Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- हُودًا: यहूदी बन जाओ।
- نَصَارَى: ईसाई बन जाओ।
- مِلَّةَ إِبْرَاهِيمَ: इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का धर्म और पंथ।
- حَنِيفًا: सत्य की ओर झुका हुआ, बातिल (असत्य) से हटकर एकेश्वरवाद (तौहीद) पर स्थिर रहने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यहूदियों ने मुसलमानों से कहा: "तुम लोग यहूदी बन जाओ, तभी तुम्हें सही मार्ग मिलेगा।" और ईसाइयों ने कहा: "नहीं, तुम ईसाई बन जाओ, तभी तुम हिदायत पाओगे।" दोनों गिरोह अपने-अपने धर्म को ही एकमात्र सत्य और मुक्ति का रास्ता बता रहे थे। अल्लाह तआला ने अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को आदेश दिया कि वे उन्हें उत्तर दें: "हम तुम्हारे दावों की परवाह नहीं करते, बल्कि हम इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के धर्म का अनुसरण करते हैं, जो हर बातिल और झूठे धर्म से हटकर सत्य की ओर झुके हुए थे। वे अल्लाह के साथ किसी को साझीदार नहीं बनाते थे, और न ही वे मुशरिकों (बहुदेववादियों) में से थे।" यह बात उन यहूदियों और ईसाइयों के लिए बड़ी फटकार थी, क्योंकि वे दावा करते थे कि वे इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की संतान और उनके धर्म पर हैं, जबकि उन्होंने तौहीद (एकेश्वरवाद) को छोड़कर शिर्क (बहुदेववाद) और तहरीफ़ (धर्मग्रंथों में परिवर्तन) का रास्ता अपना लिया था। इसके विपरीत, मुसलमान सच्चे अर्थों में इब्राहीमी धर्म के अनुयायी हैं, क्योंकि वे उसी शुद्ध एकेश्वरवाद पर चलते हैं जिस पर इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) थे।
फ़ायदे (लाभ):
- यह आयत सिखाती है कि सच्ची हिदायत किसी विशेष समुदाय या जाति के साथ जुड़ी नहीं है, बल्कि सत्य की खोज और उस पर अमल से मिलती है। इसलिए हमें अंधी परंपरा या पूर्वजों के अनुसरण के बजाय कुरआन और सुन्नत की रोशनी में सत्य को अपनाना चाहिए।
- इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का धर्म ही वह आधार है जो सभी नबियों की शिक्षाओं का सार है — अल्लाह की इबादत और उसके साथ किसी को साझी न बनाना। यह हमें याद दिलाता है कि इस्लाम कोई नया धर्म नहीं, बल्कि उसी सत्य का नाम है जो आदम (अलैहिस्सलाम) से लेकर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तक सभी नबियों की शिक्षा रहा है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि जब कोई हमें अपने धर्म या विचारधारा में शामिल होने के लिए बुलाए, तो हमें बिना डरे और बिना झिझके सत्य का झंडा बुलंद रखना चाहिए और अपने ईमान की रक्षा करनी चाहिए।
- यहाँ से हमें यह भी सीख मिलती है कि सच्चा मुसलमान वही है जो हर प्रकार के शिर्क से दूर रहे और अपने जीवन को पूरी तरह अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा के लिए समर्पित कर दे, जैसा कि इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने किया।
📜 आयत 133-137 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 135
सूरा अल-बकरा आयत 135 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (यहूदी ईसाई मुसलमानों से) कहते हैं कि यहूद या नसरानी…सूरा आयत 135/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 133–137. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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