Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَسْتَحِبُّونَ: वे प्राथमिकता देते हैं, चुनते हैं, पसंद करते हैं।
- يَصُدُّونَ: वे रोकते हैं, हटाते हैं।
- يَبْغُونَهَا: वे चाहते हैं, तलाश करते हैं।
- عِوَجًا: टेढ़ापन, वक्रता, सीधे रास्ते से हटकर।
तफ़सीर (व्याख्या):
ये वे लोग हैं जिन्होंने ईमान नहीं लाया और अल्लाह के रसूलों का अनुसरण नहीं किया। वे इस नाशवान दुनिया की ज़िंदगी को आख़िरत की स्थायी ज़िंदगी पर प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने दुनिया के फ़ानी सुखों को चुना और आख़िरत के बाक़ी रहने वाले सुखों को छोड़ दिया। वे अपनी इस पसंद में इसलिए डूबे हैं कि उन्होंने आख़िरत के मामले को हल्का समझा और केवल दुनिया के जल्दी मिलने वाले लाभों पर ध्यान केंद्रित किया।
इसके अलावा, वे लोगों को अल्लाह के सीधे रास्ते (इस्लाम) पर चलने से रोकते हैं और उसे अपनी इच्छाओं के अनुरूप टेढ़ा बनाना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि अल्लाह का रास्ता सीधा और स्पष्ट न रहे, बल्कि उसमें विकृति और झुकाव पैदा हो जाए ताकि कोई भी उस पर न चल सके। वे अपने इस कृत्य से लोगों को सत्य से दूर करने की कोशिश करते हैं।
ये सारी विशेषताएँ जिनमें हों — दुनिया को आख़िरत पर प्राथमिकता देना, अल्लाह के रास्ते से रोकना, और उसे टेढ़ा बनाने की कोशिश करना — वे सत्य से बहुत दूर की गुमराही में हैं। उनका यह गुमराही में डूबना इतना गहरा है कि उनके लिए उससे निकलना अत्यंत कठिन है, क्योंकि उन्होंने अपने लिए हिदायत के सभी रास्ते बंद कर लिए हैं।
फ़ायदे (लाभ और सबक):
- दुनिया और आख़िरत के बीच सही तरजीह: यह आयत हमें सिखाती है कि एक मोमिन को दुनिया की अस्थायी चीज़ों पर आख़िरत की स्थायी नेमतों को प्राथमिकता देनी चाहिए। दुनिया को आख़िरत के लिए खेती का मैदान बनाना चाहिए, न कि आख़िरत को दुनिया के लिए कुर्बान करना।
- दूसरों को रोकने से बचना: यह आयत उन लोगों के लिए कड़ी चेतावनी है जो लोगों को अल्लाह के रास्ते से रोकते हैं या उसमें संदेह पैदा करते हैं। एक सच्चे मुसलमान का काम लोगों को अल्लाह के रास्ते की ओर बुलाना है, न कि उन्हें उससे दूर करना।
- सीधे रास्ते की पवित्रता: अल्लाह का रास्ता सीधा और स्पष्ट है। हमें उसमें कोई विकृति या टेढ़ापन पैदा नहीं करना चाहिए। इस्लाम को वैसे ही पेश करना चाहिए जैसा वह है — सरल, स्पष्ट और सत्य पर आधारित।
- गुमराही की गहराई: यह आयत बताती है कि जो लोग दुनिया को आख़िरत पर प्राथमिकता देते हैं और दूसरों को सत्य से रोकते हैं, वे गुमराही में इतने गहरे डूब जाते हैं कि उनके लिए सही रास्ते पर लौटना बहुत मुश्किल हो जाता है। यह हमें सचेत करता है कि हम अपने दिलों को दुनिया की मोहब्बत से पाक रखें और हमेशा आख़िरत की तैयारी में लगे रहें।
📜 आयत 1-5 — सूरा इब्राहीम
अनुवाद — इब्राहीम 3
सूरा इब्राहीम आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह कुफ्फार जो दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी को आख़िरत…सूरा आयत 3/52 — सूरा इब्राहीम إبراهيم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा इब्राहीम सुनें, सूरा इब्राहीम अनुवाद, सूरा इब्राहीम mp3, सूरा इब्राहीम pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा इब्राहीम
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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