अल-बकरा · 219/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
۞ يَسْأَلُونَكَ عَنِ الْخَمْرِ وَالْمَيْسِرِ ۖ قُلْ فِيهِمَا إِثْمٌ كَبِيرٌ وَمَنَافِعُ لِلنَّاسِ وَإِثْمُهُمَا أَكْبَرُ مِن نَّفْعِهِمَا ۗ وَيَسْأَلُونَكَ مَاذَا يُنفِقُونَ قُلِ الْعَفْوَ ۗ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الْآيَاتِ لَعَلَّكُمْ تَتَفَكَّرُونَ ۝٢١٩
Yas`aloonaka `anilkhamri walmaisiri qul feehimaaa ismun kabeerunw wa manaafi`u linnaasi wa ismuhumaa akbaru min naf`ihimaa; wa yas`aloonaka maaza yunfiqoona qulil-`afw; kazaalika yubaiyinul laahu lakumul-aayaati la`allakum tatafakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुमसे लोग शराब और जुए के बारे में पूछते हैं तो तुम उन से कह दो कि इन दोनो में बड़ा गुनाह है और कुछ फायदे भी हैं और उन के फायदे से उन का गुनाह बढ़ के है और तुम से लोग पूछते हैं कि ख़ुदा की राह में क्या ख़र्च करे तुम उनसे कह दो कि जो तुम्हारे ज़रुरत से बचे यूँ ख़ुदा अपने एहकाम तुम से साफ़ साफ़ बयान करता है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अल-ख़म्र (शराब): हर वह चीज़ जो अक़्ल को ढक दे और उसे ज़ाइल कर दे, चाहे वह पीने की चीज़ हो या खाने की।
  • अल-मैसिर (जुआ): वह तरीक़ा जिसमें दोनों पक्षों के बीच शर्त लगाकर माल हासिल किया जाए, यानी जुआ और सट्टेबाज़ी।
  • अल-अफ़व (عفواً): ज़रूरत से ज़्यादा माल, यानी जो रक़म इंसान की बुनियादी ज़रूरियों से बढ़कर हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आपके साथी आपसे शराब और जुए के बारे में पूछते हैं। शराब वह चीज़ है जो अक़्ल को ज़ाइल कर देती है, और जुआ वह तरीक़ा है जिसमें इंसान बिना मेहनत के दूसरे का माल हड़पने की कोशिश करता है। इन दोनों चीज़ों में बड़ा गुनाह है, क्योंकि ये इंसान को अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल कर देती हैं, आपस में दुश्मनी और बुग़्ज़ पैदा करती हैं, माल को बर्बाद करती हैं और अक़्ल को ख़त्म कर देती हैं। हाँ, इनमें कुछ दुनियावी फ़ायदे भी हैं, जैसे शराब पीने से कुछ लोगों को सुरूर और ख़ुशी महसूस होती है, और जुए से बिना मेहनत के माल हासिल हो जाता है। लेकिन इनके नुक़सान और गुनाह इनके फ़ायदों से कहीं ज़्यादा बड़े हैं। यही वजह है कि अल्लाह ने इन्हें हराम क़रार दिया, क्योंकि जिस चीज़ का नुक़सान फ़ायदे से ज़्यादा हो, उसे अक़्लमंद इंसान कभी इख़्तियार नहीं करता।

और ऐ नबी! आपके साथी आपसे पूछते हैं कि हम अल्लाह की राह में कितना ख़र्च करें? तो आप उन्हें बता दें कि अपनी ज़रूरत से ज़्यादा माल ख़र्च करो। यानी जो रक़म तुम्हारी बुनियादी ज़रूरतों से बढ़कर हो, उसे अल्लाह की राह में दो। यह हुक्म शुरुआती दौर में था, बाद में अल्लाह ने ज़कात का नियम मुक़र्रर किया, जिसमें ख़ास माल पर ख़ास निसाब के साथ ज़कात फ़र्ज़ की गई।

अल्लाह इसी तरह अपनी आयतों और अपने अहकाम को साफ़-साफ़ बयान करता है, ताकि तुम दुनिया और आख़िरत की भलाई के बारे में सोचो और समझो। यह बयान अल्लाह की रहमत और हिकमत का नतीजा है, जो तुम्हें सीधी राह दिखाता है और तुम्हारी भलाई चाहता है।


दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम हमेशा इंसान की भलाई चाहता है। अल्लाह ने शराब और जुए को हराम किया, क्योंकि ये इंसान की अक़्ल, माल और समाज को तबाह कर देते हैं। अगर हम इन चीज़ों से दूर रहें, तो हमारी ज़िंदगी में सुकून, भाईचारा और बरकत आएगी। साथ ही, अल्लाह हमें सिखाता है कि अपने माल में से दूसरों की मदद करो, यही सच्ची कामयाबी है। जब हम अल्लाह के हुक्मों पर अमल करेंगे, तो दुनिया में भी खुशहाल रहेंगे और आख़िरत में भी कामयाब होंगे।

🎧 सुनें

📜 आयत 217-221 — अल-बकरा

217يَسْأَلُونَكَ عَنِ الشَّهْرِ الْحَرَامِ قِتَالٍ فِيهِ ۖ قُلْ قِتَالٌ فِيهِ كَبِيرٌ ۖ وَصَدٌّ عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَكُفْرٌ بِهِ وَالْمَسْجِدِ الْحَرَامِ وَإِخْرَاجُ أَهْلِهِ مِنْهُ أَكْبَرُ عِندَ اللَّهِ ۚ وَالْفِتْنَةُ أَكْبَرُ مِنَ الْقَتْلِ ۗ وَلَا يَزَالُونَ يُقَاتِلُونَكُمْ حَتَّىٰ يَرُدُّوكُمْ عَن دِينِكُمْ إِنِ اسْتَطَاعُوا ۚ وَمَن يَرْتَدِدْ مِنكُمْ عَن دِينِهِ فَيَمُتْ وَهُوَ كَافِرٌ فَأُولَٰئِكَ حَبِطَتْ أَعْمَالُهُمْ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ۖ وَأُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
(ऐ रसूल) तुमसे लोग हुरमत वाले महीनों की निस्बत पूछते हैं कि (आया) जिहाद उनमें जायज़ है तो तुम उन्हें जवाब दो कि इन महीनों में जेहाद बड़ा गुनाह है और ये भी याद रहे कि ख़ुदा की राह से रोकना और ख़ुदा से इन्कार और मस्जिदुल हराम (काबा) से रोकना और जो उस के अहल है उनका मस्जिद से निकाल बाहर करना (ये सब) ख़ुदा के नज़दीक इस से भी बढ़कर गुनाह है और फ़ितना परदाज़ी कुश्ती ख़़ून से भी बढ़ कर है और ये कुफ्फ़ार हमेशा तुम से लड़ते ही चले जाएँगें यहाँ तक कि अगर उन का बस चले तो तुम को तुम्हारे दीन से फिरा दे और तुम में जो शख्स अपने दीन से फिरा और कुफ़्र की हालत में मर गया तो ऐसों ही का किया कराया सब कुछ दुनिया और आखेरत (दोनों) में अकारत है और यही लोग जहन्नुमी हैं (और) वह उसी में हमेशा रहेंगें
218إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَالَّذِينَ هَاجَرُوا وَجَاهَدُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ أُولَٰئِكَ يَرْجُونَ رَحْمَتَ اللَّهِ ۚ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और ख़ुदा की राह में हिजरत की और जिहाद किया यही लोग रहमते ख़ुदा के उम्मीदवार हैं और ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
219۞ يَسْأَلُونَكَ عَنِ الْخَمْرِ وَالْمَيْسِرِ ۖ قُلْ فِيهِمَا إِثْمٌ كَبِيرٌ وَمَنَافِعُ لِلنَّاسِ وَإِثْمُهُمَا أَكْبَرُ مِن نَّفْعِهِمَا ۗ وَيَسْأَلُونَكَ مَاذَا يُنفِقُونَ قُلِ الْعَفْوَ ۗ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الْآيَاتِ لَعَلَّكُمْ تَتَفَكَّرُونَ
(ऐ रसूल) तुमसे लोग शराब और जुए के बारे में पूछते हैं तो तुम उन से कह दो कि इन दोनो में बड़ा गुनाह है और कुछ फायदे भी हैं और उन के फायदे से उन का गुनाह बढ़ के है और तुम से लोग पूछते हैं कि ख़ुदा की राह में क्या ख़र्च करे तुम उनसे कह दो कि जो तुम्हारे ज़रुरत से बचे यूँ ख़ुदा अपने एहकाम तुम से साफ़ साफ़ बयान करता है
220فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ۗ وَيَسْأَلُونَكَ عَنِ الْيَتَامَىٰ ۖ قُلْ إِصْلَاحٌ لَّهُمْ خَيْرٌ ۖ وَإِن تُخَالِطُوهُمْ فَإِخْوَانُكُمْ ۚ وَاللَّهُ يَعْلَمُ الْمُفْسِدَ مِنَ الْمُصْلِحِ ۚ وَلَوْ شَاءَ اللَّهُ لَأَعْنَتَكُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
ताकि तुम दुनिया और आख़िरत (के मामलात) में ग़ौर करो और तुम से लोग यतीमों के बारे में पूछते हैं तुम (उन से) कह दो कि उनकी (इसलाह दुरुस्ती) बेहतर है और अगर तुम उन से मिलजुल कर रहो तो (कुछ हर्ज) नहीं आख़िर वह तुम्हारें भाई ही तो हैं और ख़ुदा फ़सादी को ख़ैर ख्वाह से (अलग ख़ूब) जानता है और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम को मुसीबत में डाल देता बेशक ख़ुदा ज़बरदस्त हिक़मत वाला है
221وَلَا تَنكِحُوا الْمُشْرِكَاتِ حَتَّىٰ يُؤْمِنَّ ۚ وَلَأَمَةٌ مُّؤْمِنَةٌ خَيْرٌ مِّن مُّشْرِكَةٍ وَلَوْ أَعْجَبَتْكُمْ ۗ وَلَا تُنكِحُوا الْمُشْرِكِينَ حَتَّىٰ يُؤْمِنُوا ۚ وَلَعَبْدٌ مُّؤْمِنٌ خَيْرٌ مِّن مُّشْرِكٍ وَلَوْ أَعْجَبَكُمْ ۗ أُولَٰئِكَ يَدْعُونَ إِلَى النَّارِ ۖ وَاللَّهُ يَدْعُو إِلَى الْجَنَّةِ وَالْمَغْفِرَةِ بِإِذْنِهِ ۖ وَيُبَيِّنُ آيَاتِهِ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
और (मुसलमानों) तुम मुशरिक औरतों से जब तक ईमान न लाएँ निकाह न करो क्योंकि मुशरिका औरत तुम्हें अपने हुस्नो जमाल में कैसी ही अच्छी क्यों न मालूम हो मगर फिर भी ईमानदार औरत उस से ज़रुर अच्छी है और मुशरेकीन जब तक ईमान न लाएँ अपनी औरतें उन के निकाह में न दो और मुशरिक तुम्हे कैसा ही अच्छा क्यो न मालूम हो मगर फिर भी ईमानदार औरत उस से ज़रुर अच्छी है और मुशरेकीन जब तक ईमान न लाएँ अपनी औरतें उन के निकाह में न दो और मुशरिक तुम्हें क्या ही अच्छा क्यों न मालूम हो मगर फिर भी बन्दा मोमिन उनसे ज़रुर अच्छा है ये (मुशरिक मर्द या औरत) लोगों को दोज़ख़ की तरफ बुलाते हैं और ख़ुदा अपनी इनायत से बेहिश्त और बख़्शिस की तरफ बुलाता है और अपने एहकाम लोगों से साफ साफ बयान करता है ताकि ये लोग चेते
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीRevelation
219आयत

अनुवाद — अल-बकरा 219

सूरा अल-बकरा आयत 219 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुमसे लोग शराब और जुए के बारे में…

सूरा आयत 219/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 217–221. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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