अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- شَهِيدًا: गवाह, जो सत्य की गवाही देने वाला हो।
- مِّنْ أَنفُسِهِمْ: उन्हीं में से, उन्हीं की जाति और भाषा का।
- تَبْيَانًا: हर चीज़ को स्पष्ट करने वाला, खोलकर बयान करने वाला।
- هُدًى: मार्गदर्शन, सत्य की राह दिखाने वाला।
- رَحْمَةً: दया, रहमत।
- بُشْرَى: शुभ सूचना, खुशखबरी।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! उस दिन को याद करो जब हम हर उम्मत में से उन्हीं की जाति का एक गवाह खड़ा करेंगे, जो उनके कर्मों की गवाही देगा—चाहे वे ईमान पर हों या कुफ़्र पर। यह गवाह उन्हीं में से होगा, उन्हीं की भाषा बोलने वाला, ताकि उसकी गवाही पूरी तरह स्पष्ट और न्यायपूर्ण हो। और ऐ मुहम्मद! हम तुम्हें इन सब उम्मतों पर गवाह बनाकर लाएँगे, यानी तुम अपनी उम्मत और पूरी मानवजाति पर साक्षी होगे कि तुमने उन्हें सत्य का संदेश पहुँचा दिया।
और हमने तुम पर यह क़ुरआन उतारा है, जो हर उस चीज़ को स्पष्ट करता है जिसकी लोगों को ज़रूरत है—हलाल और हराम के आदेश, इनाम और सज़ा के नियम, अच्छे और बुरे कर्मों की पहचान, और आख़िरत की तैयारी का तरीक़ा। यह क़िताब गुमराही से निकालकर सीधी राह दिखाने वाली है, और उन लोगों के लिए रहमत है जो इसे मानते हैं और इस पर अमल करते हैं। साथ ही, यह उन मुसलमानों के लिए खुशखबरी है जो अल्लाह पर ईमान लाए और नेक कर्म किए, कि उनके लिए जन्नत की स्थायी नेमतें हैं।
फ़ायदे (उपदेश):
- हर उम्मत के साथ न्याय: अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता; हर जाति के पास उसका अपना नबी और गवाह होगा, जो उनकी भाषा और समझ के अनुसार साक्षी देगा। यह अल्लाह की पूर्ण न्यायप्रियता को दर्शाता है।
- क़ुरआन की पूर्णता: यह किताब हर ज़रूरी चीज़ को स्पष्ट करती है—चाहे वह अक़ीदा हो, इबादत हो, मुआमलात हो या आख़िरत की तैयारी। इससे हमें यह भरोसा मिलता है कि हमारे पास पूरा मार्गदर्शन है, और हमें किसी और की ओर देखने की ज़रूरत नहीं।
- रहमत और खुशखबरी: क़ुरआन सिर्फ़ किताब नहीं, बल्कि रहमत है—जो इसे पढ़ता और समझता है, उसके दिल को सुकून मिलता है। और यह मुसलमानों के लिए जन्नत की खुशखबरी है, जो उन्हें नेक कर्मों पर प्रोत्साहित करती है।
- नबी की गवाही का महत्व: हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारे नबी हमारे कर्मों के गवाह होंगे। यह हमें अपने कर्मों को सुधारने और उन्हें सत्य के अनुरूप बनाने की प्रेरणा देता है, ताकि हम उस गवाही के दिन शर्मिंदा न हों।
- क़ुरआन पर अमल की ताक़ीद: यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उस पर अमल करने के लिए उतारा गया है। जो इसे अपनाता है, वह हिदायत और रहमत पाता है।
📜 आयत 87-91 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 89
सूरा अन-नहल आयत 89 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वह दिन याद करो जिस दिन हम हर एक…सूरा आयत 89/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 87–91. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








