अल-बकरा · 134/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
تِلْكَ أُمَّةٌ قَدْ خَلَتْ ۖ لَهَا مَا كَسَبَتْ وَلَكُم مَّا كَسَبْتُمْ ۖ وَلَا تُسْأَلُونَ عَمَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ ۝١٣٤
Tilka ummatun qad khalat lahaa maa kasabat wa lakum maa kasabtum wa laa tus`aloona `ammaa kaano ya`maloon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ यहूद) वह लोग थे जो चल बसे जो उन्होंने कमाया उनके आगे आया और जो तुम कमाओगे तुम्हारे आगे आएगा और जो कुछ भी वह करते थे उसकी पूछगछ तुमसे नहीं होगी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • तिल्का (تِلْكَ): वह (समुदाय)
  • उम्मतुन (أُمَّةٌ): समुदाय, जमात
  • ख़लत (خَلَتْ): गुज़र चुकी, बीत चुकी
  • कसबत (كَسَبَتْ): कमाया, किया (अच्छा या बुरा)
  • ला तुस्अलून (لَا تُسْأَلُونَ): तुमसे पूछा नहीं जाएगा

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत मुसलमानों को एक बहुत बड़ा और अहम सबक़ सिखाती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये जो समुदाय (पिछले लोग, जैसे हज़रत इब्राहीम, इस्माइल, याक़ूब और उनकी औलाद) तुमसे पहले गुज़र चुके हैं, वे अपने कर्मों के साथ चले गए। उन्होंने जो कुछ भी किया — अच्छा या बुरा — उसका फल उन्हें मिलेगा। और तुम्हारे लिए वही है जो तुम ख़ुद कमाते हो। तुमसे उनके कर्मों के बारे में सवाल नहीं होगा, और न ही वे तुम्हारे कर्मों के बारे में पूछे जाएँगे। हर इंसान अपने किए का ज़िम्मेदार है।

यानी नेकी और बुराई का हिसाब बिल्कुल निजी है। कोई किसी का बोझ नहीं उठाएगा। न तो कोई अपने बाप-दादा की नेकियों से फ़ायदा उठा सकता है (जब तक वह ख़ुद नेक न हो), और न ही किसी के गुनाहों की सज़ा किसी और को दी जाएगी। अल्लाह के यहाँ सिर्फ़ और सिर्फ़ आपका अपना ईमान और आपका अपना अमल काम आएगा।

इस आयत में एक बहुत प्यारी और दिल को छू लेने वाली बात है — कि अल्लाह ने हर इंसान को आज़ादी दी है कि वह अपनी ज़िंदगी ख़ुद बनाए। न कोई उसके लिए शफ़ाअत (सिफ़ारिश) करके उसे जन्नत में डाल सकता है बग़ैर उसके अपने अमल के, और न कोई उसे जहन्नम में डाल सकता है बग़ैर उसके अपने कुकर्मों के। यह अल्लाह का बेइंतहा इंसाफ़ है — कि हर शख्स को उसकी मेहनत का पूरा-पूरा बदला मिलेगा।

और यह भी एक खूबसूरत पहलू है कि अगर आपके माँ-बाप या दादा-दादी ने कोई कमी की हो, तो उसका बोझ आप पर नहीं है। आपको अपनी ज़िंदगी की ज़िम्मेदारी ख़ुद उठानी है। इसलिए किसी और के कर्मों की चिंता छोड़कर अपने अमल की इस्लाह (सुधार) करें। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह हर अच्छे काम का अज्र (इनाम) देने वाला है, और वह किसी की मेहनत को ज़ाए (बेकार) नहीं करता।



📜 आयत 132-136 — अल-बकरा

132وَوَصَّىٰ بِهَا إِبْرَاهِيمُ بَنِيهِ وَيَعْقُوبُ يَا بَنِيَّ إِنَّ اللَّهَ اصْطَفَىٰ لَكُمُ الدِّينَ فَلَا تَمُوتُنَّ إِلَّا وَأَنتُم مُّسْلِمُونَ
और इसी तरीके क़ी इबराहीम ने अपनी औलाद से वसीयत की और याकूब ने (भी) कि ऐ फरज़न्दों खुदा ने तुम्हारे वास्ते इस दीन (इस्लाम) को पसन्द फरमाया है पस तुम हरगिज़ न मरना मगर मुसलमान ही होकर
133أَمْ كُنتُمْ شُهَدَاءَ إِذْ حَضَرَ يَعْقُوبَ الْمَوْتُ إِذْ قَالَ لِبَنِيهِ مَا تَعْبُدُونَ مِن بَعْدِي قَالُوا نَعْبُدُ إِلَٰهَكَ وَإِلَٰهَ آبَائِكَ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ إِلَٰهًا وَاحِدًا وَنَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ
(ऐ यहूद) क्या तुम उस वक्त मौजूद थे जब याकूब के सर पर मौत आ खड़ी हुईउस वक्त उन्होंने अपने बेटों से कहा कि मेरे बाद किसी की इबादत करोगे कहने लगे हम आप के माबूद और आप के बाप दादाओं इबराहीम व इस्माइल व इसहाक़ के माबूद व यकता खुदा की इबादत करेंगे और हम उसके फरमाबरदार हैं
134تِلْكَ أُمَّةٌ قَدْ خَلَتْ ۖ لَهَا مَا كَسَبَتْ وَلَكُم مَّا كَسَبْتُمْ ۖ وَلَا تُسْأَلُونَ عَمَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ
(ऐ यहूद) वह लोग थे जो चल बसे जो उन्होंने कमाया उनके आगे आया और जो तुम कमाओगे तुम्हारे आगे आएगा और जो कुछ भी वह करते थे उसकी पूछगछ तुमसे नहीं होगी
135وَقَالُوا كُونُوا هُودًا أَوْ نَصَارَىٰ تَهْتَدُوا ۗ قُلْ بَلْ مِلَّةَ إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا ۖ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِينَ
(यहूदी ईसाई मुसलमानों से) कहते हैं कि यहूद या नसरानी हो जाओ तो राहे रास्त पर आ जाओगे (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि हम इबराहीम के तरीक़े पर हैं जो बातिल से कतरा कर चलते थे और मुशरेकीन से न थे
136قُولُوا آمَنَّا بِاللَّهِ وَمَا أُنزِلَ إِلَيْنَا وَمَا أُنزِلَ إِلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَالْأَسْبَاطِ وَمَا أُوتِيَ مُوسَىٰ وَعِيسَىٰ وَمَا أُوتِيَ النَّبِيُّونَ مِن رَّبِّهِمْ لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِّنْهُمْ وَنَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ
(और ऐ मुसलमानों तुम ये) कहो कि हम तो खुदा पर ईमान लाए हैं और उस पर जो हम पर नाज़िल किया गया (कुरान) और जो सहीफ़े इबराहीम व इसमाइल व इसहाक़ व याकूब और औलादे याकूब पर नाज़िल हुए थे (उन पर) और जो किताब मूसा व ईसा को दी गई (उस पर) और जो और पैग़म्बरों को उनके परवरदिगार की तरफ से उन्हें दिया गया (उस पर) हम तो उनमें से किसी (एक) में भी तफरीक़ नहीं करते और हम तो खुदा ही के फरमाबरदार हैं
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अनुवाद — अल-बकरा 134

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Tuesday, August 18, 2026

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