Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- आयातिना: हमारी निशानियाँ (मोज़िज़े), जैसे लाठी, यद-ए-बैज़ा और अन्य नौ निशानियाँ।
- ज़ुलुमात: अंधेरे, यानी कुफ्र (अविश्वास) और अज्ञानता।
- नूर: रोशनी, यानी ईमान (विश्वास) और ज्ञान।
- अय्यामुल्लाह: अल्लाह के दिन, यानी अल्लाह की उन नेमतों और उनकी यातनाओं के दिन जो पिछली उम्मतों पर आए।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को अपनी निशानियों के साथ भेजा, जो उनके सच्चे नबी होने की गवाह थीं। उन्हें आदेश दिया गया कि वे अपनी क़ौम (बनी इसराईल) को अंधेरों से रोशनी की ओर निकालें, यानी उन्हें कुफ्र, शिर्क और अज्ञानता से निकालकर ईमान, तौहीद और ज्ञान की रोशनी में लाएँ। यह निकालना दावत और तालीम के ज़रिए था, ज़बरदस्ती से नहीं।
साथ ही, अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को आदेश दिया कि वे अपनी क़ौम को अल्लाह के "दिनों" की याद दिलाएँ — यानी अल्लाह की उन नेमतों को याद कराएँ जो उसने उन पर कीं (जैसे फिरऔन से नजात देना, समुंदर का चीरना, मन्न-ओ-सलवा का उतारना), और उन आज़ाबों और यातनाओं को भी याद दिलाएँ जो पिछली उम्मतों पर उनके कुफ्र और नाफ़रमानी की वजह से आईं। यह तज़कीरा (याद दिलाना) उनके दिलों में खौफ़ और उम्मीद पैदा करने के लिए था, ताकि वे अल्लाह की तरफ रुजू करें।
इन सबमें — यानी अल्लाह की निशानियों, नेमतों और यातनाओं के ज़िक्र में — हर उस शख्स के लिए बड़ी निशानियाँ और सबक हैं जो सब्र करने वाला हो (मुसीबतों और आज़माइशों पर सब्र करे, अल्लाह की इताअत पर जमा रहे और गुनाहों से बचे) और शुक्र करने वाला हो (अल्लाह की नेमतों का एहसास करे और उनका सही इस्तेमाल करे)। सब्र और शुक्र ही मोमिन की पहचान हैं — एक मोमिन मुसीबत में सब्र करता है और नेमत में शुक्र अदा करता है। यही वे लोग हैं जो अल्लाह की निशानियों से नसीहत हासिल करते हैं और उनसे फायदा उठाते हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतें और उसकी यातनाएँ — दोनों हमारे लिए सबक हैं। जब हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की नेमतों को याद करते हैं, तो हमारा दिल शुक्र से भर जाता है, और जब हम पिछली उम्मतों के अंजाम को याद करते हैं, तो हमारे दिल में अल्लाह का खौफ़ पैदा होता है। यही खौफ़ और उम्मीद हमें सीधे रास्ते पर चलाते हैं। आज हमें भी उसी तरह अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करना चाहिए — कुरआन की आयतों पर, कायनात की बनावट पर, और अपने जीवन के हर पल पर — ताकि हमारा ईमान मज़बूत हो और हम उन लोगों में शामिल हों जो सब्र और शुक्र के साथ अल्लाह की इबादत करते हैं। याद रखें, जो शख्स सब्र और शुक्र को अपनाता है, अल्लाह उसके साथ होता है और उसे कामयाबी की राह दिखाता है।
📜 आयत 3-7 — सूरा इब्राहीम
अनुवाद — इब्राहीम 5
सूरा इब्राहीम आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने मूसा को अपनी निशानियाँ देकर भेजा (और ये…सूरा आयत 5/52 — सूरा इब्राहीम إبراهيم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा इब्राहीम सुनें, सूरा इब्राहीम अनुवाद, सूरा इब्राहीम mp3, सूरा इब्राहीम pdf. आयत 3–7. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा इब्राहीम
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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