अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْعَدْلِ (अल-अद्ल): न्याय और इंसाफ़, हर हक़दार को उसका हक़ देना।
- الْإِحْسَانِ (अल-इहसान): भलाई और उत्कृष्टता, फ़र्ज़ से बढ़कर अच्छा काम करना।
- إِيتَاءِ ذِي الْقُرْبَى (ईता ज़िल-क़ुर्बा): रिश्तेदारों को उनका हक़ देना और उनसे अच्छा व्यवहार करना।
- الْفَحْشَاءِ (अल-फ़हशा): अश्लील और बुरे काम, जैसे व्यभिचार और बदज़ुबानी।
- الْمُنكَرِ (अल-मुन्कर): वह काम जिसे शरीयत और अक़्ल बुरा कहे, जैसे शिर्क और पाप।
- الْبَغْيِ (अल-बग़्य): ज़ुल्म, सरकशी और लोगों पर ज़बरदस्ती करना।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों को चार महान आदेश देता है और तीन बुराइयों से रोकता है। सबसे पहले वह न्याय (अद्ल) का हुक्म देता है — यानी अल्लाह के साथ एकता और उसकी इबादत में कोई साझी न बनाना, और बंदों के बीच इंसाफ़ करना, हर हक़दार को उसका हक़ देना। फिर एहसान का आदेश है — यानी फ़र्ज़ अदा करने के बाद नफ़्ल (अतिरिक्त) इबादत, लोगों के साथ अच्छा व्यवहार, दान देना और क्षमा करना। तीसरा आदेश रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार और उनकी मदद करना है, ताकि पारिवारिक संबंध मज़बूत रहें।
इसके बाद अल्लाह तीन कामों से रोकता है: पहला, फ़हशा — यानी अश्लील काम और बुरी बातें, जैसे व्यभिचार और गंदी ज़ुबान। दूसरा, मुन्कर — यानी वह सब काम जो शरीयत और अक़्ल के अनुसार बुरे हों, जैसे शिर्क और दूसरे पाप। तीसरा, बग़्य — यानी ज़ुल्म करना, लोगों पर ज़बरदस्ती करना और उनके हक़ मारना।
अल्लाह यह सब इसलिए बता रहा है ताकि लोगों को नसीहत मिले और वे इन बातों को याद रखें। यह आयत कुरआन की सबसे व्यापक आयतों में से एक है, जिसमें अच्छाई की पूरी तस्वीर और बुराई की पूरी तस्वीर बयान कर दी गई है।
फ़ायदे (लाभ):
- यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का नाम नहीं, बल्कि पूरा जीवन-दर्शन है — जिसमें अल्लाह के हक़, बंदों के हक़ और रिश्तेदारों के हक़ सब शामिल हैं।
- न्याय और इंसाफ़ की ताकीद से पता चलता है कि इस्लाम समाज में बराबरी और हक़ की बात करता है, चाहे सामने वाला कोई भी हो।
- एहसान का आदेश हमें सिखाता है कि मुसलमान को केवल फ़र्ज़ अदा करके नहीं रुकना चाहिए, बल्कि दूसरों पर भलाई करने में आगे रहना चाहिए।
- रिश्तेदारों के साथ अच्छे व्यवहार की ताकीद से पारिवारिक बंधन मज़बूत होते हैं और समाज में मुहब्बत बढ़ती है।
- बुराइयों से रोकना हमें पाकीज़गी और पवित्रता की ओर ले जाता है, जिससे इंसान दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है।
- यह आयत बताती है कि अल्लाह हमारा भला चाहता है, इसलिए वह हमें नसीहत करता है — यह अल्लाह की रहमत और मुहब्बत की निशानी है।
📜 आयत 88-92 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 90
सूरा अन-नहल आयत 90 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा इन्साफ और (लोगों के साथ)…सूरा आयत 90/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 88–92. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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