अल-बकरा · 250/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
وَلَمَّا بَرَزُوا لِجَالُوتَ وَجُنُودِهِ قَالُوا رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ ۝٢٥٠
Wa lammaa barazoo liJaaloota wa junoodihee qaaloo Rabbanaaa afrigh `alainaa sabranw wa sabbit aqdaamanaa wansurnaa `alal qawmil kaafireen
📖 हिंदी अर्थ
(ग़रज़) जब ये लोग जालूत और उसकी फौज के मुक़ाबले को निकले तो दुआ की ऐ मेरे परवरदिगार हमें कामिल सब्र अता फरमा और मैदाने जंग में हमारे क़दम जमाए रख और हमें काफिरों पर फतेह इनायत कर

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • بَرَزُوا: मैदान में निकल आए, सामने आ गए।
  • لِجَالُوتَ: जालूत (Goliath) के मुकाबले।
  • أَفْرِغْ: उँडेल दे, खूब बरसा दे।
  • صَبْرًا: धैर्य, सहनशीलता।
  • ثَبِّتْ أَقْدَامَنَا: हमारे पैरों को जमा दे, हमें स्थिर रख।
  • انْصُرْنَا: हमारी सहायता कर, हमें विजय दे।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत तालूत (अलैहिस्सलाम) और उनके साथी मोमिनीन मैदान में जालूत और उसकी विशाल सेना के सामने आ खड़े हुए, और उन्होंने अपनी आँखों से दुश्मन की भारी तादाद और ताकत देखी, तो वे घबराए नहीं, बल्कि अपने रब की ओर रुजू हुए। उन्होंने अल्लाह से तीन चीज़ें माँगीं:

  1. धैर्य और सब्र: उन्होंने कहा, "ऐ हमारे रब! हम पर सब्र का खज़ाना खोल दे, हमारे दिलों में ऐसा धैर्य पैदा कर जो इस मुश्किल घड़ी में हमें डगमगाने न दे।" यह सब्र सिर्फ़ जंग के मैदान के लिए नहीं था, बल्कि उस परीक्षा के लिए था जो अल्लाह ने उनके सामने रखी थी।
  2. पैरों की मज़बूती: उन्होंने अल्लाह से दुआ की कि वह उनके पैरों को जंग के मैदान में जमाए रखे, उनमें भागने की कमज़ोरी न आए, और वे दुश्मन के सामने डटे रहें। यह उनके दिलों की मज़बूती और अल्लाह पर भरोसे का इज़हार था।
  3. काफ़िरों पर विजय: उन्होंने अल्लाह से मदद माँगी कि वह उन्हें काफ़िर क़ौम पर ग़लबा और फ़तह अता करे, क्योंकि वे जानते थे कि असली फ़तह अल्लाह ही के हाथ में है, और वही अपने बंदों की मदद करता है।

यह दुआ उन्होंने उस वक़्त की जब वे दुश्मन के सामने आमने-सामने थे। यह उनके ईमान की पुख्तगी और अल्लाह पर पूरे भरोसे का सबूत है। उन्होंने अपनी ताकत और तादाद पर नहीं, बल्कि अल्लाह की मदद पर भरोसा किया।


फ़ायदे (सीख):

  1. मुसीबत के वक़्त अल्लाह से दुआ: जब इंसान मुश्किल में हो, तो उसे चाहिए कि वह अल्लाह की तरफ रुजू करे, क्योंकि असली मदद अल्लाह ही से मिलती है।
  2. सब्र की अहमियत: सब्र हर कामयाबी की कुंजी है। जंग के मैदान में भी सब्र ही फ़तह का ज़रिया बनता है। अल्लाह से सब्र माँगना सिखाया गया है।
  3. अल्लाह पर भरोसा: तालूत के साथियों ने दुश्मन की बड़ी तादाद देखकर हिम्मत नहीं हारी, बल्कि अल्लाह पर भरोसा किया। यह हमें सिखाता है कि हालात कितने भी खराब हों, अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।
  4. दुआ में तीन चीज़ें माँगना: इस दुआ में सब्र, स्थिरता और विजय माँगी गई है। यह हमें सिखाता है कि हमें अल्लाह से दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई माँगनी चाहिए।
  5. काफ़िरों के मुकाबले में हिम्मत: यह आयत हमें सिखाती है कि बुराई और कुफ्र के मुकाबले में हमें डटे रहना चाहिए और अल्लाह से मदद माँगनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही सच्चे मोमिनों की मदद करता है।


📜 आयत 248-252 — अल-बकरा

248وَقَالَ لَهُمْ نَبِيُّهُمْ إِنَّ آيَةَ مُلْكِهِ أَن يَأْتِيَكُمُ التَّابُوتُ فِيهِ سَكِينَةٌ مِّن رَّبِّكُمْ وَبَقِيَّةٌ مِّمَّا تَرَكَ آلُ مُوسَىٰ وَآلُ هَارُونَ تَحْمِلُهُ الْمَلَائِكَةُ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
और उन के नबी ने उनसे ये भी कहा इस के (मुनाजानिब अल्लाह) बादशाह होने की ये पहचान है कि तुम्हारे पास वह सन्दूक़ आ जाएगा जिसमें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तसकीन दे चीजें और उन तब्बुरक़ात से बचा खुचा होगा जो मूसा और हारुन की औलाद यादगार छोड़ गयी है और उस सन्दूक को फरिश्ते उठाए होगें अगर तुम ईमान रखते हो तो बेशक उसमें तुम्हारे वास्ते पूरी निशानी है
249فَلَمَّا فَصَلَ طَالُوتُ بِالْجُنُودِ قَالَ إِنَّ اللَّهَ مُبْتَلِيكُم بِنَهَرٍ فَمَن شَرِبَ مِنْهُ فَلَيْسَ مِنِّي وَمَن لَّمْ يَطْعَمْهُ فَإِنَّهُ مِنِّي إِلَّا مَنِ اغْتَرَفَ غُرْفَةً بِيَدِهِ ۚ فَشَرِبُوا مِنْهُ إِلَّا قَلِيلًا مِّنْهُمْ ۚ فَلَمَّا جَاوَزَهُ هُوَ وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ قَالُوا لَا طَاقَةَ لَنَا الْيَوْمَ بِجَالُوتَ وَجُنُودِهِ ۚ قَالَ الَّذِينَ يَظُنُّونَ أَنَّهُم مُّلَاقُو اللَّهِ كَم مِّن فِئَةٍ قَلِيلَةٍ غَلَبَتْ فِئَةً كَثِيرَةً بِإِذْنِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ مَعَ الصَّابِرِينَ
फिर जब तालूत लशकर समैत (शहर ऐलिया से) रवाना हुआ तो अपने साथियों से कहा देखो आगे एक नहर मिलेगी इस से यक़ीनन ख़ुदा तुम्हारे सब्र की आज़माइश करेगा पस जो शख्स उस का पानी पीयेगा मुझे (कुछ वास्ता) नही रखता और जो उस को नही चखेगा वह बेशक मुझ से होगा मगर हाँ जो अपने हाथ से एक (आधा चुल्लू भर के पी) ले तो कुछ हर्ज नही पस उन लोगों ने न माना और चन्द आदमियों के सिवा सब ने उस का पानी पिया ख़ैर जब तालूत और जो मोमिनीन उन के साथ थे नहर से पास हो गए तो (ख़ास मोमिनों के सिवा) सब के सब कहने लगे कि हम में तो आज भी जालूत और उसकी फौज से लड़ने की सकत नहीं मगर वह लोग जिनको यक़ीन है कि एक दिन ख़ुदा को मुँह दिखाना है बेधड़क बोल उठे कि ऐसा बहुत हुआ कि ख़ुदा के हुक्म से छोटी जमाअत बड़ी जमाअत पर ग़ालिब आ गयी है और ख़ुदा सब्र करने वालों का साथी है
250وَلَمَّا بَرَزُوا لِجَالُوتَ وَجُنُودِهِ قَالُوا رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ
(ग़रज़) जब ये लोग जालूत और उसकी फौज के मुक़ाबले को निकले तो दुआ की ऐ मेरे परवरदिगार हमें कामिल सब्र अता फरमा और मैदाने जंग में हमारे क़दम जमाए रख और हमें काफिरों पर फतेह इनायत कर
251فَهَزَمُوهُم بِإِذْنِ اللَّهِ وَقَتَلَ دَاوُودُ جَالُوتَ وَآتَاهُ اللَّهُ الْمُلْكَ وَالْحِكْمَةَ وَعَلَّمَهُ مِمَّا يَشَاءُ ۗ وَلَوْلَا دَفْعُ اللَّهِ النَّاسَ بَعْضَهُم بِبَعْضٍ لَّفَسَدَتِ الْأَرْضُ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ ذُو فَضْلٍ عَلَى الْعَالَمِينَ
फिर तो उन लोगों ने ख़ुदा के हुक्म से दुशमनों को शिकस्त दी और दाऊद ने जालूत को क़त्ल किया और ख़ुदा ने उनको सल्तनत व तदबीर तम्द्दुन अता की और इल्म व हुनर जो चाहा उन्हें गोया घोल के पिला दिया और अगर ख़ुदा बाज़ लोगों के ज़रिए से बाज़ का दफाए (शर) न करता तो तमाम रुए ज़मीन पर फ़साद फैल जाता मगर ख़ुदा तो सारे जहाँन के लोगों पर फज़ल व रहम करता है
252تِلْكَ آيَاتُ اللَّهِ نَتْلُوهَا عَلَيْكَ بِالْحَقِّ ۚ وَإِنَّكَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ
ऐ रसूल ये ख़ुदा की सच्ची आयतें हैं जो हम तुम को ठीक ठीक पढ़के सुनाते हैं और बेशक तुम ज़रुर रसूलों में से हो
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीRevelation
250आयत

अनुवाद — अल-बकरा 250

सूरा अल-बकरा आयत 250 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ग़रज़) जब ये लोग जालूत और उसकी फौज के मुक़ाबले…

सूरा आयत 250/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 248–252. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए