अल-कहफ · 8/110
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-कहफ
وَإِنَّا لَجَاعِلُونَ مَا عَلَيْهَا صَعِيدًا جُرُزًا ۝٨
Wa innaa lajaa `iloona maa `alaihaa sa`aeedan juruzaa
📖 हिंदी अर्थ
और (फिर) हम एक न एक दिन जो कुछ भी इस पर है (सबको मिटा करके) चटियल मैदान बना देगें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • صَعِيدًا (स'ईदन): चिकनी और समतल भूमि, जिस पर कुछ भी न उगता हो।
  • جُرُزًا (जुरुज़न): सूखी, कठोर और बंजर ज़मीन जिसमें कोई वनस्पति न हो।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में हमें दुनिया की अस्थायी ज़िंदगी की हक़ीक़त से आगाह कर रहे हैं। जिस धरती पर आज हरियाली है, खेत-खलिहान लहलहा रहे हैं, बाग़ात और नहरें हैं, वही ज़मीन एक दिन ऐसी बंजर और सुनसान हो जाएगी कि उस पर न कोई पेड़-पौधा होगा और न कोई जीव-जंतु। यह दुनिया की सारी रौनक़ें और सजावटें — महल, बाग़, दौलत, औलाद — सब कुछ मिट्टी में मिल जाएगा और वह सब कुछ एक चिकनी, सूखी और बेकार ज़मीन में तब्दील हो जाएगा।

यह बात हमें सिर्फ़ क़यामत के दिन की याद दिलाने के लिए नहीं कही गई, बल्कि इसका मक़सद यह है कि हम इस दुनिया की चमक-दमक पर मोहित न हों और इसे ही अपना सब कुछ न समझ लें। जिस तरह यह ज़मीन आज हरी-भरी है और कल बंजर हो जाएगी, उसी तरह यह पूरी दुनिया एक दिन ख़त्म होने वाली है। इसलिए अक़्लमंद इंसान वही है जो इस फ़ानी दुनिया को आख़िरत की खेती के लिए इस्तेमाल करे, न कि सिर्फ़ खेल-तमाशे और लज़्ज़तों में डूबा रहे।

यह आयत हमें सब्र और अमल की तरफ़ राह दिखाती है। जब हम जानते हैं कि यह दुनिया एक दिन ख़त्म हो जाएगी, तो हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत, नेक कामों और दूसरों की भलाई में गुज़ारें। यही वह चीज़ है जो हमारे काम आएगी जब यह सारी दुनिया बंजर हो जाएगी और हम अपने रब के सामने खड़े होंगे। अल्लाह तआला हमें दुनिया की मोहब्बत में आख़िरत को भूलने से बचाए और हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 6-10 — सूरा अल-कहफ

6فَلَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَّفْسَكَ عَلَىٰ آثَارِهِمْ إِن لَّمْ يُؤْمِنُوا بِهَٰذَا الْحَدِيثِ أَسَفًا
तो (ऐ रसूल) अगर ये लोग इस बात को न माने तो यायद तुम मारे अफसोस के उनके पीछे अपनी जान दे डालोगे
7إِنَّا جَعَلْنَا مَا عَلَى الْأَرْضِ زِينَةً لَّهَا لِنَبْلُوَهُمْ أَيُّهُمْ أَحْسَنُ عَمَلًا
और जो कुछ रुए ज़मीन पर है हमने उसकी ज़ीनत (रौनक़) क़रार दी ताकि हम लोगों का इम्तिहान लें कि उनमें से कौन सबसे अच्छा चलन का है
8وَإِنَّا لَجَاعِلُونَ مَا عَلَيْهَا صَعِيدًا جُرُزًا
और (फिर) हम एक न एक दिन जो कुछ भी इस पर है (सबको मिटा करके) चटियल मैदान बना देगें
9أَمْ حَسِبْتَ أَنَّ أَصْحَابَ الْكَهْفِ وَالرَّقِيمِ كَانُوا مِنْ آيَاتِنَا عَجَبًا
(ऐ रसूल) क्या तुम ये ख्याल करते हो कि असहाब कहफ व रक़ीम (खोह) और (तख्ती वाले) हमारी (क़ुदरत की) निशानियों में से एक अजीब (निशानी) थे
10إِذْ أَوَى الْفِتْيَةُ إِلَى الْكَهْفِ فَقَالُوا رَبَّنَا آتِنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا رَشَدًا
कि एक बारगी कुछ जवान ग़ार में आ पहुँचे और दुआ की-ऐ हमारे परवरदिगार हमें अपनी बारगाह से रहमत अता फरमा-और हमारे वास्ते हमारे काम में कामयाबी इनायत कर
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीअवतरण स्थान
8आयत

अनुवाद — अल-कहफ 8

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Wednesday, September 30, 2026

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