अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- آيَتَيْنِ: दो निशानियाँ (अल्लाह की कुदरत और वहदानियत की दो स्पष्ट निशानियाँ)।
- فَمَحَوْنَا: हमने मिटा दिया (यानी रात की रोशनी को खत्म कर दिया)।
- مُبْصِرَةً: रोशन और चमकदार (जिससे चीज़ें देखी जा सकें)।
- لِتَبْتَغُوا: ताकि तुम तलाश करो (यानी कमाओ और कोशिश करो)।
- فَضْلًا: अल्लाह की रिज़्क़ और दया (रोज़ी और भलाई)।
- عَدَدَ السِّنِينَ وَالْحِسَابَ: सालों की गिनती और (महीनों, दिनों, घंटों का) हिसाब।
- فَصَّلْنَاهُ تَفْصِيلًا: हमने हर चीज़ को स्पष्ट और विस्तार से बयान कर दिया।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने रात और दिन को अपनी कुदरत की दो बड़ी निशानियाँ बनाया है, जो उसकी वहदानियत (एकता) और ताक़त पर दलील देती हैं। उसने रात की निशानी को मिटा दिया, यानी उसे अंधेरा बना दिया, ताकि लोग उसमें आराम और सुकून पाएँ। और दिन की निशानी को रोशन और चमकदार बनाया, ताकि लोग उसकी रोशनी में अपने काम-काज कर सकें, रिज़्क़ की तलाश कर सकें और अपनी ज़िंदगी के मुआमलात (लेन-देन) को अंजाम दे सकें।
इसी तरह, रात और दिन के बदलते रहने से लोग सालों की गिनती और महीनों-दिनों का हिसाब जान सकते हैं, जिससे वे अपने धार्मिक और दुनियावी मामलों को व्यवस्थित कर सकें — जैसे रोज़े, हज, ज़कात, उधार के मुआमलात, और दूसरे काम। अगर रात और दिन एक जैसे रहते, तो न तो समय का पता चलता और न ही इबादतों के औक़ात (समय) मालूम होते।
अल्लाह ने यह भी फ़रमाया कि उसने हर चीज़ को साफ-साफ और पूरे विस्तार से बयान कर दिया है, ताकि सच और झूठ, हक़ और बातिल में फ़र्क़ साफ़ हो जाए और लोगों के लिए कोई बहाना न बचे।
फ़ायदे (सीख):
- रात और दिन का बदलना अल्लाह की कुदरत की ज़िंदा निशानी है, जो हमें उसकी याद दिलाती है और उसकी वहदानियत पर ईमान लाने की तरफ़ बुलाती है।
- दिन को रोशन और रात को अंधेरा बनाना अल्लाह की रहमत है — रात आराम के लिए और दिन कमाई और ज़रूरतें पूरी करने के लिए। इससे हमें अपनी ज़िंदगी में संतुलन रखना सीखना चाहिए।
- समय का हिसाब और सालों की गिनती सिर्फ़ दुनियावी मुआमलात के लिए नहीं, बल्कि इबादतों (जैसे रोज़ा, हज, नमाज़ के औक़ात) के लिए भी ज़रूरी है — यह अल्लाह की तरफ़ से एक बड़ी नेमत है।
- अल्लाह ने हर चीज़ को स्पष्ट कर दिया है, इसलिए हमें कुरान और उसकी तालीमात पर अमल करना चाहिए, क्योंकि इसमें हमारी दुनिया और आख़िरत की भलाई है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि कुदरत के नज़ारों पर ग़ौर करना इबादत है — जो इंसान इन निशानियों पर सोचता है, वह अल्लाह के और करीब हो जाता है।
📜 आयत 10-14 — अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 12
सूरा अल-इसरा आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने रात और दिन को (अपनी क़ुदरत की) दो…सूरा आयत 12/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








