काम हिकमत से करता है

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! हमने आपसे पहले कोई भी रसूल नहीं भेजा, मगर उसकी अपनी क़ौम की भाषा में ही भेजा, ताकि वह उन्हें अल्लाह का दीन आसानी से समझा सके और उन पर हुज्जत (प्रमाण) क़ायम हो जाए। रसूल का काम केवल संदेश पहुँचाना और स्पष्ट करना है, न कि लोगों को ज़बरदस्ती ईमान लाने पर मजबूर करना। इसके बाद अल्लाह ही अपनी इच्छा और अटल नियम के अनुसार जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है (उसके इनकार और ज़िद के कारण), और जिसे चाहता है हिदायत देता है (उसकी सच्चाई की तलाश के कारण)। यह सब अल्लाह के न्याय और कृपा पर आधारित है। अल्लाह सर्वशक्तिमान है, उसकी इच्छा के आगे कोई नहीं चल सकता, और वह पूर्ण हिकमत वाला है — वह न तो बिना कारण किसी को गुमराह करता है और न ही बिना कारण किसी को हिदायत देता है; हर फ़ैसला उसकी गहरी समझ और न्याय के अनुसार होता है।

फ़ायदे (सबक):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि दीन की दावत और तबलीग़ में लोगों की भाषा और उनकी समझ का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है। जिस तरह अल्लाह ने हर रसूल को उसकी क़ौम की भाषा में भेजा, उसी तरह आज हमें भी लोगों तक इस्लाम का पैग़ाम उनकी अपनी भाषा और अंदाज़ में पहुँचाना चाहिए, ताकि वे आसानी से समझ सकें।
  2. रसूलों का काम केवल संदेश पहुँचाना है, हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है। इससे हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपनी ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए, लेकिन नतीजे की चिंता नहीं करनी चाहिए — नतीजा अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए।
  3. अल्लाह की हिदायत और गुमराही उसकी हिकमत और न्याय पर आधारित है। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह पर पूरा भरोसा रखें, क्योंकि वह हर काम बेहतर तरीके से और सही वक़्त पर करता है।
  4. यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की शक्ति (अज़्ज़त) और उसकी हिकमत (समझदारी) साथ-साथ हैं — वह जो चाहता है करता है, लेकिन हर काम में गहरी मसलहत (भलाई) होती है। इससे मुसलमान को यह तसल्ली मिलती है कि दुनिया के हर मामले में अल्लाह का कोई न कोई बेहतर इरादा है।
🎧 सुनें

📜 आयत 2-6 — इब्राहीम

2اللَّهِ الَّذِي لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ وَوَيْلٌ لِّلْكَافِرِينَ مِنْ عَذَابٍ شَدِيدٍ
वह ख़ुदा को कुछ आसमानों में और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है और (आख़िरत में) काफिरों को लिए जो सख्त अज़ाब (मुहय्या किया गया) है अफसोस नाक है
3الَّذِينَ يَسْتَحِبُّونَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا عَلَى الْآخِرَةِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًا ۚ أُولَٰئِكَ فِي ضَلَالٍ بَعِيدٍ
वह कुफ्फार जो दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी को आख़िरत पर तरजीह देते हैं और (लोगों) को ख़ुदा की राह (पर चलने) से रोकते हैं और इसमें ख्वाह मा ख्वाह कज़ी पैदा करना चाहते हैं यही लोग बड़े पल्ले दर्जे की गुमराही में हैं
4وَمَا أَرْسَلْنَا مِن رَّسُولٍ إِلَّا بِلِسَانِ قَوْمِهِ لِيُبَيِّنَ لَهُمْ ۖ فَيُضِلُّ اللَّهُ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
और हमने जब कभी कोई पैग़म्बर भेजा तो उसकी क़ौम की ज़बान में बातें करता हुआ (ताकि उसके सामने (हमारे एहक़ाम) बयान कर सके तो यही ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिस की चाहता है हिदायत करता है वही सब पर ग़ालिब हिकमत वाला है
5وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا أَنْ أَخْرِجْ قَوْمَكَ مِنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ وَذَكِّرْهُم بِأَيَّامِ اللَّهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّكُلِّ صَبَّارٍ شَكُورٍ
और हमने मूसा को अपनी निशानियाँ देकर भेजा (और ये हुक्म दिया) कि अपनी क़ौम को (कुफ्र की) तारिकियों से (ईमान की) रौशनी में निकाल लाओ और उन्हें ख़ुदा के (वह) दिन याद दिलाओ (जिनमें ख़ुदा की बड़ी बड़ी कुदरतें ज़ाहिर हुई) इसमें शक़ नहीं इसमें तमाम सब्र शुक्र करने वालों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
6وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ اذْكُرُوا نِعْمَةَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ أَنجَاكُم مِّنْ آلِ فِرْعَوْنَ يَسُومُونَكُمْ سُوءَ الْعَذَابِ وَيُذَبِّحُونَ أَبْنَاءَكُمْ وَيَسْتَحْيُونَ نِسَاءَكُمْ ۚ وَفِي ذَٰلِكُم بَلَاءٌ مِّن رَّبِّكُمْ عَظِيمٌ
और वह (वक्त याद दिलाओ) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि ख़ुदा ने जो एहसान तुम पर किए हैं उनको याद करो जब अकेले तुमको फिरऔन के लोगों (के ज़ुल्म) से नजात दी कि वह तुम को बहुत बड़े बड़े दुख दे के सताते थे तुम्हारा लड़कों को जबाह कर डालते थे और तुम्हारी औरतों को (अपनी ख़िदमत के वास्ते) जिन्दा रहने देते थे और इसमें तुम्हारा परवरदिगार की तरफ से (तुम्हारा सब्र की) बड़ी (सख्त) आज़माइश थी
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अनुवाद — इब्राहीम 4

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Tuesday, August 18, 2026

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