अन-नहल · 89/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
وَيَوْمَ نَبْعَثُ فِي كُلِّ أُمَّةٍ شَهِيدًا عَلَيْهِم مِّنْ أَنفُسِهِمْ ۖ وَجِئْنَا بِكَ شَهِيدًا عَلَىٰ هَٰؤُلَاءِ ۚ وَنَزَّلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ تِبْيَانًا لِّكُلِّ شَيْءٍ وَهُدًى وَرَحْمَةً وَبُشْرَىٰ لِلْمُسْلِمِينَ ۝٨٩
Wa yawma nab`asu fee kulli ummmatin shaheedan `alaihim min anfusihim wa ji`naa bika shaheedan `alaa haaa`ulaaa`; wa nazzalnaa `alaikal Kitaaba tibyaanal likulli shai`inw wa hudanw wa rahmatanw wa bushraa lilmuslimeen
📖 हिंदी अर्थ
और वह दिन याद करो जिस दिन हम हर एक गिरोह में से उन्हीं में का एक गवाह उनके मुक़ाबिल ला खड़ा करेगें और (ऐ रसूल) तुम को उन लोगों पर (उनके) सामने गवाह बनाकर ला खड़ा करेंगें और हमने तुम पर किताब (क़ुरान) नाज़िल की जिसमें हर चीज़ का (शाफी) बयान है और मुसलमानों के लिए (सरमापा) हिदायत और रहमत और खुशख़बरी है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شَهِيدًا: गवाह, जो सत्य की गवाही देने वाला हो।
  • مِّنْ أَنفُسِهِمْ: उन्हीं में से, उन्हीं की जाति और भाषा का।
  • تَبْيَانًا: हर चीज़ को स्पष्ट करने वाला, खोलकर बयान करने वाला।
  • هُدًى: मार्गदर्शन, सत्य की राह दिखाने वाला।
  • رَحْمَةً: दया, रहमत।
  • بُشْرَى: शुभ सूचना, खुशखबरी।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! उस दिन को याद करो जब हम हर उम्मत में से उन्हीं की जाति का एक गवाह खड़ा करेंगे, जो उनके कर्मों की गवाही देगा—चाहे वे ईमान पर हों या कुफ़्र पर। यह गवाह उन्हीं में से होगा, उन्हीं की भाषा बोलने वाला, ताकि उसकी गवाही पूरी तरह स्पष्ट और न्यायपूर्ण हो। और ऐ मुहम्मद! हम तुम्हें इन सब उम्मतों पर गवाह बनाकर लाएँगे, यानी तुम अपनी उम्मत और पूरी मानवजाति पर साक्षी होगे कि तुमने उन्हें सत्य का संदेश पहुँचा दिया।

और हमने तुम पर यह क़ुरआन उतारा है, जो हर उस चीज़ को स्पष्ट करता है जिसकी लोगों को ज़रूरत है—हलाल और हराम के आदेश, इनाम और सज़ा के नियम, अच्छे और बुरे कर्मों की पहचान, और आख़िरत की तैयारी का तरीक़ा। यह क़िताब गुमराही से निकालकर सीधी राह दिखाने वाली है, और उन लोगों के लिए रहमत है जो इसे मानते हैं और इस पर अमल करते हैं। साथ ही, यह उन मुसलमानों के लिए खुशखबरी है जो अल्लाह पर ईमान लाए और नेक कर्म किए, कि उनके लिए जन्नत की स्थायी नेमतें हैं।


फ़ायदे (उपदेश):

  1. हर उम्मत के साथ न्याय: अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता; हर जाति के पास उसका अपना नबी और गवाह होगा, जो उनकी भाषा और समझ के अनुसार साक्षी देगा। यह अल्लाह की पूर्ण न्यायप्रियता को दर्शाता है।
  2. क़ुरआन की पूर्णता: यह किताब हर ज़रूरी चीज़ को स्पष्ट करती है—चाहे वह अक़ीदा हो, इबादत हो, मुआमलात हो या आख़िरत की तैयारी। इससे हमें यह भरोसा मिलता है कि हमारे पास पूरा मार्गदर्शन है, और हमें किसी और की ओर देखने की ज़रूरत नहीं।
  3. रहमत और खुशखबरी: क़ुरआन सिर्फ़ किताब नहीं, बल्कि रहमत है—जो इसे पढ़ता और समझता है, उसके दिल को सुकून मिलता है। और यह मुसलमानों के लिए जन्नत की खुशखबरी है, जो उन्हें नेक कर्मों पर प्रोत्साहित करती है।
  4. नबी की गवाही का महत्व: हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारे नबी हमारे कर्मों के गवाह होंगे। यह हमें अपने कर्मों को सुधारने और उन्हें सत्य के अनुरूप बनाने की प्रेरणा देता है, ताकि हम उस गवाही के दिन शर्मिंदा न हों।
  5. क़ुरआन पर अमल की ताक़ीद: यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उस पर अमल करने के लिए उतारा गया है। जो इसे अपनाता है, वह हिदायत और रहमत पाता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 87-91 — अन-नहल

87وَأَلْقَوْا إِلَى اللَّهِ يَوْمَئِذٍ السَّلَمَ ۖ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
और उस दिन ख़ुदा के सामने सर झुका देंगे और जो इफ़तेरा परदाज़ियाँ दुनिया में किया करते थे उनसे गायब हो जाएँगें
88الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ زِدْنَاهُمْ عَذَابًا فَوْقَ الْعَذَابِ بِمَا كَانُوا يُفْسِدُونَ
जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया और लोगों को ख़ुदा की राह से रोका उनके फ़साद वाले कामों के बदले में उनके लिए हम अज़ाब पर अज़ाब बढ़ाते जाएँगें
89وَيَوْمَ نَبْعَثُ فِي كُلِّ أُمَّةٍ شَهِيدًا عَلَيْهِم مِّنْ أَنفُسِهِمْ ۖ وَجِئْنَا بِكَ شَهِيدًا عَلَىٰ هَٰؤُلَاءِ ۚ وَنَزَّلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ تِبْيَانًا لِّكُلِّ شَيْءٍ وَهُدًى وَرَحْمَةً وَبُشْرَىٰ لِلْمُسْلِمِينَ
और वह दिन याद करो जिस दिन हम हर एक गिरोह में से उन्हीं में का एक गवाह उनके मुक़ाबिल ला खड़ा करेगें और (ऐ रसूल) तुम को उन लोगों पर (उनके) सामने गवाह बनाकर ला खड़ा करेंगें और हमने तुम पर किताब (क़ुरान) नाज़िल की जिसमें हर चीज़ का (शाफी) बयान है और मुसलमानों के लिए (सरमापा) हिदायत और रहमत और खुशख़बरी है
90۞ إِنَّ اللَّهَ يَأْمُرُ بِالْعَدْلِ وَالْإِحْسَانِ وَإِيتَاءِ ذِي الْقُرْبَىٰ وَيَنْهَىٰ عَنِ الْفَحْشَاءِ وَالْمُنكَرِ وَالْبَغْيِ ۚ يَعِظُكُمْ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा इन्साफ और (लोगों के साथ) नेकी करने और क़राबतदारों को (कुछ) देने का हुक्म करता है और बदकारी और नाशाएस्ता हरकतों और सरकशी करने को मना करता है (और) तुम्हें नसीहत करता है ताकि तुम नसीहत हासिल करो
91وَأَوْفُوا بِعَهْدِ اللَّهِ إِذَا عَاهَدتُّمْ وَلَا تَنقُضُوا الْأَيْمَانَ بَعْدَ تَوْكِيدِهَا وَقَدْ جَعَلْتُمُ اللَّهَ عَلَيْكُمْ كَفِيلًا ۚ إِنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا تَفْعَلُونَ
और जब तुम लोग बाहम क़ौल व क़रार कर लिया करो तो ख़ुदा के एहदो पैमान को पूरा करो और क़समों को उनके पक्का हो जाने के बाद न तोड़ा करो हालॉकि तुम तो ख़ुदा को अपना ज़ामिन बना चुके हो जो कुछ भी तुम करते हो ख़ुदा उसे ज़रुर जानता है
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अनुवाद — अन-नहल 89

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Tuesday, August 18, 2026

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