Wa awfoo bi Ahdil laahi izaa `aahattum wa laa tanqudul aimaana ba`da tawkeedihaa wa qad ja`altumul laaha `alaikum kafeelaa; innal laaha ya`lamu maa taf`aloon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और जब तुम लोग बाहम क़ौल व क़रार कर लिया करो तो ख़ुदा के एहदो पैमान को पूरा करो और क़समों को उनके पक्का हो जाने के बाद न तोड़ा करो हालॉकि तुम तो ख़ुदा को अपना ज़ामिन बना चुके हो जो कुछ भी तुम करते हो ख़ुदा उसे ज़रुर जानता है
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اور جب خدا سے عہد واثق کرو تو اس کو پورا کرو اور جب پکی قسمیں کھاؤ تو اُن کو مت توڑو کہ تم خدا کو اپنا ضامن مقرر کرچکے ہو۔ اور جو کچھ تم کرتے ہو خدا اس کو جانتا ہے
تَوْكِيدِهَا: उन्हें (क़समों को) पक्का और मज़बूत करने के बाद, यानी अल्लाह का नाम लेकर उन्हें दृढ़ करने के बाद।
كَفِيلًا: ज़मानतदार, गवाह और निगरानी करने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने ईमानवाले बंदों को आदेश देता है कि वे हर उस अहद (वादे) को पूरा करें जो उन्होंने अल्लाह से किया हो या लोगों से किया हो, बशर्ते वह अल्लाह की किताब और उसके नबी ﷺ की सुन्नत के ख़िलाफ़ न हो। यह अहद चाहे ज़बान से किया गया हो, चाहे किसी काम या रिश्ते के सिलसिले में हो, या किसी भलाई के काम में हो — सबको पूरा करना लाज़िमी है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि क़समों को पक्का करने के बाद उन्हें न तोड़ो। जब तुमने अल्लाह का नाम लेकर क़सम खाई हो और उसे मज़बूत कर दिया हो, तो उसे तोड़ना बहुत बड़ा गुनाह है। ख़ासकर जब तुमने अल्लाह को अपने ऊपर गवाह और ज़मानतदार बना लिया हो — यानी तुमने अल्लाह को इस बात का गवाह बनाया कि तुम अपने वादे पर क़ायम रहोगे। यह बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है।
अल्लाह तआला को तुम्हारे सारे कामों का पूरा इल्म है — चाहे तुम वादा पूरा करो या तोड़ो, चाहे छिपकर करो या खुलकर। वह सब कुछ जानता है और उसका हिसाब लेगा। कोई भी चीज़ उससे छिपी नहीं है, और वह हर किसी को उसके किए का बदला देगा।
फ़ायदे (सबक):
वादा पूरा करना ईमान की निशानी है: यह आयत सिखाती है कि वादा पूरा करना सिर्फ़ अच्छा अख़लाक़ नहीं, बल्कि ईमान का हिस्सा है। एक सच्चा मुसलमान वही है जो अपने किए वादे पर क़ायम रहे।
अल्लाह को गवाह बनाना बड़ी ज़िम्मेदारी है: जब हम अल्लाह का नाम लेकर कोई वादा करते हैं, तो हम अल्लाह को अपने ऊपर गवाह बनाते हैं। यह सोचना चाहिए कि जिस अल्लाह के सामने हमें खड़ा होना है, उसी को हमने गवाह बनाया है — फिर उसे तोड़ना कितनी बड़ी बेईमानी है!
अल्लाह की निगरानी का एहसास: यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह हमारे हर काम को देख रहा है। यह एहसास इंसान को सच्चाई और वफ़ादारी पर क़ायम रखता है और गुनाह से रोकता है।
इस्लाम में भरोसे और सच्चाई की अहमियत: इस्लाम वही दीन है जो रिश्तों, कारोबार और समाज में सच्चाई और भरोसे को बुनियाद बनाता है। वादा पूरा करना इसी का हिस्सा है, जिससे समाज में भरोसा और मुहब्बत बढ़ती है।
आख़िरत का हिसाब: यह आयत हमें याद दिलाती है कि दुनिया में भले ही हम किसी को धोखा दे दें, लेकिन अल्लाह से कुछ छिपा नहीं है। आख़िरत में हर चीज़ का हिसाब होगा — इसलिए ज़िंदगी में सच्चाई और वफ़ादारी अपनानी चाहिए।
और जब तुम लोग बाहम क़ौल व क़रार कर लिया करो तो ख़ुदा के एहदो पैमान को पूरा करो और क़समों को उनके पक्का हो जाने के बाद न तोड़ा करो हालॉकि तुम तो ख़ुदा को अपना ज़ामिन बना चुके हो जो कुछ भी तुम करते हो ख़ुदा उसे ज़रुर जानता है
और वह दिन याद करो जिस दिन हम हर एक गिरोह में से उन्हीं में का एक गवाह उनके मुक़ाबिल ला खड़ा करेगें और (ऐ रसूल) तुम को उन लोगों पर (उनके) सामने गवाह बनाकर ला खड़ा करेंगें और हमने तुम पर किताब (क़ुरान) नाज़िल की जिसमें हर चीज़ का (शाफी) बयान है और मुसलमानों के लिए (सरमापा) हिदायत और रहमत और खुशख़बरी है
इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा इन्साफ और (लोगों के साथ) नेकी करने और क़राबतदारों को (कुछ) देने का हुक्म करता है और बदकारी और नाशाएस्ता हरकतों और सरकशी करने को मना करता है (और) तुम्हें नसीहत करता है ताकि तुम नसीहत हासिल करो
और जब तुम लोग बाहम क़ौल व क़रार कर लिया करो तो ख़ुदा के एहदो पैमान को पूरा करो और क़समों को उनके पक्का हो जाने के बाद न तोड़ा करो हालॉकि तुम तो ख़ुदा को अपना ज़ामिन बना चुके हो जो कुछ भी तुम करते हो ख़ुदा उसे ज़रुर जानता है
और तुम लोग (क़समों के तोड़ने में) उस औरत के ऐसे न हो जो अपना सूत मज़बूत कातने के बाद टुकड़े टुकड़े करके तोड़ डाले कि अपने एहदो को आपस में उस बात की मक्कारी का ज़रिया बनाने लगो कि एक गिरोह दूसरे गिरोह से (ख्वामख़वाह) बढ़ जाए इससे बस ख़ुदा तुमको आज़माता है (कि तुम किसी की पालाइश करते हो) और जिन बातों में तुम दुनिया में झगड़ते थे क़यामत के दिन ख़ुदा खुद तुम से साफ साफ बयान कर देगा
और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम सबको एक ही (किस्म के) गिरोह बना देता मगर वह तो जिसको चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसकी चाहता है हिदायत करता है और जो कुछ तुम लोग दुनिया में किया करते थे उसकी बाज़ पुर्स (पुछ गछ) तुमसे ज़रुर की जाएगी
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