इब्राहीम · 5/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا أَنْ أَخْرِجْ قَوْمَكَ مِنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ وَذَكِّرْهُم بِأَيَّامِ اللَّهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّكُلِّ صَبَّارٍ شَكُورٍ ۝٥
Wa laqad arsalnaa Moosaa bi Aayaatinaa an akhrij qawmaka minaz zulumaati ilan noori wa zak kirhum bi ayyaamil laah; inna fee zaalika la aayaatil likulli sabbaarin shakoor
📖 हिंदी अर्थ
और हमने मूसा को अपनी निशानियाँ देकर भेजा (और ये हुक्म दिया) कि अपनी क़ौम को (कुफ्र की) तारिकियों से (ईमान की) रौशनी में निकाल लाओ और उन्हें ख़ुदा के (वह) दिन याद दिलाओ (जिनमें ख़ुदा की बड़ी बड़ी कुदरतें ज़ाहिर हुई) इसमें शक़ नहीं इसमें तमाम सब्र शुक्र करने वालों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • आयातिना: हमारी निशानियाँ (मोज़िज़े), जैसे लाठी, यद-ए-बैज़ा और अन्य नौ निशानियाँ।
  • ज़ुलुमात: अंधेरे, यानी कुफ्र (अविश्वास) और अज्ञानता।
  • नूर: रोशनी, यानी ईमान (विश्वास) और ज्ञान।
  • अय्यामुल्लाह: अल्लाह के दिन, यानी अल्लाह की उन नेमतों और उनकी यातनाओं के दिन जो पिछली उम्मतों पर आए।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को अपनी निशानियों के साथ भेजा, जो उनके सच्चे नबी होने की गवाह थीं। उन्हें आदेश दिया गया कि वे अपनी क़ौम (बनी इसराईल) को अंधेरों से रोशनी की ओर निकालें, यानी उन्हें कुफ्र, शिर्क और अज्ञानता से निकालकर ईमान, तौहीद और ज्ञान की रोशनी में लाएँ। यह निकालना दावत और तालीम के ज़रिए था, ज़बरदस्ती से नहीं।

साथ ही, अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को आदेश दिया कि वे अपनी क़ौम को अल्लाह के "दिनों" की याद दिलाएँ — यानी अल्लाह की उन नेमतों को याद कराएँ जो उसने उन पर कीं (जैसे फिरऔन से नजात देना, समुंदर का चीरना, मन्न-ओ-सलवा का उतारना), और उन आज़ाबों और यातनाओं को भी याद दिलाएँ जो पिछली उम्मतों पर उनके कुफ्र और नाफ़रमानी की वजह से आईं। यह तज़कीरा (याद दिलाना) उनके दिलों में खौफ़ और उम्मीद पैदा करने के लिए था, ताकि वे अल्लाह की तरफ रुजू करें।

इन सबमें — यानी अल्लाह की निशानियों, नेमतों और यातनाओं के ज़िक्र में — हर उस शख्स के लिए बड़ी निशानियाँ और सबक हैं जो सब्र करने वाला हो (मुसीबतों और आज़माइशों पर सब्र करे, अल्लाह की इताअत पर जमा रहे और गुनाहों से बचे) और शुक्र करने वाला हो (अल्लाह की नेमतों का एहसास करे और उनका सही इस्तेमाल करे)। सब्र और शुक्र ही मोमिन की पहचान हैं — एक मोमिन मुसीबत में सब्र करता है और नेमत में शुक्र अदा करता है। यही वे लोग हैं जो अल्लाह की निशानियों से नसीहत हासिल करते हैं और उनसे फायदा उठाते हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतें और उसकी यातनाएँ — दोनों हमारे लिए सबक हैं। जब हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की नेमतों को याद करते हैं, तो हमारा दिल शुक्र से भर जाता है, और जब हम पिछली उम्मतों के अंजाम को याद करते हैं, तो हमारे दिल में अल्लाह का खौफ़ पैदा होता है। यही खौफ़ और उम्मीद हमें सीधे रास्ते पर चलाते हैं। आज हमें भी उसी तरह अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करना चाहिए — कुरआन की आयतों पर, कायनात की बनावट पर, और अपने जीवन के हर पल पर — ताकि हमारा ईमान मज़बूत हो और हम उन लोगों में शामिल हों जो सब्र और शुक्र के साथ अल्लाह की इबादत करते हैं। याद रखें, जो शख्स सब्र और शुक्र को अपनाता है, अल्लाह उसके साथ होता है और उसे कामयाबी की राह दिखाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 3-7 — इब्राहीम

3الَّذِينَ يَسْتَحِبُّونَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا عَلَى الْآخِرَةِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًا ۚ أُولَٰئِكَ فِي ضَلَالٍ بَعِيدٍ
वह कुफ्फार जो दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी को आख़िरत पर तरजीह देते हैं और (लोगों) को ख़ुदा की राह (पर चलने) से रोकते हैं और इसमें ख्वाह मा ख्वाह कज़ी पैदा करना चाहते हैं यही लोग बड़े पल्ले दर्जे की गुमराही में हैं
4وَمَا أَرْسَلْنَا مِن رَّسُولٍ إِلَّا بِلِسَانِ قَوْمِهِ لِيُبَيِّنَ لَهُمْ ۖ فَيُضِلُّ اللَّهُ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
और हमने जब कभी कोई पैग़म्बर भेजा तो उसकी क़ौम की ज़बान में बातें करता हुआ (ताकि उसके सामने (हमारे एहक़ाम) बयान कर सके तो यही ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिस की चाहता है हिदायत करता है वही सब पर ग़ालिब हिकमत वाला है
5وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا أَنْ أَخْرِجْ قَوْمَكَ مِنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ وَذَكِّرْهُم بِأَيَّامِ اللَّهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّكُلِّ صَبَّارٍ شَكُورٍ
और हमने मूसा को अपनी निशानियाँ देकर भेजा (और ये हुक्म दिया) कि अपनी क़ौम को (कुफ्र की) तारिकियों से (ईमान की) रौशनी में निकाल लाओ और उन्हें ख़ुदा के (वह) दिन याद दिलाओ (जिनमें ख़ुदा की बड़ी बड़ी कुदरतें ज़ाहिर हुई) इसमें शक़ नहीं इसमें तमाम सब्र शुक्र करने वालों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
6وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ اذْكُرُوا نِعْمَةَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ أَنجَاكُم مِّنْ آلِ فِرْعَوْنَ يَسُومُونَكُمْ سُوءَ الْعَذَابِ وَيُذَبِّحُونَ أَبْنَاءَكُمْ وَيَسْتَحْيُونَ نِسَاءَكُمْ ۚ وَفِي ذَٰلِكُم بَلَاءٌ مِّن رَّبِّكُمْ عَظِيمٌ
और वह (वक्त याद दिलाओ) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि ख़ुदा ने जो एहसान तुम पर किए हैं उनको याद करो जब अकेले तुमको फिरऔन के लोगों (के ज़ुल्म) से नजात दी कि वह तुम को बहुत बड़े बड़े दुख दे के सताते थे तुम्हारा लड़कों को जबाह कर डालते थे और तुम्हारी औरतों को (अपनी ख़िदमत के वास्ते) जिन्दा रहने देते थे और इसमें तुम्हारा परवरदिगार की तरफ से (तुम्हारा सब्र की) बड़ी (सख्त) आज़माइश थी
7وَإِذْ تَأَذَّنَ رَبُّكُمْ لَئِن شَكَرْتُمْ لَأَزِيدَنَّكُمْ ۖ وَلَئِن كَفَرْتُمْ إِنَّ عَذَابِي لَشَدِيدٌ
और (वह वक्त याद दिलाओ) जब तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हें जता दिया कि अगर (मेरा) शुक्र करोगें तो मै यक़ीनन तुम पर (नेअमत की) ज्यादती करुँगा और अगर कहीं तुमने नाशुक्री की तो (याद रखो कि) यक़ीनन मेरा अज़ाब सख्त है
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अनुवाद — इब्राहीम 5

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Tuesday, August 18, 2026

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