अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- طَائِرَهُ (ताइरहु): उसका कर्म, उसका अच्छा या बुरा किया हुआ काम। (अरबी में किसी व्यक्ति के अच्छे या बुरे भाग्य और उसके कर्मों को 'ताइर' कहा जाता है।)
- أَلْزَمْنَاهُ (अल्ज़म्नाहु): हमने उसे लाज़िम कर दिया, उसके साथ जोड़ दिया।
- عُنُقِهِ (उनुक़िही): उसकी गर्दन के साथ।
- مَنشُورًا (मंशूरन): खुला हुआ, फैलाया हुआ, जिसे पढ़ने के लिए खोल दिया गया हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने हर इंसान के कर्मों को उसी की गर्दन से बाँध दिया है। यानी जो अच्छाई या बुराई इंसान दुनिया में करता है, वह उससे अलग नहीं होती, बल्कि उसी के साथ चिपकी रहती है, ठीक उसी तरह जैसे एक हार या तावीज़ गर्दन में लटका रहता है। यह इस बात की निशानी है कि इंसान अपने किए का फल खुद भुगतेगा, न किसी और का बोझ उठाएगा और न ही उसका बोझ किसी और पर डाला जाएगा। गर्दन का विशेष रूप से ज़िक्र इसलिए किया गया क्योंकि गर्दन में बंधी हुई चीज़ सबसे ज़्यादा लाज़िम और साथ रहने वाली होती है, जिससे छुटकारा पाना मुश्किल होता है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि क़यामत के दिन हम उस इंसान के लिए एक किताब (उसके आमाल का रिकॉर्ड) निकालेंगे, जो उसे खुली हुई मिलेगी। उस किताब में उसके सभी कर्म — छोटे और बड़े, अच्छे और बुरे — दर्ज होंगे। वह किताब उसके सामने इस तरह फैलाई जाएगी कि वह उसे आसानी से पढ़ सके और उस पर कोई बात छिपी न होगी। यह दृश्य उसके लिए या तो खुशी का कारण बनेगा यदि उसके कर्म अच्छे होंगे, या शर्मिंदगी और पछतावे का कारण बनेगा यदि उसके कर्म बुरे होंगे।
फ़ायदे (सीख):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इस्लाम में हर इंसान अपने कर्मों का खुद ज़िम्मेदार है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे के गुनाह का बोझ नहीं उठाएगा। यह न्याय का बेहतरीन सिद्धांत है जो इंसान को अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास कराता है।
- हमारे हर अच्छे और बुरे कर्म को अल्लाह के यहाँ दर्ज किया जा रहा है। यह बात इंसान को अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देती है और बुरे कर्मों से रोकती है, क्योंकि एक दिन सब कुछ खुली किताब की तरह सामने रख दिया जाएगा।
- यह आयत हमें यह विश्वास दिलाती है कि अल्लाह का इंसाफ़ पूर्ण है। कोई भी अच्छा काम छोटा नहीं है और कोई भी बुरा काम छिपा नहीं रहेगा। यही वह चीज़ है जो इंसान को ज़िंदगी में सच्चाई और नेकी की राह पर चलने की ताक़त देती है।
- क़यामत के दिन हमारे आमाल की किताब हमारे सामने खुली होगी — यह हमें दुनिया की ज़िंदगी में सावधान रहने की तालीम देती है कि हम अपने हर लफ़्ज़, हर हरकत और हर नीयत को अल्लाह की निगरानी में समझें और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ।
📜 आयत 11-15 — अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 13
सूरा अल-इसरा आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने हर आदमी के नामए अमल को उसके गले…सूरा आयत 13/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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