अल-कहफ · 7/110
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-कहफ
إِنَّا جَعَلْنَا مَا عَلَى الْأَرْضِ زِينَةً لَّهَا لِنَبْلُوَهُمْ أَيُّهُمْ أَحْسَنُ عَمَلًا ۝٧
Innaa ja`alnaa ma `alal ardi zeenatal lahaa linabluwahum ayyuhum ahsanu `amalaa
📖 हिंदी अर्थ
और जो कुछ रुए ज़मीन पर है हमने उसकी ज़ीनत (रौनक़) क़रार दी ताकि हम लोगों का इम्तिहान लें कि उनमें से कौन सबसे अच्छा चलन का है

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अनुवाद — Tafsir

إِنَّا جَعَلْنَا مَا عَلَى الْأَرْضِ زِينَةً لَّهَا لِنَبْلُوَهُمْ أَيُّهُمْ أَحْسَنُ عَمَلًا

शब्दों के अर्थ:

  • زِينَةً: सजावट, शोभा, सुंदरता का साधन
  • لِنَبْلُوَهُمْ: ताकि हम उन्हें परखें/आज़माएँ
  • أَحْسَنُ عَمَلًا: सबसे अच्छा काम करने वाला

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि हमने धरती पर जो कुछ भी रखा है—चाहे वह प्राकृतिक सौंदर्य हो, पहाड़, नदियाँ, वनस्पतियाँ, जानवर, खनिज पदार्थ, या मनुष्यों के लिए उपयोगी चीज़ें—यह सब धरती की शोभा और सजावट है। यह सब कुछ अकारण नहीं बनाया गया, बल्कि इसका एक महान उद्देश्य है: हम लोगों को परखना कि उनमें से कौन सबसे अच्छा काम करता है।

यह परीक्षा इस बात की है कि मनुष्य इन नेमतों और सजावटों को देखकर क्या रवैया अपनाता है। क्या वह इन्हें अल्लाह की नेमत मानकर शुक्र अदा करता है और अल्लाह की इबादत में लगा रहता है, या फिर इन्हीं में खोकर अल्लाह को भूल जाता है? क्या वह इन सांसारिक चीज़ों को अपना लक्ष्य बना लेता है या इन्हें आख़िरत की तैयारी का ज़रिया समझता है?

"अच्छा काम" वह है जो दो शर्तों पर आधारित हो: पहली, ख़ालिस अल्लाह के लिए हो (इख़लास), और दूसरी, अल्लाह के रसूल ﷺ के तरीके के अनुसार हो (इत्तिबा-ए-सुन्नत)। जो व्यक्ति इन दोनों शर्तों के साथ अमल करेगा, वही सबसे अच्छा काम करने वाला है।

यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की सारी चीज़ें—चाहे वह धन-दौलत, ऐशो-आराम, सुंदर इमारतें, बाग़-बग़ीचे, या कोई भी सांसारिक सुख—यह सब असली चीज़ नहीं हैं। यह तो केवल परीक्षा का सामान हैं। असली कामयाबी उसी की है जो इन चीज़ों को देखकर अल्लाह को याद करे, उसकी नेमतों का शुक्र अदा करे, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढाले।

अल्लाह तआला हमें यह ताकीद कर रहे हैं कि हम इस दुनिया की चमक-दमक में धोखा न खाएँ। यह सब कुछ एक दिन खत्म हो जाएगा। जो चीज़ हमेशा रहने वाली है वह है हमारे अच्छे कर्म। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर पल को अल्लाह की इबादत, अच्छे कामों और लोगों की भलाई में लगाएँ, ताकि अल्लाह की परीक्षा में हम कामयाब हों और जन्नत की नेमतें हासिल करें।



📜 आयत 5-9 — सूरा अल-कहफ

5مَّا لَهُم بِهِ مِنْ عِلْمٍ وَلَا لِآبَائِهِمْ ۚ كَبُرَتْ كَلِمَةً تَخْرُجُ مِنْ أَفْوَاهِهِمْ ۚ إِن يَقُولُونَ إِلَّا كَذِبًا
न तो उन्हीं को उसकी कुछ खबर है और न उनके बाप दादाओं ही को थी (ये) बड़ी सख्त बात है जो उनके मुँह से निकलती है ये लोग झूठ मूठ के सिवा (कुछ और) बोलते ही नहीं
6فَلَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَّفْسَكَ عَلَىٰ آثَارِهِمْ إِن لَّمْ يُؤْمِنُوا بِهَٰذَا الْحَدِيثِ أَسَفًا
तो (ऐ रसूल) अगर ये लोग इस बात को न माने तो यायद तुम मारे अफसोस के उनके पीछे अपनी जान दे डालोगे
7إِنَّا جَعَلْنَا مَا عَلَى الْأَرْضِ زِينَةً لَّهَا لِنَبْلُوَهُمْ أَيُّهُمْ أَحْسَنُ عَمَلًا
और जो कुछ रुए ज़मीन पर है हमने उसकी ज़ीनत (रौनक़) क़रार दी ताकि हम लोगों का इम्तिहान लें कि उनमें से कौन सबसे अच्छा चलन का है
8وَإِنَّا لَجَاعِلُونَ مَا عَلَيْهَا صَعِيدًا جُرُزًا
और (फिर) हम एक न एक दिन जो कुछ भी इस पर है (सबको मिटा करके) चटियल मैदान बना देगें
9أَمْ حَسِبْتَ أَنَّ أَصْحَابَ الْكَهْفِ وَالرَّقِيمِ كَانُوا مِنْ آيَاتِنَا عَجَبًا
(ऐ रसूल) क्या तुम ये ख्याल करते हो कि असहाब कहफ व रक़ीम (खोह) और (तख्ती वाले) हमारी (क़ुदरत की) निशानियों में से एक अजीब (निशानी) थे
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीअवतरण स्थान
7आयत

अनुवाद — अल-कहफ 7

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Monday, September 28, 2026

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