इब्राहीम · 3/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा इब्राहीम
الَّذِينَ يَسْتَحِبُّونَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا عَلَى الْآخِرَةِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًا ۚ أُولَٰئِكَ فِي ضَلَالٍ بَعِيدٍ ۝٣
Allazeena yastahibboo nal hayaatad dunyaa `alal aakhirati wa yasuddoona `ansabeelil laahi wa yabghoonahaa `iwajaa; ulaaa `ika fee dalaalim ba`eed
📖 हिंदी अर्थ
वह कुफ्फार जो दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी को आख़िरत पर तरजीह देते हैं और (लोगों) को ख़ुदा की राह (पर चलने) से रोकते हैं और इसमें ख्वाह मा ख्वाह कज़ी पैदा करना चाहते हैं यही लोग बड़े पल्ले दर्जे की गुमराही में हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَسْتَحِبُّونَ: वे प्राथमिकता देते हैं, चुनते हैं, पसंद करते हैं।
  • يَصُدُّونَ: वे रोकते हैं, हटाते हैं।
  • يَبْغُونَهَا: वे चाहते हैं, तलाश करते हैं।
  • عِوَجًا: टेढ़ापन, वक्रता, सीधे रास्ते से हटकर।

तफ़सीर (व्याख्या):

ये वे लोग हैं जिन्होंने ईमान नहीं लाया और अल्लाह के रसूलों का अनुसरण नहीं किया। वे इस नाशवान दुनिया की ज़िंदगी को आख़िरत की स्थायी ज़िंदगी पर प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने दुनिया के फ़ानी सुखों को चुना और आख़िरत के बाक़ी रहने वाले सुखों को छोड़ दिया। वे अपनी इस पसंद में इसलिए डूबे हैं कि उन्होंने आख़िरत के मामले को हल्का समझा और केवल दुनिया के जल्दी मिलने वाले लाभों पर ध्यान केंद्रित किया।

इसके अलावा, वे लोगों को अल्लाह के सीधे रास्ते (इस्लाम) पर चलने से रोकते हैं और उसे अपनी इच्छाओं के अनुरूप टेढ़ा बनाना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि अल्लाह का रास्ता सीधा और स्पष्ट न रहे, बल्कि उसमें विकृति और झुकाव पैदा हो जाए ताकि कोई भी उस पर न चल सके। वे अपने इस कृत्य से लोगों को सत्य से दूर करने की कोशिश करते हैं।

ये सारी विशेषताएँ जिनमें हों — दुनिया को आख़िरत पर प्राथमिकता देना, अल्लाह के रास्ते से रोकना, और उसे टेढ़ा बनाने की कोशिश करना — वे सत्य से बहुत दूर की गुमराही में हैं। उनका यह गुमराही में डूबना इतना गहरा है कि उनके लिए उससे निकलना अत्यंत कठिन है, क्योंकि उन्होंने अपने लिए हिदायत के सभी रास्ते बंद कर लिए हैं।


फ़ायदे (लाभ और सबक):

  1. दुनिया और आख़िरत के बीच सही तरजीह: यह आयत हमें सिखाती है कि एक मोमिन को दुनिया की अस्थायी चीज़ों पर आख़िरत की स्थायी नेमतों को प्राथमिकता देनी चाहिए। दुनिया को आख़िरत के लिए खेती का मैदान बनाना चाहिए, न कि आख़िरत को दुनिया के लिए कुर्बान करना।
  2. दूसरों को रोकने से बचना: यह आयत उन लोगों के लिए कड़ी चेतावनी है जो लोगों को अल्लाह के रास्ते से रोकते हैं या उसमें संदेह पैदा करते हैं। एक सच्चे मुसलमान का काम लोगों को अल्लाह के रास्ते की ओर बुलाना है, न कि उन्हें उससे दूर करना।
  3. सीधे रास्ते की पवित्रता: अल्लाह का रास्ता सीधा और स्पष्ट है। हमें उसमें कोई विकृति या टेढ़ापन पैदा नहीं करना चाहिए। इस्लाम को वैसे ही पेश करना चाहिए जैसा वह है — सरल, स्पष्ट और सत्य पर आधारित।
  4. गुमराही की गहराई: यह आयत बताती है कि जो लोग दुनिया को आख़िरत पर प्राथमिकता देते हैं और दूसरों को सत्य से रोकते हैं, वे गुमराही में इतने गहरे डूब जाते हैं कि उनके लिए सही रास्ते पर लौटना बहुत मुश्किल हो जाता है। यह हमें सचेत करता है कि हम अपने दिलों को दुनिया की मोहब्बत से पाक रखें और हमेशा आख़िरत की तैयारी में लगे रहें।


📜 आयत 1-5 — सूरा इब्राहीम

1الر ۚ كِتَابٌ أَنزَلْنَاهُ إِلَيْكَ لِتُخْرِجَ النَّاسَ مِنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ بِإِذْنِ رَبِّهِمْ إِلَىٰ صِرَاطِ الْعَزِيزِ الْحَمِيدِ
अलिफ़ लाम रा ऐ रसूल ये (क़ुरान वह) किताब है जिसकों हमने तुम्हारे पास इसलिए नाज़िल किया है कि तुम लोगों को परवरदिगार के हुक्म से (कुफ्र की) तारीकी से (ईमान की) रौशनी में निकाल लाओ ग़रज़ उसकी राह पर लाओ जो सब पर ग़ालिब और सज़ावार हम्द है
2اللَّهِ الَّذِي لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ وَوَيْلٌ لِّلْكَافِرِينَ مِنْ عَذَابٍ شَدِيدٍ
वह ख़ुदा को कुछ आसमानों में और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है और (आख़िरत में) काफिरों को लिए जो सख्त अज़ाब (मुहय्या किया गया) है अफसोस नाक है
3الَّذِينَ يَسْتَحِبُّونَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا عَلَى الْآخِرَةِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًا ۚ أُولَٰئِكَ فِي ضَلَالٍ بَعِيدٍ
वह कुफ्फार जो दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी को आख़िरत पर तरजीह देते हैं और (लोगों) को ख़ुदा की राह (पर चलने) से रोकते हैं और इसमें ख्वाह मा ख्वाह कज़ी पैदा करना चाहते हैं यही लोग बड़े पल्ले दर्जे की गुमराही में हैं
4وَمَا أَرْسَلْنَا مِن رَّسُولٍ إِلَّا بِلِسَانِ قَوْمِهِ لِيُبَيِّنَ لَهُمْ ۖ فَيُضِلُّ اللَّهُ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
और हमने जब कभी कोई पैग़म्बर भेजा तो उसकी क़ौम की ज़बान में बातें करता हुआ (ताकि उसके सामने (हमारे एहक़ाम) बयान कर सके तो यही ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिस की चाहता है हिदायत करता है वही सब पर ग़ालिब हिकमत वाला है
5وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا أَنْ أَخْرِجْ قَوْمَكَ مِنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ وَذَكِّرْهُم بِأَيَّامِ اللَّهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّكُلِّ صَبَّارٍ شَكُورٍ
और हमने मूसा को अपनी निशानियाँ देकर भेजा (और ये हुक्म दिया) कि अपनी क़ौम को (कुफ्र की) तारिकियों से (ईमान की) रौशनी में निकाल लाओ और उन्हें ख़ुदा के (वह) दिन याद दिलाओ (जिनमें ख़ुदा की बड़ी बड़ी कुदरतें ज़ाहिर हुई) इसमें शक़ नहीं इसमें तमाम सब्र शुक्र करने वालों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
इब्राहीमकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
3आयत

अनुवाद — इब्राहीम 3

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सूरा आयत 3/52 — सूरा इब्राहीम إبراهيم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा इब्राहीम सुनें, सूरा इब्राहीम अनुवाद, सूरा इब्राहीम mp3, सूरा इब्राहीम pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.





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Monday, September 28, 2026

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