अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अल-ख़म्र (शराब): हर वह चीज़ जो अक़्ल को ढक दे और उसे ज़ाइल कर दे, चाहे वह पीने की चीज़ हो या खाने की।
- अल-मैसिर (जुआ): वह तरीक़ा जिसमें दोनों पक्षों के बीच शर्त लगाकर माल हासिल किया जाए, यानी जुआ और सट्टेबाज़ी।
- अल-अफ़व (عفواً): ज़रूरत से ज़्यादा माल, यानी जो रक़म इंसान की बुनियादी ज़रूरियों से बढ़कर हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आपके साथी आपसे शराब और जुए के बारे में पूछते हैं। शराब वह चीज़ है जो अक़्ल को ज़ाइल कर देती है, और जुआ वह तरीक़ा है जिसमें इंसान बिना मेहनत के दूसरे का माल हड़पने की कोशिश करता है। इन दोनों चीज़ों में बड़ा गुनाह है, क्योंकि ये इंसान को अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल कर देती हैं, आपस में दुश्मनी और बुग़्ज़ पैदा करती हैं, माल को बर्बाद करती हैं और अक़्ल को ख़त्म कर देती हैं। हाँ, इनमें कुछ दुनियावी फ़ायदे भी हैं, जैसे शराब पीने से कुछ लोगों को सुरूर और ख़ुशी महसूस होती है, और जुए से बिना मेहनत के माल हासिल हो जाता है। लेकिन इनके नुक़सान और गुनाह इनके फ़ायदों से कहीं ज़्यादा बड़े हैं। यही वजह है कि अल्लाह ने इन्हें हराम क़रार दिया, क्योंकि जिस चीज़ का नुक़सान फ़ायदे से ज़्यादा हो, उसे अक़्लमंद इंसान कभी इख़्तियार नहीं करता।
और ऐ नबी! आपके साथी आपसे पूछते हैं कि हम अल्लाह की राह में कितना ख़र्च करें? तो आप उन्हें बता दें कि अपनी ज़रूरत से ज़्यादा माल ख़र्च करो। यानी जो रक़म तुम्हारी बुनियादी ज़रूरतों से बढ़कर हो, उसे अल्लाह की राह में दो। यह हुक्म शुरुआती दौर में था, बाद में अल्लाह ने ज़कात का नियम मुक़र्रर किया, जिसमें ख़ास माल पर ख़ास निसाब के साथ ज़कात फ़र्ज़ की गई।
अल्लाह इसी तरह अपनी आयतों और अपने अहकाम को साफ़-साफ़ बयान करता है, ताकि तुम दुनिया और आख़िरत की भलाई के बारे में सोचो और समझो। यह बयान अल्लाह की रहमत और हिकमत का नतीजा है, जो तुम्हें सीधी राह दिखाता है और तुम्हारी भलाई चाहता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम हमेशा इंसान की भलाई चाहता है। अल्लाह ने शराब और जुए को हराम किया, क्योंकि ये इंसान की अक़्ल, माल और समाज को तबाह कर देते हैं। अगर हम इन चीज़ों से दूर रहें, तो हमारी ज़िंदगी में सुकून, भाईचारा और बरकत आएगी। साथ ही, अल्लाह हमें सिखाता है कि अपने माल में से दूसरों की मदद करो, यही सच्ची कामयाबी है। जब हम अल्लाह के हुक्मों पर अमल करेंगे, तो दुनिया में भी खुशहाल रहेंगे और आख़िरत में भी कामयाब होंगे।
📜 आयत 217-221 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 219
सूरा अल-बकरा आयत 219 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुमसे लोग शराब और जुए के बारे में…सूरा आयत 219/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 217–221. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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