अल-कहफ · 6/110
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-कहफ
فَلَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَّفْسَكَ عَلَىٰ آثَارِهِمْ إِن لَّمْ يُؤْمِنُوا بِهَٰذَا الْحَدِيثِ أَسَفًا ۝٦
Fala`allaka baakhi`un nafsaka `alaaa aasaarihim illam yu;minoo bihaazal hadeesi asafaa
📖 हिंदी अर्थ
तो (ऐ रसूल) अगर ये लोग इस बात को न माने तो यायद तुम मारे अफसोस के उनके पीछे अपनी जान दे डालोगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَاخِعٌ (बाख़ि): अपनी जान को हलाक करने वाला, यानी खुद को तबाह करने वाला।
  • عَلَى آثَارِهِمْ (अला आसारिहिम): उनके पीछे, उनके मुंह मोड़ने और तुमसे दूर जाने के बाद।
  • أَسَفًا (असफ़न): अत्यधिक गम और दुख के कारण।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! तुम अपने ऊपर ज़ुल्म न करो। ये लोग जब तुम्हारी बात नहीं मानते और तुमसे मुंह मोड़कर चले जाते हैं, तो तुम्हारा दिल उनके हाल पर इतना जलता है कि तुम अपनी जान ही हलाक करने पर आमादा हो जाते हो। तुम्हें लगता है कि काश! ये लोग इस क़ुरआन पर ईमान ले आते, तो कितना अच्छा होता। लेकिन ऐ रसूल! ऐसा मत करो। ये तुम्हारा काम नहीं है कि तुम लोगों को ज़बरदस्ती मोमिन बनाओ। तुम्हारा काम तो सिर्फ पैग़ाम पहुंचाना है। हिदायत देना तो अल्लाह के हाथ में है। वही जिसे चाहे हिदायत देता है और जिसे चाहे गुमराही में छोड़ देता है।

ये क़ुरआन एक ऐसी रोशनी है जो सच्चे दिल वालों को राह दिखाती है। जो लोग इस पर ईमान लाते हैं, वही कामयाब हैं। और जो इससे मुंह मोड़ते हैं, उनका नुक़सान उन्हीं का है, तुम्हारा नहीं। तुम तो सिर्फ एक रहनुमा हो, मजबूर करने वाले नहीं। अल्लाह ने तुम्हें जो ज़िम्मेदारी दी है, वो तुमने पूरी कर दी। अब अगर वो नहीं मानते, तो उनका हिसाब अल्लाह के सुपुर्द है।

ऐ नबी! तुम्हारा दर्द और तुम्हारी मोहब्बत उनके लिए बहुत बड़ी नेमत है। लेकिन याद रखो, हिदायत अल्लाह के हाथ में है। तुम अपनी जान को इस कदर गम में न डुबोओ। तुम्हारा काम पैग़ाम पहुंचाना है, और तुमने वो पूरे हुस्न के साथ अंजाम दिया। अब अल्लाह पर भरोसा रखो और सब्र करो। ये क़ुरआन उन लोगों के लिए रहमत और शिफा है जो इस पर ईमान लाते हैं। और जो लोग इससे मुंह मोड़ते हैं, उनके लिए ये हुज्जत है। तुम्हें उनके ईमान न लाने का गम नहीं करना चाहिए, बल्कि अल्लाह की रहमत पर भरोसा रखना चाहिए।



📜 आयत 4-8 — सूरा अल-कहफ

4وَيُنذِرَ الَّذِينَ قَالُوا اتَّخَذَ اللَّهُ وَلَدًا
और जो लोग इसके क़ाएल हैं कि ख़ुदा औलाद रखता है उनको (अज़ाब से) डराओ
5مَّا لَهُم بِهِ مِنْ عِلْمٍ وَلَا لِآبَائِهِمْ ۚ كَبُرَتْ كَلِمَةً تَخْرُجُ مِنْ أَفْوَاهِهِمْ ۚ إِن يَقُولُونَ إِلَّا كَذِبًا
न तो उन्हीं को उसकी कुछ खबर है और न उनके बाप दादाओं ही को थी (ये) बड़ी सख्त बात है जो उनके मुँह से निकलती है ये लोग झूठ मूठ के सिवा (कुछ और) बोलते ही नहीं
6فَلَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَّفْسَكَ عَلَىٰ آثَارِهِمْ إِن لَّمْ يُؤْمِنُوا بِهَٰذَا الْحَدِيثِ أَسَفًا
तो (ऐ रसूल) अगर ये लोग इस बात को न माने तो यायद तुम मारे अफसोस के उनके पीछे अपनी जान दे डालोगे
7إِنَّا جَعَلْنَا مَا عَلَى الْأَرْضِ زِينَةً لَّهَا لِنَبْلُوَهُمْ أَيُّهُمْ أَحْسَنُ عَمَلًا
और जो कुछ रुए ज़मीन पर है हमने उसकी ज़ीनत (रौनक़) क़रार दी ताकि हम लोगों का इम्तिहान लें कि उनमें से कौन सबसे अच्छा चलन का है
8وَإِنَّا لَجَاعِلُونَ مَا عَلَيْهَا صَعِيدًا جُرُزًا
और (फिर) हम एक न एक दिन जो कुछ भी इस पर है (सबको मिटा करके) चटियल मैदान बना देगें
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीअवतरण स्थान
6आयत

अनुवाद — अल-कहफ 6

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Thursday, October 1, 2026

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